GSTR-1 फॉर्म भरने में अनजाने में हुई गलतियों में सुधार की मंजूरी को लेकर हाइकोर्ट का बड़ा आदेश

हाइकोर्ट ने आदेश में कहा कि टैक्स डिपार्टमेंट को ऐसी अनजानी और वास्तविक गलतियों को पहचानना चाहिए, खासकर तब जब उसे पता हो कि सरकार को इससे रेवेन्यू का कोई नुकसान नहीं हुआ है.

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नई दिल्ली:

बॉम्बे हाइकोर्ट ने गुरुवार को टैक्स डिपार्टमेंट से कहा कि अगर फॉर्म भरने में अनजाने में या प्रामाणिक गलती हुई हो लेकिन उससे सरकारी खजाने को कोई नुकसान न हो रहा हो तो कंपनियों को जीएसटीआर-1 फॉर्म में संशोधन या बदलाव करने की अनुमति दी जानी चाहिए. न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी और न्यायमूर्ति जितेंद्र जैन की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को ऐसी अनजानी और वास्तविक गलतियों को पहचानना चाहिए, खासकर तब जब उसे पता हो कि सरकार को इससे रेवेन्यू का कोई नुकसान नहीं हुआ है.

सिस्टम को टैक्सपेयर्स के अधिक अनुकूल बनाने की जरूरत: हाइकोर्ट
कोर्ट ने कहा, 'टैक्स डिपार्टमेंट को ऐसे मामलों में बेवजह मुकदमेबाजी से बचने और सिस्टम को टैक्सपेयर्स के अधिक अनुकूल बनाने की जरूरत है. इस तरह के दृष्टिकोण से टैक्स कलेक्शन में राजस्व के हित को भी बढ़ावा मिलेगा.' इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका दायर करने वाली कंपनी स्टार इंजीनियर्स (आई) प्राइवेट लिमिटेड को अपने जीएसटीआर-1 फॉर्म में ऑनलाइन या फिजिकल रूप से जरूरी संशोधन करने या गलतियां ठीक करने की मंजूरी दे दी.

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि ये गलतियां अनजाने में और वास्तविक थीं और इससे थोड़ा भी लाभ नहीं लिया गया. 

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गलत विवरण वाले जीएसटी रिटर्न को अटल मानने की जरूरत नहीं
कंपनी ने महाराष्ट्र जीएसटी विभाग के उपायुक्त की तरफ से 27 सितंबर, 2023 को जारी नोटिस को चुनौती दी थी जिसमें वित्तीय वर्ष 2021-2022 के लिए अपने फॉर्म जीएसटीआर -1 को संशोधित करने की अनुमति देने से यह कहते हुए मना कर दिया था कि यह काम एक समयसीमा तक ही हो सकता है. पीठ ने अपने आदेश में कहा कि जब रिटर्न दाखिल करते समय कोई विवरण देने में प्रामाणिक और अनजाने में गलती होती है, तो उसमें संशोधन की अनुमति दी जानी चाहिए, बशर्ते किसी तरह की राजस्व क्षति न हुई हो. गलत विवरण वाले जीएसटी रिटर्न को अटल मानने की जरूरत नहीं है.

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टैक्सपेयर्स के बीच अनजाने में गलती  होने की संभावना
इसके साथ ही अदालत ने कहा, 'जीएसटी रिटर्न दाखिल करने में होने वाली अनजानी मानवीय त्रुटियों के मामलों पर विचार करते समय इस तथ्य को ध्यान में रखना जरूरी है. जीएसटी सिस्टम काफी हद तक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम पर आधारित है लिहाजा इस प्रणाली को अपनाने वाले टैक्सपेयर्स के बीच अनजाने में और वास्तविक मानवीय त्रुटियां होने की संभावना रहती है.'

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