छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के रामानुजनगर ब्लॉक के ग्राम गणेशपुर में आयोजित कांग्रेस के स्वागत कार्यक्रम में स्कूली बच्चों की मौजूदगी और उनसे नारेबाजी कराए जाने का मामला अब बड़े प्रशासनिक एक्शन तक पहुंच गया है. NDTV पर खबर प्रसारित होने और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने गंभीरता से संज्ञान लिया था. जांच पूरी होने के बाद पूर्व माध्यमिक शाला गणेशपुर के प्रधान पाठक सभान राम सिंह को निलंबित कर दिया गया है.
कांग्रेस नेता के स्वागत में बच्चों से नारेबाजी का आरोप
दरअसल, गणेशपुर में आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया के स्वागत के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. बताया गया कि हसदेव प्रवास के दौरान तारा जाते समय यह आयोजन रखा गया. आरोप है कि भीड़ बढ़ाने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्कूली बच्चों को बुलाया और उन्हें लाइन में खड़ा कर ‘हसदेव बचाओ' के नारे लगवाए.
वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा का विरोध
कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही भाजपा नेताओं ने कड़ा ऐतराज जताया. भाजपा नेताओं ने इसे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बताते हुए कांग्रेस नेताओं की नैतिकता पर सवाल उठाए. साथ ही स्कूल समय में बच्चों को राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल कराने को पूरी तरह अनुचित बताया गया. इस संबंध में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई गई.
कांग्रेस ने आरोप किए खारिज
कांग्रेस जिला अध्यक्ष शशि सिंह ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बच्चों को कार्यक्रम में बुलाया नहीं गया था, बल्कि वे खुद उत्सुकतावश वहां पहुंच गए थे. हालांकि वायरल वीडियो और शिकायतों को देखते हुए प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए.
जांच में सामने आई स्कूल प्रबंधन की लापरवाही
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गठित जांच टीमों की रिपोर्ट में स्कूल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई. जांच में यह स्पष्ट हुआ कि स्कूल समय के दौरान छात्रों से कांग्रेस नेता का स्वागत कराया गया और उनसे नारे भी लगवाए गए.
प्रधान पाठक निलंबित, अन्य शिक्षकों पर भी कार्रवाई प्रस्तावित
जांच रिपोर्ट के आधार पर संयुक्त संचालक, सरगुजा संभाग ने पूर्व माध्यमिक शाला गणेशपुर के प्रधान पाठक सभान राम सिंह को निलंबित कर दिया. साथ ही व्याख्याता मुरित राम कोसरिया और राजेश कुमार चौधरी के खिलाफ कार्रवाई के लिए राज्य शासन को पत्र भेजा गया है.
प्रशासन का सख्त संदेश
प्रशासन की इस कार्रवाई को शिक्षा व्यवस्था में राजनीतिक दखल के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है. मामले ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्कूली बच्चों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखना प्रशासन और स्कूल प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी है.














