15 OTT प्लेटफॉर्म्स पर गिरी गाज, फेक न्यूज और गलत कंटेंट दिखाने पर सरकार ने लिया बड़ा एक्शन

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फेक न्यूज और गलत वीडियो-ऑडियो क्लिप्स आमतौर पर बड़े इवेंट्स जैसे चुनाव, विरोध प्रदर्शन या किसी बड़ी घटना के दौरान ज्यादा फैलते हैं. ऐसे में सरकार और एजेंसियों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि लोगों तक सही जानकारी पहुंचे.

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भारत में ऑनलाइन कंटेंट तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही गलत और आपत्तिजनक कंटेंट की समस्या भी सामने आ रही है. इसी वजह से सरकार और संसद की कमेटी अब OTT प्लेटफॉर्म्स पर ज्यादा सख्ती दिखा रही है. हाल ही में आई रिपोर्ट के अनुसार करीब 10 से 15 OTT प्लेटफॉर्म्स ऐसे हैं, जो नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में जांच के दायरे में हैं.

कई प्लेटफॉर्म्स पर चल रही जांच

संसद की कमेटी ने बताया कि कई OTT प्लेटफॉर्म्स पर गैर-कानूनी और आपत्तिजनक कंटेंट दिखाने के आरोप लगे हैं. Ministry of Information and Broadcasting ने जानकारी दी कि पहले 25 प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक किया गया था और बाद में 18 और प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई हुई. फिलहाल 10 से 15 प्लेटफॉर्म्स की जांच जारी है और जरूरत पड़ने पर उन्हें ब्लॉक भी किया जा सकता है. इसका मकसद इंटरनेट पर सुरक्षित और साफ कंटेंट उपलब्ध कराना है.

अश्लील कंटेंट पर सख्त कार्रवाई
फरवरी में सरकार ने कुछ OTT प्लेटफॉर्म्स जैसे MoodXVIP, Koyal Playpro, Digi Movieplex, Feel और Jugnu को ब्लॉक किया. इन प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट दिखाने का आरोप था, जो IT Rules 2021 का उल्लंघन करता है.

इससे पहले 2025 में भी सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 25 से ज्यादा ऐप्स को बैन किया था, जिनमें कुछ लोकप्रिय प्लेटफॉर्म्स भी शामिल थे. यह कदम ऑनलाइन कंटेंट को कंट्रोल करने के लिए उठाया गया था.

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कंटेंट रेगुलेशन में कमियां
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि OTT और ऑनलाइन मीडिया को लेकर अभी भी नियमों में कुछ कमियां हैं. इसलिए एक मजबूत और साफ-सुथरा रेगुलेशन सिस्टम बनाने की जरूरत है, ताकि गलत कंटेंट को रोका जा सके. सरकार चाहती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट की निगरानी और ज्यादा बेहतर तरीके से हो.

फेक न्यूज रोकने के लिए AI का इस्तेमाल
कमेटी ने फेक न्यूज और गलत जानकारी को लेकर भी चिंता जताई है. प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट चेक यूनिट इस दिशा में काम कर रही है और अब तक करीब 1400 URLs को ब्लॉक कर चुकी है. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि फेक कंटेंट को रोकने के लिए AI टूल्स का ज्यादा इस्तेमाल किया जाए और इस काम के लिए ज्यादा लोगों को रखा जाए, खासकर जो अलग-अलग भाषाओं को समझते हों.

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कोर्ट में भी पहुंचा मामला
10 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने इस मामले पर सुनवाई करने की बात कही. यह मामला बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें PIB Fact Check Unit को रद्द कर दिया गया था. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, जिससे यह मामला और ज्यादा अहम बन गया है.

बड़े इवेंट्स के दौरान बढ़ती फेक न्यूज
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फेक न्यूज और गलत वीडियो-ऑडियो क्लिप्स आमतौर पर बड़े इवेंट्स जैसे चुनाव, विरोध प्रदर्शन या किसी बड़ी घटना के दौरान ज्यादा फैलते हैं. ऐसे में सरकार और एजेंसियों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि लोगों तक सही जानकारी पहुंचे.

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