Vande Mataram protocol : राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को लेकर केंद्र सरकार में हाई लेवल मीटिंग शुरू हो गई है. हाल ही में गृह मंत्रालय की अगुवाई में एक हाई-लेवल मीटिंग हुई, जिसमें यह चर्चा की गई कि क्या वंदे मातरम के लिए भी राष्ट्रगान जन गण मन की तरह कोई तय प्रोटोकॉल बनाया जाना चाहिए. इस बैठक में कई मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे और इसका उद्देश्य राष्ट्रीय गीत की मर्यादा और गरिमा को तय करना था.
आजादी की लड़ाई की पहचान बना था 'वंदे मातरम'
बता दें कि वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी ने की थी और स्वदेशी आंदोलन के दौर में यह गीत आज़ादी की लड़ाई की पहचान बना था. संविधान सभा ने इसे राष्ट्रगान के समान ही सम्मान दिया, लेकिन अब तक इसके लिए कोई औपचारिक नियम, शिष्टाचार या कानूनी गाइडलाइन तय नहीं की गई. यही वजह है कि इसे कब, कैसे और किन मौकों पर गाया जाए, इस पर अक्सर कंफ्यूजन देखने को मिलती है.
क्या 'वंदे मातरम' के अपमान पर भी तय होगी सजा?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बैठक में यह सवाल भी उठा कि अगर वंदे मातरम का अपमान किया जाता है, तो क्या उस पर सजा का प्रावधान होना चाहिए. फिलहाल Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 केवल राष्ट्रगान के अपमान पर सजा तय करता है, राष्ट्रीय गीत के लिए नहीं. सरकार पहले भी सुप्रीम कोर्ट में साफ कर चुकी है कि वंदे मातरम को लेकर कोई कानूनी दंड व्यवस्था मौजूद नहीं है.
राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में अंतर
संविधान के अनुच्छेद 51A(a) के तहत राष्ट्रगान को खास सुरक्षा मिली हुई है. गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस में राष्ट्रगान के समय खड़े होना, उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार और गलत इस्तेमाल पर रोक जैसी बातें साफ तौर पर लिखी हैं. इसके उल्लंघन पर जेल तक की सजा हो सकती है. वहीं वंदे मातरम के लिए अब तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है.
तेज हुई सियासी बयानबाजी
इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है. बीजेपी का कहना है कि वंदे मातरम को उसका पूरा सम्मान मिलना चाहिए और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने इतिहास में इसकी अहमियत को कम किया. वहीं कांग्रेस का कहना है कि इस गीत के कुछ अंशों को लेकर पहले भी धार्मिक विविधता को ध्यान में रखते हुए बहस हुई थी और BJP इसे राजनीतिक हथियार बना रही है.














