Cash on Delivery Scam! जानिए कैसे होता है COD स्कैम और कैसे बच सकते हैं आप

COD में डिजिटल पेमेंट की तरह चार्जबैक या फ्रॉड मॉनिटरिंग जैसी सुरक्षा सुविधाएं नहीं होतीं. पैसा सीधे दरवाजे पर नकद या तुरंत लिया जाता है, जिससे बाद में उसे वापस पाना मुश्किल हो जाता है.

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आजकल कैश ऑन डिलीवरी यानी COD स्कैम तेजी से बढ़ रहा है. इस ठगी में लोगों के घर या ऑफिस पर ऐसा पार्सल भेजा जाता है, जिसे उन्होंने कभी ऑर्डर ही नहीं किया होता. डिलीवरी के समय कूरियर वाला पैसे मांगता है और लोग यह सोचकर भुगतान कर देते हैं कि शायद यह सामान किसी परिवार के सदस्य या सहकर्मी ने मंगाया होगा. बाद में जब पार्सल खोला जाता है, तो उसमें पत्थर, कागज या बेहद सस्ता और बेकार सामान निकलता है. इस तरह लोगों को ऑनलाइन फ्रॉड का सामना करना पड़ रहा है.

कैसे काम करता है यह स्कैम?
यह धोखाधड़ी शुरू होती है जब ठग लोगों की निजी जानकारी जैसे नाम, मोबाइल नंबर और पता हासिल कर लेते हैं. यह जानकारी डेटा लीक, पब्लिक लिस्टिंग या किसी ऑनलाइन अकाउंट के हैक होने से मिल सकती है. इसके बाद स्कैमर्स लॉजिस्टिक कंपनी के जरिए एक पार्सल भेजते हैं और उस पर एक निश्चित रकम COD के रूप में लिख देते हैं. जब कूरियर एजेंट घर पर पहुंचता है, तो वह वही रकम वसूल करता है. चूंकि COD ऑनलाइन शॉपिंग में आम भुगतान तरीका है, इसलिए लोग बिना ज्यादा जांच किए पैसे दे देते हैं.

पैसे लेने के बाद कूरियर कंपनी अपनी सामान्य प्रक्रिया के तहत वह रकम भेजने वाले के बैंक खाते में ट्रांसफर कर देती है. डिलीवरी एजेंट को पार्सल के अंदर क्या है, इसकी कोई जानकारी नहीं होती. वह सिर्फ निर्देश के अनुसार डिलीवरी और कलेक्शन करता है.

कुछ मामलों में ठग पहले से मैसेज या कॉल करके बताते हैं कि आपका पार्सल रास्ते में है, ताकि भरोसा बन सके. कभी-कभी वे 'डिलीवरी चार्ज' या 'कस्टम फीस' के नाम पर भी पैसे मांगते हैं, खासकर अगर पार्सल को गिफ्ट बताया गया हो.

ठग COD तरीका ही क्यों चुनते हैं?
COD में डिजिटल पेमेंट की तरह चार्जबैक या फ्रॉड मॉनिटरिंग जैसी सुरक्षा सुविधाएं नहीं होतीं. पैसा सीधे दरवाजे पर नकद या तुरंत लिया जाता है, जिससे बाद में उसे वापस पाना मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा, जब कूरियर एजेंट दरवाजे पर खड़ा होता है, तो लोग सामाजिक दबाव में जल्दी फैसला लेते हैं और बिना ज्यादा सोचे भुगतान कर देते हैं. ठग इसी जल्दबाजी और भरोसे का फायदा उठाते हैं.

कैसे बचें इस तरह की ठगी से?
सबसे जरूरी है कि आप अपने सभी ऑनलाइन ऑर्डर का रिकॉर्ड रखें. अगर कोई पार्सल आए और आपको याद न हो कि आपने कुछ मंगाया है, तो परिवार के सदस्यों या ऑफिस स्टाफ से जरूर पूछ लें. अगर पार्सल पहचान में नहीं आ रहा, तो उसे लेने से साफ मना कर दें. कूरियर कंपनी उसे 'रिजेक्टेड' मार्क करके वापस भेज देगी.

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अगर गलती से आपने भुगतान कर दिया है, तो तुरंत संबंधित कूरियर कंपनी के कस्टमर सपोर्ट से संपर्क करें और ट्रैकिंग नंबर के साथ शिकायत दर्ज कराएं. साथ ही भारत में आप National Cyber Crime Portal पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं. इससे जांच और संभावित रिकवरी में मदद मिल सकती है.

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