- तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के बीच तीखा राजनीतिक विवाद
- पिनराई विजयन ने रेड्डी के अपमानजनक मलयालम बयान पर पत्र लिखकर एलडीएफ सरकार के विकास कार्यों का बचाव किया
- रेवंत रेड्डी ने विजयन के आंकड़ों को पुराने और गलत बताते हुए तिरुवनंतपुरम में सीधे चर्चा के लिए आमंत्रित किया
केरल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के बीच राजनीतिक टकराव अब जुबानी जंग में बदल चुका है. आलम ये है कि तंज, पलटवार, सोशल मीडिया पोस्ट, सार्वजनिक टिप्पणियों और औपचारिक पत्रों तक पहुंच चुका यह विवाद रोज नए मोड़ ले रहा है. हालिया घटनाक्रम में विजयन का “डैश मोने रेवंता” वाला बयान और उसके बाद भेजा गया औपचारिक पत्र इस सियासी जंग का नया अध्याय बन गया है.
‘डैश मोने' बयान और औपचारिक पत्र के जरिए जवाब
पिनराई विजयन ने रेवंत रेड्डी के बयानों पर टिप्पणी करते हुए कहा, “डैश मोने रेवंता… जवाब आ रहा है.” यह टिप्पणी मलयालम में अपमानजनक मानी जाती है और इसी को लेकर राजनीतिक भाषा व मर्यादा पर बहस छिड़ गई. इसी दिन विजयन ने रेवंत रेड्डी को संबोधित एक औपचारिक पत्र भी लिखा. पत्र में उन्होंने साफ किया कि वे तेलंगाना सरकार के प्रदर्शन पर बहस नहीं करना चाहते और यह वहां की जनता व राजनीतिक दलों का विषय है. उन्होंने लिखा कि केरल में चुनाव प्रचार के दौरान एलडीएफ सरकार को लेकर की गई टिप्पणियों के कारण यह जवाब देना जरूरी हो गया. विजयन ने पत्र में कहा कि एलडीएफ सरकार पिछले 10 वर्षों से चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों के क्रियान्वयन की प्रगति लगातार रिपोर्ट करती रही है.
विजयन की पोस्ट पर रेवंत रेड्डी का पलटवार
इससे पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने पिनराई विजयन की सोशल मीडिया पोस्ट का जवाब देते हुए कहा कि विजयन पुराने और गलत आंकड़ों का सहारा ले रहे हैं. उन्होंने छह पन्नों के पत्र में कहा कि विजयन जिन आंकड़ों का हवाला दे रहे हैं, वे नीति आयोग के एसडीजी इंडेक्स 2023‑24 की अवधि के हैं, जो उनकी सरकार बनने से पहले के हैं. इस दौरान रेड्डी ने सवाल उठाया कि भविष्य काल में किए गए दावे क्या वास्तव में पूरे हुए या नहीं. उन्होंने यह भी बताया कि वे 7 अप्रैल को तिरुवनंतपुरम आ रहे हैं और विजयन के साथ सीधे तथ्यों पर आधारित चर्चा के लिए मंच साझा करने को तैयार हैं.
विजयन का कड़ा पलटवार और केरल मॉडल का बचाव
रेवंत रेड्डी के हमलों के जवाब में पिनराई विजयन ने फेसबुक पोस्ट के जरिए जोरदार पलटवार किया था. उन्होंने कहा कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री को “किसी ने गलत जानकारी दी है” और वे अपने राज्य की कमजोरियों को छिपाकर केरल और उसके लोगों का मज़ाक उड़ा रहे हैं. विजयन ने केरल के सतत और समावेशी विकास मॉडल का बचाव करते हुए नीति आयोग के एसडीजी इंडेक्स 2023‑24, गरीबी दर, साक्षरता दर और शिशु मृत्यु दर से जुड़े आंकड़े गिनाए। उन्होंने रेड्डी को केरल आने और यहां के कल्याणकारी मॉडल को समझने का न्योता दिया.
नेमोम रोड शो से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे विवाद की शुरुआत 1 अप्रैल को हुई थी, जब रेवंत रेड्डी ने तिरुवनंतपुरम के नेमोम निर्वाचन क्षेत्र में यूडीएफ के रोड शो के दौरान पिनराई विजयन पर सीधा हमला बोला. उन्होंने मलयालम फिल्म ‘नरसिम्हम' के मशहूर संवाद ‘नी पो मोने दिनेशा' को बदलकर “नी पो मोने विजया” कहा. रेड्डी ने दावा किया कि विजयन का समय खत्म हो चुका है और अब यूडीएफ का समय आ गया है. उन्होंने कहा कि विजयन की “एक्सपायरी डेट” समाप्त हो चुकी है और कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ केरल में सत्ता में आएगा.
चुनाव की तारीख नजदीक, सियासी बयानबाजी चरम पर
इन बयानों, पोस्टों और पत्रों के बीच केरल विधानसभा की 140 सीटों पर 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है. चुनाव से पहले रेवंत रेड्डी और पिनराई विजयन के बीच यह तीखी नोकझोंक अब केरल की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुकी है. नेताओं के बीच ताली ठोंकने के लिए शुरू हुई बयानबाजी अब व्यक्तिगत टिप्पणियों, आंकड़ों की लड़ाई और औपचारिक पत्राचार तक पहुंच गई है, जिससे चुनावी माहौल और ज्यादा गरमा गया है.














