Heartwarming Story: सिंगरौली जिले में आदिवासी समुदाय की 11 वर्षीय दिल कुमारी बैगा दोनों पैरों से लाचार हैं. भविष्य में दिल कुमारी का पैरों पर खड़े होने का सपना भले ही नहीं पूरा हो पाए, लेकिन बड़ी होकर एक टीचर बनकर देश का भविष्य गढ़ने का उसका जज्बा आपके दिल को जरूर छू लेगा. पढ़ाई के प्रति दिल कुमारी का जुनून और जज्बा किसी को भी ऊर्जा से भरने के लिए काफी है.
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दिलो-दिमाग को झकझ़ोर देगी 11 वर्षीय लड़की की कहानी
सिंगरौली जिले की आदिवासी समाज की दिल कुमारी की किस्मत को ऐसी मार पड़ी है कि वो जन्म से दिव्यांग है. किस्मत दिल कुमारी पर इस कदर कठोर है कि उसका परिवार आर्थिक रूप से इतना सक्षम भी नहीं, जो उसके सपनों के महल को बनाने में कुछ ईटें जोड़ सके. बावजूद इसके दिल कुमारी अपने जुनून से आसमान झूने का का जज्बा रखती है.
जंगल से लकड़ी लाती हुई दिव्यांग दिल कुमारी बैगा
शिक्षक बनेगी थर्ड क्लास में पढ़ने वाली दिव्यांग दिल कुमारी
टीचर बनने का ख्वाब देख रहीं दिल कुमारी के परिवार की आर्थिक तंगी उसकी राह में रोड़े जरूर अटकाती है, लेकिन तीसरी में पढ़ने वाली दिल कुमारी बिना रूके चलना चाहती है, ताकि एक दिन टीचर बन सके. दिल कुमारी पढ़ने के साथ घर में मां का हाथ भी बंटाती है. कंधे पर लकड़ियां लादकर घर लाती है, चूल्हा जलाकर खाना भी बना लेती हैं.
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'बस एक साइकिल मिल जाए तो स्कूलिंग में सहूलियत होगी'
रिपोर्ट के मुताबिक जिले के बरहपान गांव के मुडवनीया टोला निवासी दिल कुमारी बैगा को अब तक किसी भी सरकारी योजना का लाभ नही मिल सका हैं, लेकिन मासूम को फिर भी किसी तरह का मलाल नही हैं. दिल कुमारी सिर्फ इतना चाहती है कि उसे जिला प्रशासन की तरफ से एक ट्राई साइकिल मिल जाए तो उसे स्कूल जाने के लिए सहूलियत होगी.
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