संभल में शाही मस्जिद से सटे कब्रिस्‍तान की जमीन पर विवाद, 48 लोगों को नोटिस, 15 दिन में दिखाना होगा कागज

तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में 22 मकान और दुकानों का मामला सामने आया था, लेकिन आगे की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि इन भवनों में कई परिवार रह रहे हैं. इसी वजह से प्रत्येक व्यक्ति को अलग-अलग नोटिस जारी किए गए हैं.

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उत्तर प्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद से सटे कब्रिस्तान की भूमि को लेकर विवाद ने तूल पकड़ लिया है. तहसील प्रशासन ने पैमाइश के बाद सख्त कदम उठाते हुए 22 मकान और दुकानों में रह रहे कुल 48 लोगों को नोटिस जारी किए हैं. सभी को 15 दिन के भीतर अपने पक्ष में दस्तावेज पेश करने का अल्टीमेटम दिया गया है. समयसीमा पूरी होने पर बड़े प्रशासनिक एक्शन के संकेत दिए गए हैं.

कब्रिस्‍तान की जमीन पर अवैध कब्‍जे का आरोप 

मामला संभल सदर क्षेत्र के मोहल्ला कोट का है, जहां शाही जामा मस्जिद के पास स्थित कब्रिस्तान की लगभग 8 बीघा भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप है. 30 दिसंबर को तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में भूमि की पैमाइश कराई गई थी. प्रशासन के अनुसार, पैमाइश के बाद अवैध निर्माण और कब्जे से जुड़े तथ्य सामने आए, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू की गई.

15 दिन के भीतर देने होंगे दस्‍तावेज 

शुक्रवार को तहसील प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और 48 लोगों को विधिवत नोटिस तामील कराए. नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि सभी संबंधित व्यक्ति 15 दिन के भीतर अपने दावे से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत करें. तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में 22 मकान और दुकानों का मामला सामने आया था, लेकिन आगे की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि इन भवनों में कई परिवार रह रहे हैं. इसी वजह से प्रत्येक व्यक्ति को अलग-अलग नोटिस जारी किए गए हैं.

...नहीं तो हटाया जाएगा अवैध कब्‍जा

प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि यदि तय समयसीमा के भीतर जवाब नहीं दिया गया या प्रस्तुत दस्तावेज कानूनी जांच में संतोषजनक नहीं पाए गए, तो कानून के दायरे में रहते हुए कब्जा हटाने की कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा.

पैमाइश और नोटिस वितरण के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा. नोटिस जारी होने के बाद से क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है. स्थानीय लोगों की नजरें अब 15 दिन की समयसीमा पर टिकी हैं, क्योंकि इसके बाद इस विवाद में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया जा सकता है.

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