- विजिन्जम बंदरगाह में पूरी तरह से ऑटोमैटिक CRMG क्रेन संचालित होती हैं, जिन्हें महिलाएं नियंत्रित करती हैं
- भारत की पहली ऑटोमैटिक कैंटीलिवर रेल-माउंटेड गैन्ट्री क्रेन से महिलाओं के लिए पोर्ट में रोजगार अवसर पैदा हुए
- तिरुवनंतपुरम का विजिन्जम बंदरगाह भारत का पहला डीप सी वॉटर पोर्ट है, जो पर्यावरण के अनुकूल और सस्टेनेबल है
एक विशाल बंदरगाह, सैकड़ों कंटेनर और लगातार काम करते बड़े-बड़े क्रेन… लेकिन पोर्ट पर एक भी आदमी नजर नहीं आता. क्रेन तक को हैंडल करने के लिए किसी ऑपरेटर की जरूरत नहीं होती. पूरा सिस्टम ही पूरी तरह ऑटोमैटिक है. पोर्ट के कंट्रोल रूम में बैठी महिलाएं ही इन क्रेनों को दूर से ऑपरेट करती हैं और भारी कंटेनरों को शिप से उतारकर ट्रक पर और ट्रक से वापस शिप पर लोड करती हैं.
भारत की पहली ऑटोमैटिक CRMG क्रेन से महिलाओं के लिए नए अवसर
विजिन्जम पोर्ट में लगी भारत की पहली ऑटोमैटिक कैंटीलिवर रेल-माउंटेड गैन्ट्री (CRMG) क्रेन ने उस क्षेत्र में महिलाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोले हैं, जिसे वर्षों से पुरुषों का एकाधिकार माना जाता था. 27 वर्षीय श्रीदेवी, जो तीन साल के बेटे की मां हैं, वो बताती हैं कि पहले घर से दूर जाना उनके लिए मुश्किल था, इसलिए बीएससी करने के बाद भी वे बेरोजगार रहीं. श्रीदेवी कहती हैं, “बंदरगाह मेरे घर से सिर्फ 15 मिनट की दूरी पर है. आने-जाने में आसानी है और बच्चा भी संभल जाता है. इस नौकरी ने मेरे जैसी कई महिलाओं की जिंदगी बदल दी है.”
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अनीशा: टीचिंग से क्रेन ऑपरेटर तक का सफर
एक अन्य ऑपरेटर अनीशा ने बताया कि बीटेक के बाद टेक्नोपार्क ही नौकरी का मुख्य विकल्प था, जो उनके घर से 40 किलोमीटर दूर है. रोज़ तीन घंटे का सफर करना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने स्कूल में पढ़ाना शुरू किया पर सैलरी बहुत कम थी. वह कहती हैं, “यहां मिलने वाले अवसर ने जिंदगी बदल दी. पहले तीन महीने की ट्रेनिंग मिली और अब घर के पास ही अच्छी सैलरी वाली नौकरी है.”
भारत का पहला डीप सी वॉटर पोर्ट: पर्यावरण हितैषी उदाहरण
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित विजिन्जम भारत का पहला डीप सी वॉटर पोर्ट है. इसकी प्राकृतिक गहराई लगभग 20 मीटर से अधिक है, जिससे बड़े जहाजों को डॉक कराने के लिए ड्रेजिंग की जरूरत नहीं पड़ती. इससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होता, और यह पोर्ट सस्टेनेबल डेवलपमेंट का एक मजबूत उदाहरण बनकर उभरा है.
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मछुआरे समुदाय को भी हो रहा फायदा
पोर्ट विजिट के दौरान स्थानीय मछुआरा समुदाय ने बताया कि शुरुआत में उन्हें डर था कि मछली पकड़ने की जगह खत्म हो जाएगी. लेकिन अब स्थितियाँ उनके पक्ष में हैं. बंदरगाह के पास वे आसानी से मछली पकड़ सकते हैं. पोर्ट के लिए बनाए गए ब्रेकवाटर की वजह से समुद्र का पानी स्थिर रहता है, जिससे मछुआरों के काम में मदद मिलती है.
भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान
यह पोर्ट न केवल स्थानीय लोगों और व्यवसायों को लाभ पहुंचा रहा है बल्कि उन्नत तकनीक के साथ भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे भी ला रहा है. मार्च 2023 में दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाज़ MSC इरिना ने दक्षिण एशिया में सबसे पहले इसी बंदरगाह पर डॉक किया था.













