पहले चाइनीज डॉग... अब कोरिया का सॉकर ड्रोन, विवाद में गलगोटिया यूनिवर्सिटी, जानिए 'ड्रोन सॉकर' क्या है और कैसे करता है काम?

Galgotias University Soccer Drone: गलगोटिया यूनिवर्सिटी रोबोट डॉग के बाद अब सॉकर ड्रोन को लेकर विवाद में घिर गई है. सॉकर ड्रोन को लेकर दावा किया जा रहा है कि यह कोरिया का है.

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सॉकर ड्रोन
file photo

इंडिया एआई इंपैक्ट समिट (AI Impact Summit) में गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़े रोबोट डॉग विवाद के बाद एक और नया विवाद सामने आ गया है. गलगोटिया यूनिवर्सिटी इस बार सॉकर ड्रोन (soccer drone) को लेकर विवादों में घिर गई है. यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने दावा किया कि सॉकर ड्रोन को यूनिवर्सिटी ने खुद विकसित किया है. इस ड्रोन का वीडियो सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि यह ड्रोन असल में एक कोरियाई तकनीक है. इन विवादों से परे चलिए आपको बताते हैं यह सॉकर ड्रोन क्या है और यह कैसे काम करता है.

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ड्रोन सॉकर क्या है?

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने दावा किया कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी का यह उत्पाद दक्षिण कोरिया की कंपनी Helsel Group द्वारा विकसित सॉकर ड्रोन से काफी मिलता-जुलता है. यह उत्पाद व्यावसायिक रूप से उपलब्ध है. यह ड्रोन skyballdrone.com पर उपलब्ध Striker V3 ARF प्रोफेशनल ड्रोन सॉकर सेट से काफी समानता रखता है, जिसकी कीमत लगभग 453 डॉलर यानी करीब 40,800 रुपये है.

ड्रोन सॉकर (Drone Soccer) एक आधुनिक और रोमांचक टीम-आधारित हवाई खेल है, जिसमें खिलाड़ी सुरक्षात्मक पिंजरों (spherical cages) में बंद ड्रोन को फुटबॉल की तरह कंट्रोल करते हैं. इस खेल में एक टीम में 3 से 5 खिलाड़ी होते हैं. टीम को अपने विरोधियों को मात देते हुए ड्रोन को हवा में लटके हूप से पार कराकर अंक हासिल करने होते हैं. आसान भाषा में समझें तो जैसे बास्केटबॉल का गेम होता है, लेकिन इसमें खिलाड़ियों की जगह ड्रोन खेलते हैं. इस खेल की शुरुआत लगभग 2016-2017 में दक्षिण कोरिया में हुई थी. अब इसे विश्व हवाई खेल महासंघ (FAI) द्वारा एक आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय खेल के रूप में मान्यता प्राप्त है.

हेलसेल वेबसाइट का दावा है कि ड्रोन सॉकर के विचार को सबसे पहले उसी ने पेश किया और 2015 में इस उत्पाद का निर्माण किया. यह नया खेल 2017 में दक्षिण कोरिया में शुरू किया गया था और इसे विश्व हवाई खेल महासंघ द्वारा मान्यता प्राप्त है.

गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवादों में कैसे घिरी?

दरअसल, राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली में चल रहे AI Impact Summit 2026 के दौरान Greater Noida की Galgotias University के पवेलियन में एक रोबोट डॉग दिखाया गया और इसे नई खोज बताया गया. इस रोबोट को Orion नाम देकर यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की इनोवेशन बताया गया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ और इसके बाद से ही सवाल उठने लगे कि क्या यह रोबोट सच में यूनिवर्सिटी ने बनाया है या यह किसी विदेशी कंपनी का प्रोडक्ट है.

वीडियो के वायरल होने के बाद बात सामने आई कि AI से चलने वाला रोबोट डॉग नई खोज नहीं है. Unitree Go2, जिसे चीन की कंपनी Unitree Robotics ने बनाया है, साल 2023 से ही दुनिया भर में बेचा जा रहा है. इसके बाद गलगोटिया यूनीवर्सिटी अपने सॉकर ड्रोन के लेकर विवाद में है.

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