अपने-अपने सही नाम लिखें... कांवड़ यात्रा को लेकर यूपी सरकार के मंत्री की ढाबा मालिकों को चेतावनी

कांवड़ यात्रा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण तीर्थयात्रा है. यह यात्रा सावन मास (जुलाई-अगस्त) में होती है. जिसमें लाखों कांवड़िए गंगा नदी से पवित्र जल लेकर शिव मंदिरों पर चढ़ाते हैं.

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कांवड़ यात्रा को लेकर तैयारियों में जुटा प्रशासन.
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  • कावड़ यात्रा को लेकर लगातार जिला प्रशासन एवं शासन के निर्देश सख्त है..
  • सावन को देखते हुए व्‍यापक रूप से सुरक्षा व्‍यवस्‍था की तैयारी की जा रही है.
  • इस साल सावन का महीने 11 जुलाई से शुरू हो रहा है.
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लखनऊ:

अगले महीने 11 जुलाई से सावन शुरू हो रहा है. ऐसे में श्रद्धालुओं की यात्रा को बेहतर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने कांवड़ यात्रा को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं. इस बीच कावड़ यात्रा को लेकर यूपी सरकार के राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल का एक बयान सामने आया है. जिसमें उन्होंने ढाबा चलाने वाले लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि अपने-अपने सही नाम लिखें. उन्होंने कहा कि कोई भी नॉन वेजिटेरियन दुकानदार हिंदू देवी देवताओं के नाम से नाम ना रखें. 

बता दें कि राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सख्ती की गई है. कावड़ यात्रा को लेकर लगातार जिला प्रशासन एवं शासन के निर्देश सख्त है. लाखों संख्या में कांवड़िए किसी भी गंतव्य की ओर जाते हैं तो मुजफ्फरनगर से होकर गुजरते हैं.

यातायात को डायवर्ट कराया जाएगा

बस्‍ती जिले के अपर पुलिस अधीक्षक ओपी सिंह ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बताया कि बस्‍ती से शिवरात्रि के विशेष अवसर पर करीब 5 लाख कांवड़िए अयोध्‍या से जल लेकर भद्रेश्वर नाथ मंदिर में जलाभिषेक करते हैं. उन्होंने कहा कि जिले में कई अन्‍य मंदिर हैं, जहां पर हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं. सावन माह को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक स्‍तर पर व्‍यापक रूप से सुरक्षा व्‍यवस्‍था की तैयारी कर रही है. इस दौरान आम जनता को परेशानी न हो इसके लिए यातायात को भी डायवर्ट कराया जाता है.

क्या होती है कांवड़ यात्रा

कांवड़ यात्रा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण तीर्थयात्रा है. यह विशेष रूप से भगवान शिव के भक्तों के लिए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है. यह यात्रा मुख्य रूप से सावन मास (जुलाई-अगस्त) में आयोजित होती है, जिसमें लाखों कांवड़िए गंगा नदी से पवित्र जल लेकर शिव मंदिरों, जैसे हरिद्वार के नीलकंठ महादेव, वैद्यनाथ धाम या स्थानीय शिवालयों में चढ़ाते हैं.

कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति गहरी भक्ति और समर्पण का प्रतीक है. माना जाता है कि गंगा जल से शिवलिंग का अभिषेक करने से पापों का नाश होता है, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

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