- सबरीमाला मंदिर सोना चोरी मामला 1998-99 से जुड़ा हुआ है और 2019 में सामने आया था, जिसमें 4.5 किलो सोना गायब
- सोने की प्लेटेड मूर्तियों का वजन कम होने पर बोर्ड ने तांबे की प्लेट के रूप में कागजों में दर्ज किया था
- विशेष जांच टीम ने मंदिर की मूर्तियों और संरचनाओं से जानबूझकर सोना हटाए जाने की पुष्टि की है
केरल में सबरीमाला मंदिर से जुड़े बहुचर्चित सोना चोरी मामले में जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है. ईडी मनी लॉटरी से जुड़े फंड ट्रांजैक्शन की जांच के तहत 21 जगहों पर छापेमारी की जा रही है. ये छापे केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के अलग‑अलग ठिकानों पर चल रहे हैं.
पुराना मामले में नए खुलासे, क्या है सबरीमाला सोना चोरी विवाद?
केरल के विश्व-प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर से जुड़ा सोना चोरी विवाद पहली बार 2019 में सामने आया, लेकिन जांच में पता चला कि इसकी जड़ें 1998–99 तक जाती हैं. साल 2019 में मंदिर की मरम्मत और गोल्ड प्लेटिंग के नाम पर भगवान अयप्पा मंदिर की मूर्तियों और संरचनाओं पर चढ़ा सोना बाहर भेजा गया था. कुल 42.8 किलो सोने की प्लेटेड मूर्तियां मरम्मत के लिए चेन्नई की एक निजी फर्म को दी गईं. लेकिन जब ये मूर्तियां लौटीं, तो उनका वजन केवल 38.2 किलो पाया गया, यानी करीब 4.5 किलो सोना गायब था.
‘घिसावट' बताकर दी गई सफाई, बोर्ड ने कागजों में खेल किया
जब वजन कम निकलने पर सवाल उठे, तो इसे सामान्य घिसावट बताकर नजरअंदाज कर मामले पर लीपापोती करने की कोशिश की गई. इससे भी गंभीर बात यह थी कि मंदिर प्रबंधन संस्था त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने कागजों में सोने की प्लेटों को तांबे की प्लेट के रूप में दर्ज कर दिया. कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही और संदिग्ध कार्रवाई माना.
SIT जांच: तस्वीरों ने खोला राज, संरचनाओं से हटाया गया सोना
अदालत के आदेश पर बनाई गई विशेष जांच टीम (SIT) ने पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना की. इससे स्पष्ट हुआ कि मंदिर की मूर्तियों, दरवाज़ों, सीढ़ियों, नक्काशीदार हिस्सों से सोने की परत जानबूझकर हटाई गई थी. हालांकि भगवान अयप्पा की मुख्य मूर्ति से सोना चोरी के सीधे सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन मंदिर की बाकी संरचनाओं से सोना गायब होने की पुष्टि हुई है.
नियम तोड़कर मंदिर से बाहर भेजी गई मूर्तियां
जांच में यह भी सामने आया कि सोने की प्लेटिंग वाली मूर्तियों को मंदिर परिसर से बाहर ले जाने की अनुमति दी गई थी. परंपरा के अनुसार इस तरह की मरम्मत मंदिर के अंदर के परिसर में ही होती है. कोर्ट ने इसे भी गलत और लापरवाह निर्णय बताया. मरम्मत से जुड़े व्यक्ति उन्नीकृष्णन पोट्टी को 475 ग्राम अतिरिक्त सोना रखने की अनुमति दी गई थी. बाद में उन्होंने देवस्वोम बोर्ड को ईमेल कर कहा कि वह यह सोना अपने रिश्तेदार की शादी में इस्तेमाल करेंगे।
यह खुलासा सामने आने के बाद विवाद और भड़क उठा.
केमिकल प्रोसेस से निकाला गया सोना, कर्नाटक तक पहुंचा
SIT जांच में पता चला कि चेन्नई की फर्म में केमिकल प्रोसेस के जरिए सोना निकाला गया और कम मात्रा में फिर से प्लेटिंग की गई. निकाला गया सोना बाद में कर्नाटक के बेल्लारी के एक ज्वेलर तक पहुंचा. इस मामले में अब तक 11 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, इनमें शामिल हैं—
- उन्नीकृष्णन पोट्टी
- ज्वेलर गोवर्धन रोड्डम
- चेन्नई की प्राइवेट फर्म का मालिक
- CPI(M) के 3 नेता, जिनमें पूर्व विधायक ए. पद्मकुमार भी शामिल
- मंदिर के मुख्य पुजारी (तंत्री) कंदरारू राजीवरु
जांच में यह भी सामने आया कि 1998–99 में चढ़ाया गया 30 किलो सोना, जिसे उद्योगपति विजय माल्या ने दान किया था. वही सोना अब चोरी और हेराफेरी के आरोपों के केंद्र में है. सबरीमाला मंदिर हर साल लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है. लेकिन इस सोना चोरी घोटाले ने मंदिर प्रशासन, देवस्वोम बोर्ड, और राजनीतिक हस्तक्षेप सभी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है.













