7वीं फेल हाजी कलीमुल्लाह ने 'आम' में किया वह कमाल, जो बड़े बड़े कृषि वैज्ञानिक भी नहीं कर पाए

कलीमुल्लाह खान. दुनिया उन्हें 'मैंगो मैन ऑफ इंडिया' के नाम से जानती है. हाजी कलीमुल्लाह ने वो कारनाम कर दिखाया है, जिसकी मिसाल दुनिया में शायद ही कहीं मिले. दरअसल उन्होंने एक ही पेड़ पर आम की 300 से अधिक किस्में विकसित कर दी हैं.

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  • मलीहाबाद का दशहरी आम अपने स्वाद और सुगंध के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है और इसकी पहचान बनी हुई है.
  • हाजी कलीमुल्लाह खान ने एक पेड़ पर 300 से अधिक आम की किस्में विकसित कर बागवानी की नई मिसाल कायम की.
  • भारत सरकार ने 2008 में हाजी कलीमुल्लाह खान को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया.
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लखनऊ:

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से बमुश्किल 30 किमी दूर है मलीहाबाद कस्बा. मलीहाबाद की पहचान वहां के दशहरी आमों के लिए हैं. मलीहाबाद के दशहरी आम अपने स्वाद और सुगंध की वजह से पूरी दुनिया में मशहूर हैं. लेकिन पिछले कुछ दशक से एक व्यक्ति ने भी मलीहाबाद को पहचान दी है. इस व्यक्ति का नाम है हाजी कलीमुल्लाह खान. दुनिया उन्हें 'मैंगो मैन ऑफ इंडिया' के नाम से जानती है. हाजी कलीमुल्लाह ने वो कारनाम कर दिखाया है, जिसकी मिसाल दुनिया में शायद ही कहीं मिले. दरअसल उन्होंने एक ही पेड़ पर आम की 300 से अधिक किस्में विकसित कर दी हैं. उनकी इस काम को सम्मान देते हुए भारत सरकार ने 2008 में उन्हें 'पद्मश्री'से सम्मानित किया था.

जब टूट गया था कलीमुल्लाह का सपना
भारत में आम को सम्मान देने के लिए हर साल 22 जुलाई को राष्ट्रीय आम दिवस मनाया जाता है. इस अवसर पर हाजी कलीमुल्लाह खान ने एनडीटीवी से खास बातचीत की. आम की दुनिया में अपना नाम कमा चुके हाजी कलीमुल्लाह सातवीं फेल हैं. उन्होंने बताया कि सातवीं में फेल होने के बाद से उनकी दिलचस्पी आम के बागों में बढ़ने लगी. उन्होंने बताया कि फेल होने के बाद वो अपने पिता के साथ नर्सरी में रहने लगे. वहीं पर उन्होंने जाड़ा, गर्मी और बरसात में सहने लगे. उन्होंने बताया कि नर्सरी में रहते हुए हुए ही उन्होंने 1957-58 में आम की सात किस्मों वाले एक पेड़ का विकास किया था. लेकिन अधिक पानी की वजह से वह पेड़ सूख गया. वो बताते हैं कि सात किस्मों वाला आम का पेड़ नर्सरी में तो सूख गया, लेकिन मेरे दिमाग में फलता-फूलता रहा. 

वो बताते हैं कि 1987 में के आसपास उनके एक दोस्त ने उन्हें एक बाग दिया. वहां आम का 'अस्ल ए मुकर्रर' नाम का एक पेड़ था. कलीमुल्लाह बताते हैं कि उन्होंने 'अस्ल ए मुकर्रर'पर ही अलग-अलग किस्मे उगाना शुरू किया. वो बताते हैं कि आज की तारीख में वो उस पेड़ पर आम की 300 से अधिक किस्मे उगा चुके हैं.इनमें से हर एक आम का स्वाद, रंग, आकार और खुशबू बिल्कुल जुदा है.कलिमुल्लाह इस काम को बागवानी की दुनिया में मशहूर ग्राफ्टिंग तकनीक के जरिए अंजाम देते हैं. उनका यह काम लगातार जारी है. वो बताते हैं कि 2025 में उन्होंने आम की 25 से अधिक नई किस्मे ईजाद की हैं.  कलीमुल्लाह ने बताया कि इस साल उगाई गईं 10 किस्में तो ऐसी हैं जिनको अभी तक नाम भी नहीं दिया गया है. 

एक आम में दो आम का स्वाद और सुगंध

कलीमुल्लाह ने बताया कि उन्होंने आम की एक ऐसी किस्म विकसित की है, जिसमें आम के एक ही फल में दो तरह के छिलके,दो तरह के गूदे, दो तरह के स्वाद और दो तरह के सुगंध हैं. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल ने आम की इस किस्म का नाम 'अनारकली' रखा है. वो बताते हैं कि यह आम दुनिया का असली अजूबा है. आगे की योजनाओं के सवाल पर कलीमुल्लाह बताते हैं कि पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद में आम की एक किस्म साल में तीन बार फल देती हैं. उनकी कोशिश है कि वो दशहरी, लंगड़, चौसा और अल्फांसों की भी साल में तीन बार फसल देने वाली प्रजाति विकसित करें. वो बताते हैं कि आजकल वो इसी काम में लगे हुए हैं.

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हाजी कलीमुल्लाह मलीहाबाद की अपनी अब्दुल्ला नर्सरी में हर साल आम की नई किस्में तैयार करते हैं. वो उन्हें नाम भी देते हैं. उन्होंने अबतक पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव,फिल्म अभिनेत्री ऐश्वर्या राय और तमाम दूसरी हस्तियों के नाम से आम की किस्में विकसित की हैं. उनकी संवेदनशीलता का आलम यह है कि उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों और डॉक्टरों के नाम पर भी आम की किस्में विकसित की हैं. 

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