लू लगने से हो गए बीमार तो क्या हेल्थ इंश्योरेंस काम करेंगे, जानिए हीटस्ट्रोक पर इंश्योरेंस के क्या हैं नियम

Health Insurance Rules Regarding Heatstroke : भीषण गर्मी का असर केवल लोगों की सेहत पर ही नहीं, बल्कि उनकी जेब पर भी पड़ता है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि अगर लू लगने से तबीयत बिगड़ जाए, तो क्या हेल्थ इंश्योरेंस इसके इलाज का खर्च कवर करेगा?

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हीटस्ट्रोक पर हेल्थ इंश्योरेंस का फायदा लेने के लिए कुछ अहम शर्तें पूरी करनी होती हैं.

Health Insurance Rules Regarding Heatstroke : देशभर में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है. कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे हीटवेव और लू लगने के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है. भीषण गर्मी का असर केवल लोगों की सेहत पर ही नहीं, बल्कि उनकी जेब पर भी पड़ता है. हीटस्ट्रोक के कारण अस्पताल में भर्ती होने, दवाइयों का खर्च बढ़ने और कामकाज प्रभावित होने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं. ऐसे में लोगों के मन में एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि अगर लू लगने से तबीयत बिगड़ जाए और अस्पताल में भर्ती होना पड़े, तो क्या हेल्थ इंश्योरेंस इसका खर्च कवर करेगा? 

हीटस्ट्रोक का इलाज इंश्योरेंस में हो सकता है कवर

अगर किसी व्यक्ति को लू लगने के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है, तो सामान्य हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत इलाज का खर्च कवर हो सकता है. इसमें अस्पताल का कमरा, डॉक्टर की फीस, मेडिकल टेस्ट, दवाइयां और दूसरे जरूरी ट्रीटमेंट शामिल हो सकते हैं. हालांकि, यह सुविधा तभी मिलती है, जब मरीज की स्थिति गंभीर हो और डॉक्टर की तरफ से साफ तौर पर हीटस्ट्रोक या हीटवेव से जुड़ी बीमारी की पुष्टि की गई हो.

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क्या हैं इंश्योरेंस क्लेम की जरूरी शर्तें?

हीटस्ट्रोक पर हेल्थ इंश्योरेंस का फायदा लेने के लिए कुछ अहम शर्तें पूरी करनी होती हैं. इनमें सबसे जरूरी मरीज का अस्पताल में भर्ती होना है. ज्यादातर इंश्योरेंस कंपनियां तभी खर्च कवर करती हैं, जब मरीज कम से कम 24 घंटे तक अस्पताल में भर्ती रहे. इसके अलावा डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट में यह साफ लिखा होना चाहिए कि बीमारी लू या हीटस्ट्रोक के कारण हुई है. बिना सही डायग्नोसिस के क्लेम रिजेक्ट हो सकता है. इस दौरान पॉलिसी का एक्टिव होना भी बेहद जरूरी है. अगर आपने समय पर प्रीमियम जमा किया है और पॉलिसी चालू है, तभी इंश्योरेंस कंपनी क्लेम स्वीकार करेगी.

कब रिजेक्ट हो सकता है क्लेम ?

कुछ मामलों में इंश्योरेंस कंपनियां हीटस्ट्रोक का क्लेम रिजेक्ट भी कर सकती हैं. अगर मरीज ने सिर्फ ओपीडी में इलाज करवाया है और अस्पताल में भर्ती नहीं हुआ है, तो कई सामान्य हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में ऐसे इलाज का खर्च कवर नहीं किया जाता. इसके अलावा पॉलिसी में मौजूद एक्सक्लूजन क्लॉज भी क्लेम रिजेक्शन की वजह बन सकते हैं. कई बार लोग जरूरी डॉक्युमेंट्स पूरे नहीं जमा करते, जिससे क्लेम अटक सकता है. अस्पताल के बिल, मेडिकल रिपोर्ट, डॉक्टर का प्रूफ और डिस्चार्ज समरी संभालकर रखना जरूरी होता है. इसके अलावा इंश्योरेंस कंपनियां समय पर जानकारी न मिलने पर भी क्लेम रिजेक्ट कर सकती हैं. इसलिए अस्पताल में भर्ती होने के बाद तुरंत इंश्योरेंस कंपनी को जानकारी देना जरूरी माना जाता है.

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गर्मी में सावधानी भी जरूरी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बढ़ती गर्मी में पर्याप्त पानी पीना, धूप से बचना और शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तों को पहले से समझ लेना भी फायदेमंद हो सकता है, ताकि जरूरत पड़ने पर इलाज में आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े.

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