लिवर ठीक करने वाली दवाई कर रही बीमार, गाजियाबाद में 5 हजार नकली गोलियां मिलीं, ऐसे हुआ भंडाफोड़

गाजियाबाद में लिवर ठीक करने के लिए नकली दवाई सप्लाई की जा रही थीं, पुलिस को मौके से 5000 गोलियां मिली हैं और 5 आरोपी बी गिरफ्तार हुए हैं. इनका पूरा नेटवर्क कॉर्पोरेट तरीके से चलता था.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • गाजियाबाद में नकली लिवर दवा बनाने और सप्लाई करने वाले एक कॉर्पोरेट गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है
  • पुलिस ने मुरादनगर में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से बड़ी मात्रा में नकली दवाइयां बरामद की हैं
  • गिरोह में मेडिकल पेशे से लेकर आठवीं पास तक विभिन्न लोग शामिल, दवा निर्माण-सप्लाई में अलग-अलग भूमिका निभाते थे
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
गाजियाबाद:

गाजियाबाद में स्वास्थ्य से बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा था. यहां एक नामी कंपनी की लिवर ठीक करने वाली दवाई की नकली खेर बरामद हुई है. पुलिस को मौके से करीब 50000 गोलियां बरामद हुई हैं. यही नहीं इन नकली गोलियों की सप्लाई कई राज्यों में की जा रही थी और पूरा धंधा कॉर्पोरेट तरीके से होता था.इसके साथ ही इनके रैपर ढक्कन डिबिया भी बरामद हुई है.मेडिकल पेशे से लेकर 8वीं पास तक लोग इस गोरखधंधे में शामिल थे.साथ में दुकानदार को शक ना हो इसीलिए नकली दवाई का भी बिल देते थे.

पांच आरोपी गिरफ्तार,क्या-क्या मिला?

गाजियाबाद में थाना मुरादनगर पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है.इसमें मयंक अग्रवाल,अनुज गर्ग,तुषार ठाकुर,आकाश ठाकुर और नितिन त्यागी हैं.पुलिस ने उनके कब्जे से नकली दवाई की 500 रैपर सीट, 1200 ढक्कन, 1200 प्लास्टिक की डिब्बी, 50000 टैबलेट और एक वैगन आर कार बरामद की है.

ऐसे होती थी नकली दवाई की सप्लाई

पूरी कहानी हम आपको बताएं, इससे पहले पकड़े गए आरोपियों का प्रोफाइल आप जान लीजिए.मयंक अग्रवाल ग्रेजुएट है और मेरठ में होलसेल दवाई का काम करता है,वहीं तुषार ठाकुर रेडियोलॉजिस्ट की पढ़ाई कर रहा है.आकाश ठाकुर और अनूप गर्ग इलेक्ट्रीशियन हैं और आठवीं पास हैं.नितिन त्यागी का मोदीनगर में मेडिकल स्टोर है.

मयंक अग्रवाल दवाई के काम से जुड़ा हुआ है और जानता है कि निजी कंपनी की लिवर 52 दवाई की मार्केट में बहुत डिमांड है.इसी कारण से मयंक ने हरियाणा के सोनीपत से नकली दवा बनवानी शुरू की और उसकी कई राज्य में सप्लाई करने लगा.दुकानदारों को शक ना हो इसीलिए मयंक नकली दवाई के असली बिल भी दुकानदारों को दिया करता था.

पुलिस ने क्या बताया?

सुरेंद्र नाथ तिवारी डीसीपी रूरल गाजियाबाद ने बताया इन लोगों के काम आपस में बंटे हुए थे.कोई दवाई बनवाता था तो कोई उसको कोरियर तो कोई सप्लाई.पुलिस के मुताबिक दवाई पर की डिब्बी पर ₹300 एमआरपी है जो इनको बन कर इन गैंग को ₹35 में मिलती थी. उसके बाद ₹100 के आसपास यह उसे बाजार में बेच देते थे.डीसीपी सुरेंद्र नाथ ने बताया कि नकली दवाई बिकने की सूचना मिली थी.पुलिस ने कार्रवाई की है.पांच लोगों को पकड़ा है, 50000 टैबलेट मिली है.आगे की जांच कर रहे हैं.सैंपल ड्रग विभाग को भेजा जा रहा है.

Featured Video Of The Day
RSS के कार्यक्रम में Mohan Bhagwat का बड़ा बयान, 'जाति नहीं योग्यता से तय होता है RSS का सरसंघचालक'
Topics mentioned in this article