भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक कंटेंट को लेकर सरकार ने IT नियमों को और सख्त कर दिया है. अब AI से बनाए गए कंटेंट पर लेबलिंग ज़रूरी होगी. इसी के साथ गलत या नुकसानदायक कंटेंट को जल्दी हटाने की समयसीमा भी तय की गई है. ऐसे समय में Google ने अपने यूज़र्स के लिए एक बड़ा राहत भरा कदम उठाया है. कंपनी ने Search में एक नया टूल पेश किया है, जिससे लोग अपनी बिना अनुमति के इस्तेमाल की गई अश्लील तस्वीरें और डीपफेक इमेज को आसानी से हटाने की रिक्वेस्ट कर सकते हैं.
Google Search का नया टूल
Google के मुताबिक, यह अपडेट खास तौर पर उन लोगों की मदद के लिए लाया गया है, जो ऑनलाइन शोषण, फर्जी तस्वीरों या AI से बनाई गई गलत इमेज का शिकार हो चुके हैं. अब यूज़र्स को यह तय करने का ज़्यादा कंट्रोल मिलेगा कि उनके बारे में इंटरनेट पर क्या दिखाई दे. इसीलिए Google ने यह नया टूल लॉन्च किया है.
Google के ऑफिशियल ब्लॉग के अनुसार, अब किसी भी Search रिज़ल्ट के पास दिखने वाले तीन डॉट्स पर क्लिक करके यूज़र सीधे 'Remove result' का विकल्प चुन सकते हैं. इसके बाद Google यूज़र से यह पूछेगा कि कंटेंट हटाने की वजह क्या है? अगर तस्वीर अश्लील या निजी है, तो यूज़र यह चुन सकता है कि इसमें उसकी यौन या निजी तस्वीर दिखाई गई है. यह प्रक्रिया पहले के मुकाबले कहीं ज़्यादा सरल और यूज़र-फ्रेंडली बना दी गई है. जब कोई यूज़र हटाने की रिक्वेस्ट सबमिट करता है, तो वह उसकी स्थिति को “Results about you” नाम के एक खास डैशबोर्ड से ट्रैक कर सकता है. इस सेक्शन में यह दिखेगा कि कौन-सी रिक्वेस्ट पेंडिंग है और कौन-सी रिव्यू हो चुकी है. साथ ही, जैसे ही कोई अपडेट आएगा, यूज़र को नोटिफिकेशन भी मिलेगा.
इस अपडेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब यूज़र्स को हर लिंक या फोटो के लिए अलग-अलग शिकायत दर्ज नहीं करनी पड़ेगी. पहले यह प्रक्रिया काफी लंबी और थकाने वाली थी, लेकिन अब एक ही रिक्वेस्ट में कई अश्लील या आपत्तिजनक इमेज को चुना जा सकता है.
सिर्फ तस्वीरें ही नहीं, अब Google Search से सरकारी ID नंबर, घर का पता और फोन नंबर जैसी संवेदनशील निजी जानकारी हटाने की भी रिक्वेस्ट की जा सकती है. इतना ही नहीं, अगर भविष्य में ऐसी जानकारी दोबारा ऑनलाइन दिखती है, तो सिस्टम यूज़र को अलर्ट भी करेगा, ताकि तुरंत कार्रवाई की जा सके.
बता दें, Google ने साफ किया है कि यह हटाने की सुविधा सिर्फ Search रिज़ल्ट्स तक सीमित है. जिस वेबसाइट पर यह कंटेंट मौजूद है, वहां से वह तब तक नहीं हटेगा, जब तक वेबसाइट खुद उसे डिलीट न करे.














