Success Story: एग्जाम से पहले टूटा 'दुखों का पहाड़', पति-सास और बेटी की मौत भी नहीं डिगा पाई हौसले, जबरदस्त है इस महिला अफसर की कहानी

'मन के हारे हार है, मन के जीते जीत...' यह पंक्ति आपने सुना होगा. लेकिन संघर्ष और मेहनत को खुद में समेटे ये लाइनें राजस्थान की रोहिणी गुर्जर पर सटीक बैठती हैं. रोहिणी के साथ करीब 2 सालों में अनगिनत दुर्घटनाएं हुई. वो टूटी और फिर खड़ी हुई... लेकिन हार नहीं मानी. अब रोहिणी अफसर बन देश के महिलाओं के लिए मिसाल बन चुकी है.

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Rohini Gurjar Success Story: 'घायल तो यहां हर एक परिंदा है, मगर जो फिर से उड़ सका, वहीं जिन्दा है...' दर्द, संघर्ष और मेहनत को खुद में समेटे ये लाइनें राजस्थान की रोहिणी गुर्जर (Rohini Gurjar) पर सटीक बैठती हैं... राजस्थान एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (RAS) में रोहिणी गुर्जर अफसर हैं, जिनको जिंदगी ने खूब तोड़ा. बार-बार सब्र का इम्तिहान लिया. फिर भी इन्‍होंने अपने आप को कभी टूटकर बिखरने नहीं दिया. कामयाबी के ख्‍वाब बुने... दर्द को ही ताकत बनाया और अनगिनत दुर्घटनाएं होने के बावजूद वो खुद सफलता की नई इबारत लिखीं.

रोहिणी कहती हैं, 'पढ़ाई छोड़ने से लगभग 20 साल बाद मैं फिर से पढ़ाई शुरू की. इस दौरान मैं बार बार टूटी, कई बार खड़ी हुई... लेकिन मैंने संकल्प ले लिया था कि मुझे यहां तक पहुंचना है, ताकि मेरे पति, दादी सास और बेटी को प्राउड हो सके... सिंगल पैरेंट्स होने के बावजूद मैं यहां तक पहुंची.'

कैसे लोगों के लिए मिसाल बनीं रोहिणी?

यह कहानी है राजस्थान के अजमेर जिले के नारेली गांव की रहने वाली रोहिणी गुर्जर की. रोहिणी आज लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. उनके साथ करीब 2 सालों में अनगिनत दुर्घटनाएं हुई. वो लगातार टूटी, लेकिन हार नहीं मानी... वो खड़ी हुई और लोगों के लिए मिसाल बनीं.

पति की मौत के बाद पास की RAS परीक्षा

साल 2003 में रोहिणी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उसकी शादी हो गई... पढ़ाई छोड़ने के करीब 20 साल बाद वो फिर से पढ़ाई शुरू की. लेकिन इस बार एक सपना था- आरएएस अधिकारी बनना..! इस सपने को पूरा करने के लिए उसके पति ने भी साथ दिया, लेकिन नियति ने उनका साथ नहीं दिया. बता दें कि आरएएस की तैयारी के दौरान उसके पति की मौत हो गई...जिसके बाद वो टूट गई. हालांकि परिवार वालों ने उसे संभाला और फिर से पढ़ाई शुरू करने की हिम्मत दी.

RAS परीक्षा के 7 दिन पहले बेटी की मौत

रोहिणी अपने आप को संभाली और आरएएस की तैयारी में जुट गई, लेकिन इस बार उसे अपने लिए नहीं, बल्कि अपने परिवार और बच्चों के लिए पढ़ाई शुरू की. पति की मौत के बाद रोहिणी को दादी सास ने RAS परीक्षा की तैयारी करने के लिए काफी प्रेरित किया, जिसके बाद वो तैयारी शुरू की. लेकिन कुछ समय बाद उनकी भी मौत हो गई.

रोहिणी के जीवन में हादसे यहीं नहीं रुके. राजस्थान एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस 2023 की मेंस परीक्षा से 7 दिन पहले उनकी 10 साल बेटी की भी मौत हो गई.

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आंख पर पट्टी बांध लिखीं मेंस 2023 की कॉपी

बेटी की मौत से रोहिणी गुर्जर पूरी तरह टूट गई... उन्होंने परीक्षा में बैठने से साफ मना कर दिया. हालांकि उनकी सहारा इस बार ननद बनी. काफी समझाने के बाद वो मेंस परीक्षा में बैठने के लिए तैयार हुई. लेकिन उनके जीवन में और इम्तिहान बाकी था... परीक्षा के दो दिन पहले रोहिणी गुर्जर खुद हादसे की शिकार हो गई... इस हादसे में रोहिणी के एक आंख पर काफी चोट लग गई.

चोट लगने के कारण डॉक्टर ने एक आंख पर पट्टी बांध दी. हालांकि रोहिणी ने हार नहीं मानी और एक आंखों पर पट्टी बांधकर मेंस परीक्षा में बैठी. हालांकि इस बार रोहिणी ने सफलता की वो मुकाम हासिल की, जो कभी उसने पति और दादी के साथ सपना देखा था. 'जीतते वो है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है.'

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