- वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे सौंदर्यीकरण और पुनर्विकास कार्य को लेकर विवाद और राजनीतिक तनाव बढ़ गया है
- CM योगी ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को गलत बताते हुए भ्रम फैलाने वालों पर आपत्ति जताई है
- SP के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी पुरानी विरासत को नष्ट करने वाली सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की है
उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी कही जाने वाली वाराणसी इन दिनों सुर्खियों में बनी हुई है. एकाएक चर्चाओं में आने की बड़ी वजह है वाराणसी में कराए जा रहे विकास कार्य. इसे लेकर सियासी बायनबाजी भी शुरू हो गई है. वाराणसी की मणिकर्णिका घाट पर चल रहे सौंदर्यीकरण और पुनर्विकास कार्य को लेकर जो विवाद शुरू हुआ था वो देखते ही देखते एक बड़े सियासी संग्राम का रूप लेता दिख रहा है. विवाद को इतना तूल पकड़ता देख सीएम योगी आदित्यनाथ शनिवार को वाराणसी के दौरे पर रहे. जहां एक तरफ सीएम योगी ने इस विवाद को लेकर कहा कि कुछ लोग जानबूझकर सोशल मीडिया पर इस तरह की अफवाह फैला रहे हैं. कुछ लोग इस तरह के पोस्ट को साझा कर काशी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ इस विवाद के बीच कांग्रेस और समाजवादी पार्टी यूपी सरकार पर निशाना साध रही है.
सीएम योगी ने कहा- भ्रम फैलाने की हो रही कोशिश
मणिकर्णिका घाट को लेकर खड़े हुए विवाद के बीच सीएम योगी ने वाराणसी का दौरा भी किया है. इस दौरे के दौरान उन्होंने साफ तौर पर कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर भ्रामक पोस्ट डालकर लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि काशी के घाटों पर धार्मिक संस्कारों में बिना हस्तक्षेप के किया जा सके, इसके लिए काम कराये जा रहे हैं. इस काम में लगी संस्थाओं को सरकार सहयोग कर रही है. अंतिम संस्कार करने जाने वालों को सहूलियत देने के लिए विकास की योजना चल रही है. शोक में आए लोगों को दुर्व्यवस्था का शिकार होना पड़ता है. कई बार तो अधजला शव देखा जाता है, जानवर शवों को नोचते हैं, कभी घाट पर पानी भरा रहता है.ऐसे में 16 संस्कारों में से एक अंतिम संस्कार को सम्मानपूर्वक पूरा करने के लिए यहां विकास कराना जरूरी है. यहां फिलहाल उसी के लिए काम चल रहा है. सीएम योगी ने आगे कहा कि दाह संस्कार में कोई हस्तक्षेप ना हो, इसको ध्यान में रखकर घाटों का विकास कराया जा रहा है.
कौन थीं अहिल्याबाई होल्कर?
अहिल्याबाई होल्कर 18वीं सदी में इंदौर औऱ मालवा की रानी थीं. आपको बात दें कि अहिल्याबाई होल्कर का जन्म 31 मई 1725 में हुआ था. छोटी उम्र में शादी होने के बाद भी उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी थी. उनको हमेशा से ही उनके आदर्श शासन व्यवस्था के लिए जाना जाता है. अहिल्याबाई होल्कर केवल एक शासिक नहीं थी. वह धर्म, सेवा, नारी शख्ति और सेवा का भी प्रतीक थीं.














