Artificial Intelligence यानी AI लगभग हर क्षेत्र का हिस्सा बन चुका है. अब चाहे वो आईटी सेक्टर हो, मार्केटिंग, अकाउंटिंग या किसी कंपनी का मैनेजमेंट हर जगह AI टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. कई कंपनियां काम को आसान और तेज बनाने के लिए अलग-अलग AI टूल्स का उपयोग कर रही हैं. इसीलिए Claude, OpenAI, ChatGPT, Gemini के जैसी हज़ारों AI वेबसाइट्स और ऐप तेज़ी से बढ़ रहे हैं. क्योंकि हमारे कामों को सेकेंड में पूरा करने में मदद करते हैं लेकिन शुरुआत में ऐसा लगता है कि इन टूल्स से काम की स्पीड बढ़ती है और प्रोडक्टिविटी बेहतर होती है, लेकिन एक नई रिसर्च बताती है कि लंबे समय तक इनका ज्यादा इस्तेमाल दिमाग पर नकारात्मक असर भी डाल सकता है.
हार्वर्ड स्टडी में खुलासा
Harvard Business Review में हुई एक नई स्टडी में शोधकर्ताओं ने अमेरिका के 1,488 कर्मचारियों से बातचीत की और उनसे पूछा कि वे अपने काम में AI टूल्स का कितना इस्तेमाल करते हैं और इसका उन पर क्या असर पड़ रहा है? रिसर्च का मकसद यह समझना था कि लगातार AI के साथ काम करने से कर्मचारियों की मानसिक स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ता है.
इस सर्वे में कई कर्मचारियों ने बताया कि वे रोजाना कई AI टूल्स को एक साथ इस्तेमाल करते हैं. उन्हें इन टूल्स को लगातार मॉनिटर करना पड़ता है, सही निर्देश देने पड़ते हैं और उनके परिणामों को भी चेक पड़ता है. इस पूरी प्रक्रिया में दिमाग पर काफी दबाव पड़ता है और कई बार लोग मानसिक थकान महसूस करने लगते हैं.
क्या होता है AI Brain Fry?
इस रिसर्च में एक नया शब्द सामने आया है जिसे 'AI Brain Fry' कहा गया है. इसका मतलब है कि AI टूल्स का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने या उन्हें लगातार मॉनिटर करने से दिमाग पर पड़ने वाली मानसिक थकान. जब कोई व्यक्ति कई AI सिस्टम को एक साथ संभालने की कोशिश करता है, तो उसके दिमाग पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है. यही स्थिति आगे चलकर AI Brain Fry कहलाती है.
स्टडी के मुताबिक करीब 14 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्होंने काम के दौरान इस तरह की मानसिक थकान महसूस की. कई लोगों ने कहा कि उन्हें काम करते समय अजीब सा 'buzzing' या 'mental fog' महसूस होता है. इसका मतलब है कि ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है, निर्णय लेने में समय लगता है और कई बार सिरदर्द जैसी समस्या भी होने लगती है.
किन प्रोफेशन में ज्यादा दिखा यह असर?
इस स्टडी में यह भी देखा गया कि अलग-अलग पेशों में AI Brain Fry का असर अलग-अलग स्तर पर देखा गया. मार्केटिंग से जुड़े लोगों में इसका असर सबसे ज्यादा पाया गया, जहां लगभग 26 प्रतिशत लोगों ने इस समस्या को महसूस किया. इसके बाद ह्यूमन रिसोर्स यानी HR क्षेत्र में लगभग 19.3 प्रतिशत लोगों ने इस तरह की मानसिक थकान की शिकायत की.
ऑपरेशंस से जुड़े कर्मचारियों में यह आंकड़ा करीब 17.9 प्रतिशत रहा. दिलचस्प बात यह है कि सॉफ्टवेयर डेवलपर्स, जो AI टूल्स का सबसे ज्यादा उपयोग करते हैं, उनमें भी लगभग 17.8 प्रतिशत लोगों ने AI Brain Fry का अनुभव किया. वहीं, लीगल प्रोफेशन से जुड़े लोगों में यह समस्या काफी कम देखी गई, जहां सिर्फ 5.6 प्रतिशत लोगों ने इस अनुभव की बात कही.
स्टडी में यह भी सामने आया कि जो कर्मचारी AI टूल्स को ज्यादा मॉनिटर करते हैं, उन्हें लगभग 14 प्रतिशत ज्यादा मानसिक प्रयास करना पड़ता है. साथ ही उनमें 12 प्रतिशत अधिक मानसिक थकान देखी गई. इसका मतलब यह है कि AI टूल्स को संभालने और मैनेज करने में भी काफी ऊर्जा लगती है.














