Padma Shri Kailash Chandra Pant: नौकरी छोड़ी, हिंदी चुनी… अब मिलेगा पद्म श्री, जानिए कैलाश चन्द्र पन्त की कहानी

Padma Shri 2026: मध्य प्रदेश के वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार कैलाश चन्द्र पन्त को पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा. 89 वर्षीय पन्त ने सरकारी नौकरी छोड़कर हिंदी साहित्य, पत्रकारिता और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी जिंदगी लगा दी. यह सम्मान उनके दशकों लंबे योगदान की पहचान है.

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Kailash Chandra Pant:

Padma Shri 2026: गणतंत्र दिवस 2026 से एक दिन पहले भारत सरकार ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी. मध्य प्रदेश से चार हस्तियों को पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा. हिन्दी-साहित्यकार क्षेत्र में बेहतर योगदान के लिए कैलाश चन्द्र पन्त को पद्म श्री से नवाजा जाएगा. कैलाश चन्द्र पन्त प्रदेश के प्रमुख हिन्दी-साहित्यकारों, पत्रकार और हिन्दी सेवी हैं. करीब 89 साल के कैलाश पन्त ने हिन्दी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में अपना पूरा जीवन लगा दिया. उनकी कहानी काफी दिलचस्प है, आइए जानते हैं. 

सरकारी नौकरी छोड़ी 

89 साल के कैलाश चन्द्र पन्त का जन्म इंदौर जिले के महू में 1936 में हुआ था. उनका परिवार मूलरूप से उत्तराखंड के बागेश्वर जिले का खन्तोली गांव का रहने वाला है. उनकी माता हरिप्रिया पन्त और पिता स्व. लीलाधर पन्त थे. कैलाश पन्त जी ने एमए साहित्याचार्य में किया है. उनकी कहानी दिलचस्प ही नहीं प्रेरणादायक भी है, क्योंकि उन्होंने सरकारी नौकारी छोड़कर हिंदी भाषा को आगे बढ़ाने का संकल्प दिया है. 

स्वतंत्र पत्रकारिता की राह चुनी

नौकरी से त्यागपत्र देने के बाद पन्त जी ने स्वतंत्र पत्रकारिता की राह चुनी. 1963–64 में उन्होंने मासिक ‘शिक्षा प्रदीप' और 1977–98 में ‘जनधर्म' की शुरुआत. 22 साल तक साप्ताहिक ‘जनधर्म' का नियमित प्रकाशन किया. 2000–01 उन्होंने साहित्यिक ‘दुरगामी आउटलुक' की शुरुआत इंदौर से की, इसके बाद भोपाल से 2003 में द्वैमासिक पत्रिका ‘अक्षरा' की शुरुआत की जो आज भी जारी है. हिंदी को जन-जन तक पहुंचाने के अलावा उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया. इसके लिए उन्होंने स्वाध्याय विद्यापीठ' की स्थापना की.  इसके अलावा उन्होंने भोपाल में किसान भवन का निर्माण और हिन्दी भवन का विकास किया. 

कैलाश चन्द्र पन्त को मिले ये सम्मान 

1. ‘साहित्य भूषण सम्मान' – उत्तरप्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ
2. ‘नेहरू लिटरेसी अवार्ड' – भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ, नई दिल्ली
3. ‘लाल बदलेसिंह पत्रकारिता सम्मान' – माधवराव सप्रे समाचारपत्र संग्रहालय, भोपाल
4. ‘कान्तिलाल जोशी हिन्दीसेवी सम्मान' – राष्ट्रभाषा प्रचार सभा, मुंबई
5. ‘परम विशिष्ट हिन्दीसेवी सम्मान' – द्वितीय हिन्दी भाषा कुम्भ, बैंगलुरु
6. ‘संस्कृति गौरव सम्मान' – उत्तरांचल लोककला, साहित्य, संस्कृति परिषद, देहरादून
7. ‘निराला साहित्य सम्मान' – ‘रूपान्तर', कोलकाता
8. ‘हिन्दी भूषण सम्मान' – श्रीनाथद्वारा साहित्य मण्डल, नाथद्वारा
9. ‘विभूति सम्मान' – काशी विद्वत परिषद, वाराणसी
10. ‘विश्व शिरोमणि सम्मान' – अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा, जयपुर
11. इंडियन लिटरेसी बोर्ड, लखनऊ का सम्मान
12. पचहत्तरवें अवसर पर भोपाल की जनता द्वारा ‘नागरिक सम्मान'
13. ‘आधार शिला सम्मान' – हल्द्वानी (उत्तरांचल)
14. ‘सारस्वत सम्मान' – मप्र लेखक संघ
15. ‘वीरसिंह जू देव साहित्य सम्मान' – आंचलिक साहित्यकार परिषद, टीकमगढ़
16. ‘श्रेष्ठ कला आचार्य सम्मान' – अभिनव कला परिषद, भोपाल
17. ‘दीर्घकालीन सेवा सम्मान' – जेसिज क्लब, मऊ
18. ‘हिन्दी सेवी सम्मान' – रीवा

इन पदों पर रहे पन्त जी 

  • संस्थापक, स्वाध्याय विद्यापीठ–मऊ
  • सचिव, भारत कृषक समाज, भोपाल
  • सचिव, शहीद गणेशशंकर विद्यार्थी मेमोरियल पत्रकारिता ट्रस्ट–भोपाल
  • मंत्री–संचालक, मप्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति–भोपाल
  • मंत्री–संचालक, पं. रविशंकर शुक्ल हिन्दी भवन न्यास–भोपाल
  • सहायक मंत्री, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति–वर्धा
  • उप सभापति, श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति–इन्दौर
  • राष्ट्रीय संयोजक, ‘हम भारतीय अभियान'–वर्धा
  • न्यासी, बाल निकेतन ट्रस्ट–भोपाल
  • संरक्षक–समकालीन साहित्य सम्मेलन–मुंबई
  • संरक्षक, कला मन्दिर–भोपाल
  • अध्यक्ष, मध्यप्रदेश प्रौढ़ शिक्षा संघ

पुस्तकें 

  • कौन किसका आदमी, 
  • धुंध के आर–पार  

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