जब बेटा-बेटी पर खतरा हुआ तो मां ने प्रेमी को मौत के घाट उतारा, जंगल में दफना दी लाश

कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के रौतापुर गांव में रहने वाले गोरेलाल का गांव की ही एक विधवा महिला से चार साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था. महिला के पति की मौत के बाद गोरेलाल उसके घर का सहारा बना. महिला के पांच बच्चे (चार बेटियां और एक बेटा) उसे पिता की तरह सम्मान देते थे. लेकिन...

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  • कानपुर के चौबेपुर क्षेत्र में एक विधवा महिला के प्रेमी ने उसकी नाबालिग बेटी पर आपराधिक नीयत दिखाई थी
  • आरोपी गोरेलाल ने महिला को बेटी सौंपने के लिए दबाव बनाया और बेटे को जान से मारने की धमकी दी थी
  • महिला ने अपने भतीजे के साथ मिलकर गोरेलाल को शराब पिला कर बेसुध कर गला घोंटकर हत्या कर दी थी
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कानपुर के चौबेपुर से रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई है. जिस शख्स को बेटियां 'पिता' मानने लगे थे, वही उनकी अस्मत का दुश्मन बन बैठा. फिर ममता जब चंडी बनी, तो 50 दिन बाद जंगल से प्रेमी का कंकाल निकला. क्या है पूरा मामला आइए समझते हैं.

कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के रौतापुर गांव में रहने वाले गोरेलाल का गांव की ही एक विधवा महिला से चार साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था. महिला के पति की मौत के बाद गोरेलाल उसके घर का सहारा बना. महिला के पांच बच्चे (चार बेटियां और एक बेटा) उसे पिता की तरह सम्मान देते थे. लेकिन किसी को नहीं पता था कि जिस साये में वे खुद को सुरक्षित समझ रहे हैं, वही उनके जीवन का सबसे बड़ा खतरा बनने वाला है.

13 साल की मासूम पर टिकी बदनियत

रिश्ते में दरार तब आई जब गोरेलाल की नीयत महिला की 13 साल की नाबालिग बेटी पर खराब हो गई. वह महिला पर दबाव बनाने लगा कि वह अपनी बेटी उसे सौंप दे. जब मां ने इसका कड़ा विरोध किया, तो गोरेलाल अपनी हवस में इस कदर अंधा हो गया कि उसने महिला के इकलौते बेटे को जान से मारने की धमकी दे डाली. आरोपी मां ने बयान में कहा, "उसने कहा था कि अगर बेटी नहीं दी, तो बेटे को खत्म कर दूंगा.


31 अक्टूबर की उस रात में कत्ल की खौफनाक साजिश

अपने बच्चों को बचाने के लिए मां ने कानून हाथ में लेने का फैसला किया. 31 अक्टूबर की रात, महिला ने गोरेलाल को शादी का झांसा देकर अपने मायके बुलाया. वहां उसे इतनी शराब पिलाई गई कि वह बेसुध हो गया. इसके बाद महिला ने अपने भतीजे के साथ मिलकर गोरेलाल का गला घोंट दिया. शव को ठिकाने लगाने के लिए एक दोस्त की मदद ली गई और जंगल में गहरा गड्ढा खोदकर उसे दफन कर दिया गया.

50 दिन का सस्पेंस और पुलिस का शक

2 नवंबर को परिजनों ने गोरेलाल की गुमशुदगी दर्ज कराई. पुलिस जांच कर रही थी, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल रहा था. शक की सुई तब घूमी जब पुलिस ने देखा कि प्रेमी के गायब होने के बाद भी महिला के व्यवहार में कोई शिकन या दुख नहीं था. कड़ाई से पूछताछ हुई तो परतें खुलती चली गईं.


ममता का रौद्र रूप: "पछतावा नहीं है"

पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद भी महिला के चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था. उसने साफ तौर पर कहा कि वह एक दरिंदा बन चुका था और अपनी संतान की रक्षा के लिए उसके पास इसके अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था. पुलिस ने शव के अवशेषों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और तीसरे फरार आरोपी की तलाश जारी है.

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