अभी तो माता-पिता को पहचाना भी नहीं... ड्रॉप से चली गई नन्हे विनय की आंखों की रोशनी, देशभर से उठे मदद के हाथ

सागर जिले में बंडा सिविल अस्पताल में हुई एक कथित लापरवाही से 19 महीने के विनय की जिंदगी में अंधेरा हो गया. आंखों में नोजल ड्रॉप डालने से उसकी रोशनी चली गई. 

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19 महीने के विनय की इलाज से वापस आ सकती है आंखों की रोशनी.

सागर: मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा सिविल अस्पताल में हुई एक लापरवाही ने 19 महीने के मासूम विनय की आंखों की रोशनी छीन ली. उसने अभी ठीक से माता-पिता को पहचाना भी नहीं था. लेकिन, एक गलत ड्रॉप ने उसे 'अंधा' बना दिया. दिल को झकझोर देने वाली यह घटना सामने आई तो विनय की मदद के लिए देशभर से हजारों हाथ खड़े हो गए. आम लोगों से लेकर सामाजिक संगठनों और कई ट्रस्ट मासून विनय की मदद करेंगे, जिससे उसकी आंखों की रोशनी वापस आ सकती है. इससे परिवार को भी उम्मीद बंध गई है. 

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, मासूम के साथ यह अनहोनी बंडा सिविल अस्पताल में इलाज के दौरान हुई कथित चिकित्सकीय लापरवाही का नतीजा है. पीड़ित परिवार का आरोप है कि अस्पताल में पदस्थ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु वर्मा ने इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही बरती. बच्चे की आंख में आई ड्रॉप की जगह गलती से नोजल ड्रॉप डाल दिया गया, जिसके बाद उसकी आंखों की हालत लगातार बिगड़ती चली गई. परिजनों का कहना है कि 19 महीने के विनय ने अभी हमें ठीक से पहचानना भी नहीं था. लेकिन, सिस्टम की लापरवाही ने उसकी जिंदगी में अंधेरा हो गया है. परिवार ने न्याय और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है. 

आंखों की रोशनी जाने के बाद से मायूस हो गया है विनय.

जांच रिपोर्ट से क्यों और गहराया विवाद?

दिल को झकझोर देने वाला यह मामला मीडिया में सामने आने के बाद मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया. जांच टीम में विशेषज्ञ चिकित्सकों को शामिल किया गया, जिसमें भोपाल से एक सर्जन को भी बुलाया गया. टीम ने बंडा पहुंचकर मासूम विनय का परीक्षण किया, जिसकी जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी गई है. हालांकि, जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है.  

परिवार ने की लापरवाही करने वाले डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग की.

जांच रिपोर्ट में डॉक्टरों ने क्या वजह बताई?

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. गंगा प्रसाद आर्य के अनुसार, जांच टीम का मानना है कि बच्चे की आंखों की रोशनी नोजल ड्रॉप के कारण नहीं गई है. बच्चा गंभीर कुपोषण का शिकार था, इसकी कारण उसकी आंखों की रोशनी प्रभावित हुई. इस रिपोर्ट पर परिजनों और स्थानीय लोगों ने सवाल खड़े किए हैं. उनका आरोप है कि विभाग अपने डॉक्टर की लापरवाही छिपाने की कोशिश कर रहा है. अगर, स्थिति पहले से गंभीर थी तो अस्पताल में सही उपचार के लिए उसे रेफर क्यों नहीं किया.  

सीएमएचओ डॉ. गंगा प्रसाद आर्य ने भी कहा, बच्चे का इलाज कराएंगे.

क्या वापस आ सकती है आंखों की रोशनी?

मामला सामने आने के बाद देशभर से कई सामाजिक संगठन, ट्रस्ट और सेवा संस्थाएं परिवार की मदद के लिए आगे आए हैं.  सीएमएचओ डॉ. गंगा प्रसाद आर्य ने भी कहा है कि बच्चे के इलाज की पूरी व्यवस्था की जा रही है, विशेषज्ञों की निगरानी में उपचार चल रहा है. विनय की आंखों की रोशनी वापस आने की पूरी संभावना है. 

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