1947 से लेकर अब तक, इन वित्त मंत्रियों ने पेश किए संसद में सबसे ज्यादा बजट

1 फरवरी 2026 को, रविवार के दिन, वित्त मंत्री निरमला सीतारमण यूनियन बजट पेश करने वाली हैं. ये बजट निर्मला सीतारमण का लगातार 9वां बजट होगा. लेकिन क्या आपको पता है की भारत में पहला बजट किसने पेश किया था और किसने सबसे ज्यादा बार बजट पेश किया है? चलिए , जानते हैं बजट के इतिहास से जुड़ी कुछ खास बातें.

  • आज़ादी के बाद स्वतंत्र भारत का पहला बजट: आज़ादी के बाद स्वतंत्र भारत का पहला बजट भारत के पहले वित्त मंत्री आर के शनमुखम चेट्टी ने 26  नवंबर 1947 को पेश किया था. वे पेशे से एक वकील होने के साथ साथ जाने माने इकोनॉमिस्ट भी थे. यह बजट विभाजन के आर्थिक संकट, शरणार्थियों के पुनर्वास, खाद्य कमी, रक्षा पर भारी खर्च (47%), साढ़े-सात महीने की अंतरिम अवधि, ₹171.15 करोड़ राजस्व, ₹197.29 करोड़ व्यय और लगभग ₹26 करोड़ के राजकोषीय घाटे को दिखाते हुए एक स्थिर और जिम्मेदार वित्तीय शुरुआत का संदेश देता है. 1947 में भारत का GDP लगभग ₹2.7 लाख करोड़ था.
यह उस समय दुनिया की कुल GDP का केवल लगभग 3% था. photo credit- wikipedia
    आज़ादी के बाद स्वतंत्र भारत का पहला बजट: आज़ादी के बाद स्वतंत्र भारत का पहला बजट भारत के पहले वित्त मंत्री आर के शनमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया था. वे पेशे से एक वकील होने के साथ साथ जाने माने इकोनॉमिस्ट भी थे. यह बजट विभाजन के आर्थिक संकट, शरणार्थियों के पुनर्वास, खाद्य कमी, रक्षा पर भारी खर्च (47%), साढ़े-सात महीने की अंतरिम अवधि, ₹171.15 करोड़ राजस्व, ₹197.29 करोड़ व्यय और लगभग ₹26 करोड़ के राजकोषीय घाटे को दिखाते हुए एक स्थिर और जिम्मेदार वित्तीय शुरुआत का संदेश देता है. 1947 में भारत का GDP लगभग ₹2.7 लाख करोड़ था. यह उस समय दुनिया की कुल GDP का केवल लगभग 3% था. photo credit- wikipedia
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  • सबसे अधिक बजट पेश करने वाले वित्त मंत्री: पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने अब तक देश के सबसे अधिक बजट पेश किए हैं. उन्होनें प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में वित्त मंत्री रहते हुए कुल 10 बजट पेश किए. मोरारजी देसाई के बजट राजकोषीय अनुशासन, महँगाई पर नियंत्रण, टैक्स सुधार, बचत बढ़ाने की नीति, शुरुआती आर्थिक उदारीकरण और ‘ब्लैक बजट' जैसी अवधारणाओं के लिए याद किए जाते हैं, जिन्होंने भारत की कृषि‑औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखी. मोरारजी देसाई के बजट काल में भारत का GDP लगभग ₹1.6 लाख करोड़ (1959) से बढ़कर ₹2.78 लाख करोड़ (1969) तक पहुँचा. photo credit-wikipedia
    सबसे अधिक बजट पेश करने वाले वित्त मंत्री: पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने अब तक देश के सबसे अधिक बजट पेश किए हैं. उन्होनें प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में वित्त मंत्री रहते हुए कुल 10 बजट पेश किए. मोरारजी देसाई के बजट राजकोषीय अनुशासन, महँगाई पर नियंत्रण, टैक्स सुधार, बचत बढ़ाने की नीति, शुरुआती आर्थिक उदारीकरण और ‘ब्लैक बजट' जैसी अवधारणाओं के लिए याद किए जाते हैं, जिन्होंने भारत की कृषि‑औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखी. मोरारजी देसाई के बजट काल में भारत का GDP लगभग ₹1.6 लाख करोड़ (1959) से बढ़कर ₹2.78 लाख करोड़ (1969) तक पहुँचा. photo credit-wikipedia
  • पी चिदंबरम द्वारा पेश किए गए नौ बजट: पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने संसद में नौ बार बजट पेश किया है. उनका पहला बजट 19 मार्च 1996 को प्रधानमंत्री देवगौड़ा की सरकार में था और दूसरा बजट भी उसी संयुक्त मोर्चा सरकार में पेश किया था. उन्होंने 2004 और 2008 के बीच पांच बजट पेश किए. इसके बाद 2009 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में वे एक बार फिर वित्त मंत्री बने और 2013 और 2014 में भी उन्होनें बजट पेश किया था. P. चिदंबरम के बजट वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था 1996 के $393 बिलियन से बढ़कर 2013 में $1.86 ट्रिलियन तक पहुँची, जो उदारीकरण, टैक्स‑रिफॉर्म, निवेश और उच्च-विकास दशक को दर्शाती है. photo credit- wikipedia
