क्या होता है AI रिसोर्सेज का डेमोक्रेटाइजेशन? क्यों भारत के लिए है जरूरी, यहां समझिए आसानी से

AI Summit: दिल्ली में 16 फरवरी से 'AI इम्पैक्ट समिट' शुरू होने जा रहा है. यह 20 फरवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा. चल‍िए बताते हैं क‍ि AI का लोकतंत्रीकरण' (Democratization of AI) क्‍यों है जरूरी.

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AI Summit से जुड़ी जानकारी यहां.
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AI Summit : आज का दौर AI का है, ऑफ‍िस हो या ब‍िजनेस हर कोई AI की मदद से अपने काम को आसान बना रहा है. सच तो ये है क‍ि AI हमारे जीवन में पूरी तरह घुस चुका है. यही वजह है क‍ि आपको खुद को अपडेट रखना है तो AI को सीख कर अपनी स्‍क‍िल्‍स पर काम करना होगा. इसी कड़ी में एक अहम चीज जुड़ने जा रही है, जो भव‍िष्‍य में हमारे ल‍िए नई संभावनाएं लेकर आएगी. दरअसल,  दिल्ली में 16 फरवरी से 'AI इम्पैक्ट समिट' शुरू होने जा रहा है. AI इम्पैक्ट समिट 2026 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर दुनिया की बड़ी वैश्विक बैठकों में से एक है. यह 20 फरवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi), फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा जैसे कई विश्व नेता शामिल होंगे. साथ ही सुंदर पिचाई, सैम ऑल्टमैन, जेन्सेन हुआंग, बिल गेट्स और कई बड़े टेक कंपनियों के CEO भी इसमें हिस्सा लेंगे. 30 से अधिक देशों के करीब 10,000 विदेशी प्रतिनिधि और कुल मिलाकर 1.5 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन इस समिट के लिए हो चुके हैं. 
सरकारी बयान के अनुसार भारत एआई को सस्ता, भरोसेमंद और सबके लिए उपलब्ध बनाने पर काम कर रहा है. इसका मकसद है कि किसान, छात्र, शोधकर्ता, स्टार्टअप और सरकारी संस्थान सभी एआई तकनीक का फायदा उठा सकें. सरकार का मानना है कि एआई का लोकतंत्रीकरण एक बार का काम नहीं है, बल्कि यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया है. इसका उद्देश्य तकनीकी विकास को समाज के लिए उपयोगी बनाना, असमानता कम करना और सतत विकास को बढ़ावा देना है. कई देशों, खासकर ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एआई का लोकतंत्रीकरण तभी संभव है, जब उन्हें डेटा, कंप्यूटिंग क्षमता और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे जरूरी संसाधनों तक सस्ती और समान पहुंच मिले.

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AI रिसोर्सेज का 'डेमोक्रेटाइजेशन क्‍या है?


'AI का लोकतंत्रीकरण' (Democratization of AI) केवल एक तकनीकी शब्द नहीं है, बल्कि यह भविष्य की अर्थव्यवस्था की नींव है, जो आज की जरूरत बन चुका है. सच तो ये है क‍ि पिछले कुछ सालों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में बड़ी सिलिकॉन वैली कंपनिया जैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट या ओपनएआई की तस्वीर सामने आ जाती है. पर अब हवा बदल रही है और दुनिया 'AI के 'डेमोक्रेटाइजेशन' की ओर बढ़ रही है. आसान शब्दों में कहे तो AI के 'डेमोक्रेटाइजेशन' का मतलब है क‍ि इस तकनीक को कुछ चुनिंदा एक्‍सपर्ट और अमीर कंपनियों के दायरे से बाहर निकालकर आम आदमी, छोटे स्टार्टअप और सरकारी संस्थानों तक न केवल पहुंचाना है, बल्‍क‍ि AI के जर‍िए उनके काम को आसान भी बनाना है. 


यह 3 पॉइंट हैं बेहद जरूरी 

पहुंच (Access): बिना भारी-भरकम हार्डवेयर के क्लाउड के जरिए AI का उपयोग करना. 
उपयोगिता (Usability): 'नो-कोड' या 'लो-कोड' प्लेटफॉर्म, जहां आपको कोडिंग न आने पर भी आप AI टूल्स बना सकते हैं. 
लागत (Affordability): ओपन-सोर्स मॉडल्स (जैसे Meta का Llama) के कारण अब AI मॉडल तैयार करना सस्ता हो गया है. 

भारत के लिए यह क्यों है 'संजीवनी'


भारत जैसे विविधतापूर्ण और विकासशील देश के लिए AI का डेमोक्रेटाइजेशन एक ऑप्‍शन नहीं, बल्कि जरूरत बन गया है. इसके कई कारण हैं. 

  •  भाषाई बाधाओं को तोड़ना (Bhashini Mission) : भारत में 22 आधिकारिक भाषाएं और हजारों बोलियां हैं. AI का लोकतंत्रीकरण होने से एक गांव का किसान अपनी स्थानीय भाषा में सरकारी योजनाओं या मौसम की जानकारी आसानी से ले सकता है. भारत सरकार का 'भाषिणी' प्रोजेक्ट इसी दिशा में एक बड़ा कदम है. 
  •  कृषि में क्रांति: भारत की एक बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है. जब AI टूल्स हर किसान के फोन तक पहुंचेंगे, तो वे मिट्टी की गुणवत्ता, कीटों के हमले और फसल की सही कीमत का सटीक अनुमान लगा पाएंगे. यह खेती को 'जुआ' से बदलकर एक 'डेटा-संचालित व्यवसाय' बना देगा, ज‍िसके आधार पर क‍िसान को खेती करने में मदद म‍िलेगी. 
  • स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार : भारत में डॉक्टरों की कमी एक बड़ी समस्या है. AI के 'डेमोक्रेटाइजेशन' से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात नर्स भी AI-संचालित डायग्नोस्टिक टूल्स का उपयोग कर गंभीर बीमारियों का शुरुआती पता लगा सकेंगी. 
  •  स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती : अगर AI तकनीक केवल कुछ कंपनियों के पास रही, तो एकाधिकार (Monopoly) बढ़ेगा. लोकतंत्रीकरण से भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवा भी वैश्विक स्तर के ऐप्स बना सकेंगे, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. 


अभी और भी हैं मुश्‍क‍िलें 


AI रिसोर्सेज का 'डेमोक्रेटाइजेशन' की राह इतनी आसान नहीं है. इसके ल‍िए कुछ बुन‍ियादी ढांचों पर का काम करना होगा.  डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty)यानी भारतीय डेटा का उपयोग भारतीयों के लाभ के लिए हो. वहीं डिजिटल साक्षरता बेहद जरूरी है. लोगों को यह सिखाना कि AI का सही और सुरक्षित उपयोग कैसे क‍िया जाए, ताक‍ि वह एआई का एक बेहतर इस्‍तेमाल कर सकें. वहीं GPU की उपलब्धता को सुगम बनाना है. AI चलाने के लिए आवश्यक कंप्यूटिंग पावर को सस्ता बनाना बेहद आवश्‍यक है.

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वैसे सच बताएं तो AI का लोकतंत्रीकरण भारत को 'डिजिटल लेबर' से 'डिजिटल क्रिएटर' में बदलने का जर‍िया है. अगर हम इस तकनीक को घर-घर पहुंचाने में सफल रहे, तो भारत केवल विकसित राष्ट्र ही नहीं बनेगा, बल्कि दुनिया के लिए एक 'ह्यूमन-सेंट्रिक AI' का मॉडल भी पेश करेगा. 
 

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