NPS में निवेश करने वालों की मौज! अब बैंक भी बना सकेंगे अपना पेंशन फंड, करोड़ों सब्सक्राइबर्स को होगा सीधा फायदा

PFRDA ने साफ किया है कि हर बैंक पेंशन फंड नहीं बना पाएगा. इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें होंगी. बैंक की फाइनेंशियल स्थिति मजबूत होनी चाहिए. उसकी नेट वर्थ अच्छी होनी चाहिए और मैनेजमेंट सुरक्षित और भरोसेमंद होना चाहिए.

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NPS Rules Change: फिलहाल 9 करोड़ से ज्यादा लोग NPS के सदस्य हैं. पेंशन फंड वह संस्था होती है जो NPS में निवेश करने वाले लोगों से पैसा लेती है.
नई दिल्ली:

New NPS Rule: अगर आप नेशनल पेंशन सिस्टम (National Pension System) यानी NPS में निवेश करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है. पेंशन से जुड़ी सबसे बड़ी रेगुलेटर संस्था पीएफआरडीए ने बड़ा फैसला लिया है. अब बैंक भी NPS के लिए अपना पेंशन फंड (pension Fund) बना सकेंगे. इसका सीधा फायदा करोड़ों NPS सब्सक्राइबर्स को मिलेगा क्योंकि इससे पेंशन सेक्टर में मुकाबला बढ़ेगा और ग्राहकों के पास ज्यादा विकल्प होंगे.

आम निवेशकों के लिए यह फैसला इसलिए भी खास है क्योंकि अब उनकी रिटायरमेंट प्लानिंग और ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद हो सकती है.

बैंकों को क्यों मिली NPS पेंशन फंड की मंजूरी?

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी PFRDA ने साफ किया है कि बैंकों को स्वतंत्र रूप से पेंशन फंड बनाने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है. इसका मकसद पेंशन सिस्टम को मजबूत करना और ग्राहकों के हितों की सुरक्षा करना है. अभी तक नियमों के चलते बैंकों की भूमिका पेंशन फंड में सीमित थी लेकिन अब यह बदलने जा रहा है.

पेंशन फंड क्या करता है?

आसान शब्दों में समझें तो पेंशन फंड वह संस्था होती है जो NPS में निवेश करने वाले लोगों से पैसा लेती है. यही फंड उस पैसे को निवेश करता है और तय नियमों के अनुसार रिटायरमेंट के समय भुगतान करता है. यानी आपकी भविष्य की पेंशन का पूरा जिम्मा इसी पर होता है.

हर बैंक को नहीं मिलेगी एंट्री

PFRDA ने साफ किया है कि हर बैंक पेंशन फंड नहीं बना पाएगा. इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें होंगी. बैंक की फाइनेंशियल स्थिति मजबूत होनी चाहिए. उसकी नेट वर्थ अच्छी होनी चाहिए और मैनेजमेंट सुरक्षित और भरोसेमंद होना चाहिए. ताकि सिर्फ मजबूत और भरोसेमंद बैंक ही लोगों की पेंशन का पैसा संभाल सकें. 

PFRDA के पास 10 पेंशन फंड रजिस्टर्ड

इन शर्तों की पूरी जानकारी अलग से जारी की जाएगी और यह नियम नए और पुराने दोनों पेंशन फंड पर लागू होंगे. फिलहाल PFRDA के पास 10 पेंशन फंड रजिस्टर्ड हैं. अब बैंकों के आने से यह संख्या आगे बढ़ सकती है और NPS सब्सक्राइबर्स को बेहतर विकल्प मिल सकते हैं.

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पेंशन फंड के निवेश शुल्क में भी बदलाव

PFRDA ने एक और अहम फैसला लिया है. एक अप्रैल 2026 से पेंशन फंड के निवेश शुल्क की व्यवस्था बदली जाएगी. अब सरकारी और गैर सरकारी ग्राहकों के लिए अलग अलग शुल्क तय होगा. यह नियम मल्टी स्कीम फॉर्मेट वाली योजनाओं पर भी लागू होगा. हालांकि 0.015 फीसदी सालाना रेगुलेटरी शुल्क पहले की तरह जारी रहेगा.

NPS सब्सक्राइबर्स को क्या फायदा होगा?

रेगुलेटर के मुताबिक, इन बदलावों से NPS सिस्टम ज्यादा मजबूत होगा. प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहकों को बेहतर सेवा मिलेगी. लंबे समय में इससे रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली इनकम और बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा बेहतर होगी.

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NPS ट्रस्ट में नए चेहरे

PFRDA ने NPS ट्रस्ट के बोर्ड में तीन नए ट्रस्टी भी नियुक्त किए हैं. इनमें एसबीआई के पूर्व चेयरमैन दिनेश कुमार खारा यूटीआई एएमसी की पूर्व सीनियर अधिकारी स्वाति कुलकर्णी और डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के प्रमुख अरविंद गुप्ता शामिल हैं. दिनेश कुमार खारा को NPS ट्रस्ट का चेयरपर्सन भी बनाया गया है.

फिलहाल 9 करोड़ से ज्यादा लोग NPS के सदस्य हैं. अगस्त के अंत तक NPS के तहत करीब 15.5 लाख करोड़ रुपये का पैसा मैनेज किया जा रहा था. ऐसे में बैंकों को पेंशन फंड बनाने की मंजूरी को पेंशन सेक्टर के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है.

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