    पी चिदंबरम द्वारा पेश किए गए नौ बजट: पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने संसद में नौ बार बजट पेश किया है. उनका पहला बजट 19 मार्च 1996 को प्रधानमंत्री देवगौड़ा की सरकार में था और दूसरा बजट भी उसी संयुक्त मोर्चा सरकार में पेश किया था. उन्होंने 2004 और 2008 के बीच पांच बजट पेश किए. इसके बाद 2009 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में वे एक बार फिर वित्त मंत्री बने और 2013 और 2014 में भी उन्होनें बजट पेश किया था. P. चिदंबरम के बजट वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था 1996 के $393 बिलियन से बढ़कर 2013 में $1.86 ट्रिलियन तक पहुँची, जो उदारीकरण, टैक्स‑रिफॉर्म, निवेश और उच्च-विकास दशक को दर्शाती है. photo credit- wikipedia
  • प्रणब मुखर्जी ने पेश किए आठ बजट: पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने वित्त मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान 8 बजट भाषण दिए थे. उन्होंने पहले तीन बार 1982, 1983 और 1984 का बजट पेश किया था और फिर फरवरी 2009 से मार्च 2012 के बीच कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में लगातार पांच बजट पेश किए थे. प्रणब मुखर्जी के दो कार्यकालों में भारत का GDP 1982 के $200 बिलियन से बढ़कर 2012 में लगभग $1.83 ट्रिलियन तक पहुँचा, जो भारत की आर्थिक यात्रा में स्थिरता, सुधार और तेज़ी के दो अलग‑अलग युगों को दर्शाता है. photo credit- wikipedia
    प्रणब मुखर्जी ने पेश किए आठ बजट: पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने वित्त मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान 8 बजट भाषण दिए थे. उन्होंने पहले तीन बार 1982, 1983 और 1984 का बजट पेश किया था और फिर फरवरी 2009 से मार्च 2012 के बीच कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में लगातार पांच बजट पेश किए थे. प्रणब मुखर्जी के दो कार्यकालों में भारत का GDP 1982 के $200 बिलियन से बढ़कर 2012 में लगभग $1.83 ट्रिलियन तक पहुँचा, जो भारत की आर्थिक यात्रा में स्थिरता, सुधार और तेज़ी के दो अलग‑अलग युगों को दर्शाता है. photo credit- wikipedia
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  • निर्मला सीतारमण ने पेश किए आठ बजट: निर्मला सीतारमण साल 2019 से भारत की पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री बनी हुई हैं और अब तक अंतरिम बजट समेत कुल 8 बजट पेश कर चुकी हैं. निर्मला सीतारमण के बजट‑काल में भारत का GDP 2019 के $2.83 ट्रिलियन से बढ़कर 2024 में $3.90 ट्रिलियन तक पहुँचा, जो Covid के बाद की तेज़ रिकवरी, रिकॉर्ड कैपेक्स और स्थिर वृद्धि की कहानी बताता है. photo credit- wikipedia
    निर्मला सीतारमण ने पेश किए आठ बजट: निर्मला सीतारमण साल 2019 से भारत की पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री बनी हुई हैं और अब तक अंतरिम बजट समेत कुल 8 बजट पेश कर चुकी हैं. निर्मला सीतारमण के बजट‑काल में भारत का GDP 2019 के $2.83 ट्रिलियन से बढ़कर 2024 में $3.90 ट्रिलियन तक पहुँचा, जो Covid के बाद की तेज़ रिकवरी, रिकॉर्ड कैपेक्स और स्थिर वृद्धि की कहानी बताता है. photo credit- wikipedia
  • मनमोहन सिंह के नाम हैं पांच बजट: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पी वी नरसिम्हा राव सर्कार में वित्त मंत्री के पद पर रहते हुए लगातार पांच बजट पेश किए. डॉ. मनमोहन सिंह के बजट‑काल (1991-96) में भारत का GDP आर्थिक संकट के $270 बिलियन से उठकर 1996 में $393 बिलियन तक पहुँच गया, जो उदारीकरण, बाजार‑सुधारों और स्थिर पुनर्स्थापना को दर्शाता है. photo credit- wikipedia
    मनमोहन सिंह के नाम हैं पांच बजट: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पी वी नरसिम्हा राव सर्कार में वित्त मंत्री के पद पर रहते हुए लगातार पांच बजट पेश किए. डॉ. मनमोहन सिंह के बजट‑काल (1991-96) में भारत का GDP आर्थिक संकट के $270 बिलियन से उठकर 1996 में $393 बिलियन तक पहुँच गया, जो उदारीकरण, बाजार‑सुधारों और स्थिर पुनर्स्थापना को दर्शाता है. photo credit- wikipedia