- पंजाब के बरनाला के किसान सुखप्रीत सिंह ने अपने घर को हाईवे से बचाने के लिए उसे शिफ्ट करने का निर्णय लिया
- जयपुर-कटरा ग्रीन फील्ड हाईवे निर्माण के कारण उनकी लगभग 75 लाख की कोठी का हिस्सा सड़क मार्ग में आ गया था
- प्रशासन ने घर गिराने का आदेश दिया और मुआवजा तय किया, लेकिन किसान ने घर को टूटने से बचाने के लिए संघर्ष किया
एक इंसान अपनी पूरी जिंदगी की जमा-पूंजी लगाकर अपने सपनों का आशियाना तैयार करता है. लेकिन जब उस आशियाने पर सरकारी बुलडोजर चलने का खतरा मंडराने लगे, तो दिल टूटना लाजिमी है. पंजाब के बरनाला जिले के गांव संधू कलां के एक किसान सुखप्रीत सिंह ने अपने घर को बचाने के लिए कुछ ऐसा किया है जिसकी चर्चा अब पूरे देश में हो रही है. किसान ने घर गिराने के बजाय उसे 'लिफ्टिंग तकनीक' के जरिए पूरी की पूरी कोठी को ही 300 फीट दूर शिफ्ट करने का बीड़ा उठाया है.
लाखों की कोठी और भारतमाला प्रोजेक्ट की विपदा
किसान सुखप्रीत सिंह ने साल 2017 में अपनी इस आलीशान कोठी का निर्माण शुरू किया था, जो 2021 में करीब 75 लाख रुपये की लागत से बनकर तैयार हुई. अभी घर के काम को पूरा हुए ज्यादा समय नहीं बीता था कि केंद्र सरकार के जयपुर-कटरा ग्रीन फील्ड हाईवे (भारतमाला प्रोजेक्ट) का नोटिस आ गया. सर्वे में पता चला कि इस कोठी का लगभग 100 फीट का हिस्सा हाईवे के रास्ते में आ रहा है.
प्रशासन ने घर गिराने के आदेश दिए और मुआवजा तय कर दिया. लेकिन किसान परिवार के लिए यह घर सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि उनकी मेहनत की कमाई थी. जब अधिकारी घर गिराने पहुंचे, तो करीब डेढ़ महीने तक संघर्ष चला और रोड प्रोजेक्ट का काम भी रुका रहा.
इंस्टाग्राम वीडियो देखकर आया आइडिया
आखिरकार सरकार की योजना के आगे झुकते हुए किसान ने एक अनोखा रास्ता निकाला. उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो देखा जिसमें घरों को शिफ्ट किया जा रहा था. बस फिर क्या था, सुखप्रीत ने फैसला किया कि वह घर टूटने नहीं देंगे. उन्होंने फिर जैकों के सहारे घर को तोड़ने की बजाय शिफ्ट करने का फैसला किया. घर को अब हाइवे से 300 फीट दूर शिफ्ट किया जा रहा है. 115 फीट तक शिफ्ट किया जा चुका है और अभी 200 फीट और बचा है. उन्होंने बताया कि इस पर 15 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं और अभी 10 लाख रुपये और खर्च होने हैं.
तिरपाल के नीचे कड़कती ठंड में गुजर-बसर
घर को बचाने की इस जंग में परिवार को भारी मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं. सुखप्रीत और उनका परिवार कड़कती ठंड में कोठी के पास ही कच्ची दीवारों और तिरपाल की छत डालकर रह रहा है. उनके पालतू पशु भी खुले आसमान के नीचे हैं. किसान का कहना है कि सरकार से मिला मुआवजा नाकाफी है, क्योंकि शिफ्टिंग में ही लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं.
अभी 2 महीने और लगेगे
शिफ्टिंग का काम कर रहे ठेकेदार गुरमेल सिंह मिस्त्री ने बताया कि यह काम बेहद जोखिम भरा होता है. उन्होंने बताया, 'हम जैकों के जरिए धीरे-धीरे घर को सुरक्षित तरीके से खिसका रहे हैं. पिछले एक-डेढ़ महीने से काम चल रहा है और इसे पूरी तरह अपनी नई जगह पर सेट करने में अभी 2 महीने और लगेंगे. हमारी कोशिश है कि किसान की मेहनत की कमाई को एक दरार तक न आए.'














