इस कंपनी में AI एजेंट्स बनाते हैं प्रेजेंटेशन और डॉक्यूमेंट्स, इंसानों के साथ बैठकर करते हैं काम

AI एजेंट्स के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद McKinsey के CEO का मानना है कि AI इंसानों की जगह पूरी तरह नहीं ले सकता.

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दुनिया की जानी-मानी कंसल्टिंग कंपनी McKinsey & Company ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. कंपनी के CEO बॉब स्टर्नफेल्स के मुताबिक, McKinsey में इस समय कुल मिलाकर 60,000 से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं. इनमें करीब 40,000 इंसान हैं, जबकि लगभग 25,000 AI एजेंट्स भी कंपनी के लिए काम कर रहे हैं. कंपनी का लक्ष्य है कि हर इंसानी कर्मचारी के साथ कम से कम एक AI एजेंट जुड़ा हो, जो उसके काम में मदद करे और प्रोडक्टिविटी बढ़ाए.

AI एजेंट क्या हैं और कैसे करते हैं?
McKinsey कपंनी जिन AI एजेंट्स की बात कर रही है, वे साधारण चैटबॉट नहीं हैं। ये ऐसे ऑटोनॉमस सिस्टम होते हैं जो किसी समस्या को समझ सकते हैं, उसे छोटे हिस्सों में बांट सकते हैं, वर्कफ्लो डिजाइन कर सकते हैं, खुद से टास्क पूरे कर सकते हैं और बहुत कम इंसानी निर्देश के साथ रिजल्ट दे सकते हैं.

McKinsey में इन AI एजेंट्स का इस्तेमाल रिसर्च, डेटा एनालिसिस, डॉक्यूमेंट तैयार करने और क्लाइंट के लिए रिपोर्ट व प्रेजेंटेशन बनाने जैसे कामों में किया जा रहा है. ये वे काम हैं, जो पहले ज्यादातर जूनियर कंसल्टेंट्स करते थे.

25-स्क्वेयर्ड मॉडल
CEO बॉब स्टर्नफेल्स के मुताबिक, यह AI आधारित बदलाव McKinsey के '25-स्क्वेयर्ड मॉडल' का हिस्सा है. इस मॉडल के तहत कंपनी क्लाइंट-फेसिंग रोल्स को लगभग 25 प्रतिशत तक बढ़ा रही है, जबकि नॉन-क्लाइंट-फेसिंग नौकरियों में लगभग उतनी ही कटौती की जा रही है.

AI एजेंट्स की वजह से कंपनी ने पिछले एक साल में करीब 15 लाख घंटे की बचत की है, क्योंकि अब सर्च और डेटा को एक जगह समेटने जैसे रूटीन काम मशीनें कर रही हैं. उदाहरण के तौर पर, सिर्फ छह महीनों में AI एजेंट्स ने 25 लाख चार्ट तैयार किए, जिससे कंसल्टेंट्स को स्ट्रैटेजी बनाने, क्लाइंट से बातचीत और बड़े फैसलों पर ध्यान देने का समय मिला.

इंसान हमेशा आगे
AI एजेंट्स के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद McKinsey के CEO का मानना है कि AI इंसानों की जगह पूरी तरह नहीं ले सकता. उनके अनुसार, तीन ऐसे क्षेत्र हैं जहां इंसान हमेशा आगे रहेंगे. इनमें लक्ष्य तय करना, सही समय पर सही निर्णय लेना और असली क्रिएटिविटी शामिल है. AI मदद कर सकता है, लेकिन सोचने और दिशा देने का काम अब भी इंसानों के हाथ में रहेगा.
 

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