Commonwealth Games 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पुरुष जैवलिन थ्रो क्वालिफायर में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने सभी को हैरान कर दिया. नीरज चोपड़ा, अरशद नदीम, एंडरसन पीटर्स और रुमेश पथिराज जैसे अनुभवी और बड़े नाम भी 84 मीटर के ऑटोमैटिक क्वालिफिकेशन मार्क को पार नहीं कर सके. जिन खिलाड़ियों ने अपने करियर में 90 मीटर से आगे भाला फेंका है, उनके लिए 80 मीटर के आसपास रुक जाना काफी चौंकाने वाला रहा. हालांकि क्वालिफाइंग राउंड में खिलाड़ी अक्सर अपनी पूरी ताकत नहीं लगाते, लेकिन इन दिग्गजों से कम से कम ऑटोमैटिक क्वालिफिकेशन हासिल करने की उम्मीद की जा रही थी. इसके बावजूद कोई भी एथलीट तय दूरी तक नहीं पहुंच पाया.
नीरज और अरशद का कैसा रहा प्रदर्शन?
टोक्यो ओलंपिक 2020 के गोल्ड और पेरिस ओलंपिक 2024 के सिल्वर मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा ने पहले प्रयास में 76.28 मीटर का थ्रो किया. दूसरे प्रयास में उन्होंने सुधार करते हुए 79.61 मीटर तक भाला फेंका और पांचवें स्थान पर रहते हुए फाइनल में जगह बना ली. इसके बाद उन्हें तीसरा प्रयास करने की जरूरत नहीं पड़ी.
वहीं पाकिस्तान के अरशद नदीम का सर्वश्रेष्ठ थ्रो 78.63 मीटर रहा, जो उन्होंने पहले ही प्रयास में किया था. वह सातवें स्थान पर रहते हुए फाइनल के लिए क्वालिफाई करने में सफल रहे.
सिर्फ चार खिलाड़ी ही पार कर सके 80 मीटर की दूरी
क्वालिफायर में केवल चार एथलीट ही 80 मीटर का आंकड़ा पार कर सके. इनमें श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिराज, ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स, दक्षिण अफ्रीका के डौव स्मिट और इंग्लैंड के बेन ईस्ट शामिल रहे. हालांकि इनमें से भी कोई खिलाड़ी 84 मीटर के ऑटोमैटिक क्वालिफिकेशन मार्क तक नहीं पहुंच सका.
क्या रही इसकी सबसे बड़ी वजह?
ग्लासगो में मुकाबले के दौरान मौसम खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया. तेज़ क्रॉसविंड की वजह से भाले की दिशा और उड़ान लगातार प्रभावित हो रही थी. ऐसे हालात में एथलीटों के लिए अपने थ्रो का सही अंदाजा लगाना आसान नहीं था. बताया गया कि खिलाड़ियों को करीब 13 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही पश्चिमी दिशा की हवा का सामना करना पड़ा. इसी वजह से कई थ्रो उम्मीद के मुताबिक नहीं जा सके.
नीरज चोपड़ा ने खुद बताई मुश्किल की वजह
क्वालिफायर के बाद नीरज चोपड़ा ने कहा कि हालात जैवलिन थ्रो के लिए बिल्कुल आसान नहीं थे. उन्होंने कहा, "मौसम काफी ठंडा था और हवा लगातार चल रही थी. सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि हवा सामने से नहीं आ रही थी, बल्कि बार-बार दिशा बदल रही थी. कई बार लगता था कि एक तरह से थ्रो करूंगा, लेकिन हवा दूसरी तरफ से आ जाती थी. ऐसे में सही रिलीज पकड़ना मुश्किल हो गया. यही वजह रही कि कोई भी खिलाड़ी ऑटोमैटिक क्वालिफिकेशन मार्क तक नहीं पहुंच पाया."
अब फाइनल पर टिकी हैं निगाहें
क्वालिफाइंग राउंड की चुनौती पार करने के बाद अब सभी की नजर फाइनल पर होगी. नीरज चोपड़ा, अरशद नदीम समेत कई बड़े नाम मेडल की दौड़ में उतरेंगे. मौसम अगर साथ देता है तो फाइनल में कहीं बेहतर और लंबी थ्रो देखने को मिल सकती हैं.