साइबर ठगों ने बुजुर्ग दंपति को 70 दिन डिजिटल अरेस्ट कर 53 लाख ठगे, किडनियां खराब, डायलिसिस के भी पैसे नहीं

साइबर ठगों ने कानपुर की एक बुजुर्ग दंपति को 70 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर उनसे 53 लाख रुपये ठग लिए. ठगों ने ठगी की शिकायत बेटे से भी नहीं करने दी.

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कानपुर:

साइबर अपराध की दुनिया का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसे सुनकर कोई भी दहल जाएगा. कानपुर के कोहना थाना क्षेत्र के रानीघाट निवासी और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के रिटायर्ड सुपरिटेंडेंट इंजीनियर रमेश चंद्र और उनकी पत्नी नीलम ने अपने ही घर में कैद होकर नर्क जैसे हालात में 70 दिन बिताए. इस दौरान साइबर ठगों ने उनकी जिंदगी भर की कमाई करीब 53 लाख रुपये ठग लिए. रमेश चंद्र की दोनों किडनियां खराब हैं, लेकिन इस ठगी के बाद उनके पास डायलिसिस कराने तक के पैसे नहीं बचे हैं. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. 

साइबर ठगी की खौफनाक दास्तान

रमेश चंद्र ने बताया कि उस दिन वह अपनी पत्नी के साथ डायलिसिस कराकर लौटे थे. दोपहर करीब डेढ़ बजे एक फोन आया. फोन करने वालों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताया. इसके बाद वीडियो कॉल पर 6 घंटे तक लगातार पूछताछ चलती रही. बुजुर्ग दंपती भूखे-प्यासे सवालों के जवाब देते रहे. उन्हें पानी पीने तक की इजाजत नहीं दी गई. यहीं से शुरू हुआ 70 दिनों के डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक दौर.

ठगों ने रमेश को डराया कि जेट एयरवेज के मालिक नरेश गोयल ने उनके खाते में 538 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए हैं.इसके बाद उन्हें 10 फीसदी कमीशन मिला है. ठगों ने कहा कि नरेश गोयल के बारे में पूछताछ के लिए जिस दंपती को बुलाया गया था, उन्हें गोयल के आदमियों ने मरवा दिया. आपकी जान को भी खतरा है, इसलिए हमारी अल्फा टीम आपकी निगरानी कर रही है. आरोपियों ने रमेश के सारे एसेट (शेयर, ज्वैलरी, पीएफ) फ्रीज करने का डर दिखाया. इन ठगों ने तीन अक्टूबर को 21 लाख और 20 नवंबर को 23 लाख रुपये आरटीजीएस कराए. कुल मिलाकर किस्तों में 53 लाख रुपये ठग लिए गए. ठगों ने कहा था कि निर्दोष साबित होने पर सुप्रीम कोर्ट उनका सारा पैसा वापस कर देगा.

डिजिटल अरेस्ट के दौरान दंपती पर अत्याचार हुए, उनके बेडरूम में कुर्सी पर मोबाइल रखा रहता था, जिससे वीडियो कॉल के जरिए उन पर नजर रखी जाती थी. पांच दिन तक घर में नौकरानी को घुसने नहीं दिया गया. टीवी चलाने की इजाजत नहीं थी. वॉशरूम जाने या खाना बनाने के लिए भी कैमरे के सामने पूछना पड़ता था. जब वह बैंक या किसी शादी में जाते, तो उन्हें अपने कपड़ों का रंग बताना पड़ता था और वीडियो कॉल चालू रखनी पड़ती थी.

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घर आए बेटे को भी नहीं लगी भनक

कैमरे के पीछे से नीलम ने रोते हुए बताया कि उनका बड़ा बेटा अमेरिका में एमबीए और छोटा नोएडा में बीटेक कर रहा है. ठगों ने धमकी दी थी कि अगर किसी को बताया तो बेटों की जिंदगी बर्बाद कर देंगे और बड़े बेटे को अमेरिका से डिपोर्ट करवा देंगे. दीपावली पर जब बेटा घर आया, तो ठगों ने नाराजगी जताई और उसे कुछ भी न बताने की शर्त पर ही घर में रहने दिया.

ठगों ने पूरा नाटक फिल्मी अंदाज में रचा था. रमेश ने बताया कि वीडियो कॉल पर जो लोग दिखते थे, वे फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते थे. उन्होंने खुद को संतोष, ए अनंताराम और उमेश मच्छंदर बताया. हद तो तब हो गई जब एक रौबीले फर्जी सीबीआई अफसर ने वीडियो कॉल पर ही सुप्रीम कोर्ट की हियरिंग करवाई. इसमें जज और वकील जैसा सेटअप दिखाया गया.

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ठगी का शिकार होने के बाद रमेश की हालत बेहद नाजुक है. हाथों में बैंडेज बांधे और लड़खड़ाती जुबान से उन्होंने कहा,''मैंने जिंदगी में एक रुपया रिश्वत का नहीं लिया. मेरी मेहनत की कमाई वो ले गए.मेरे खाते में सिर्फ 14 हजार बचे थे. उसमें से तीन हजार डायलिसिस में लग गए. अब इलाज के पैसे नहीं हैं, देखते हैं कब तक सांसें चलती हैं.

कानपुर के जॉइंट पुलिस कमिश्नर आशुतोष कुमार ने बताया कि साइबर ठगों ने सीबीआई अफसर और कोर्ट का नकली सेटअप बनाकर रिटायर्ड इंजीनियर से 53 लाख की ठगी की है. साइबर थाना पुलिस मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच कर रही है. 

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