Kawasi Lakhma: 2 बार बेस्ट सरपंच, 1998 से लगातार MLA, अब जेल से बाहर आकर क्यों छोड़ना पड़ेगा छत्तीसगढ़?

Kawasi Lakhma: छत्तीसगढ़ कांग्रेस के दिग्गज नेता और Konta Assembly constituency से विधायक कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली है, जिसके बाद वे रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा हुए. हालांकि  Liquor Scam Chhattisgarh केस में जमानत की शर्तों के तहत फिलहाल उन्हें छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा.

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कवासी लखमा शराब घोटाले में 4 फरवरी 2026 को रायपुर सेंट्रल जेल से जमानत पर रिहा हुए हैं.
facebook/kawasilakhmaofficial

Kawasi Lakhma Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ कांग्रेस के दिग्गज नेता, पूर्व आबकारी मंत्री और कोंटा से मौजूदा विधायक कवासी लखमा आज 4 फरवरी 2026 को रायपुर की सेंट्रल जेल से जमानत पर रिहा हो गए हैं. उनकी पत्नी कवासी बुधरी समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उन्हें लेने जेल के बाहर पहुंचे हैं.

करीब सालभर बाद कवासी लखमा सलाखों के पीछे से बाहर तो आए हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें छत्तीसगढ़ छोड़ना पड़ेगा. सुप्रीम कोर्ट की शर्तों के मुताबिक वे राज्य से बाहर रहेंगे. खास बात यह है कि कवासी लखमा न केवल छत्तीसगढ़ में दो बार सर्वश्रेष्ठ सरपंच रहे हैं, बल्कि कोंटा विधानसभा क्षेत्र से साल 1998 से लगातार छठी बार विधायक भी हैं और कांग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके हैं. आइए जानते हैं कवासी लखमा का सरपंच से मंत्री और फिर जेल तक का पूरा सफर. 

कवासी लखमा का रायपुर सेंट्रल जेल के बाहर इंतजार करतीं पत्‍नी व कांग्रेस कार्यकर्ता

Kawasi Lakhma Bastar Tribal Leader: कवासी लखमा का जीवन परिचय

कवासी लखमा छत्तीसगढ़ की राजनीति का एक प्रमुख आदिवासी चेहरा हैं. वे बस्तर अंचल से आने वाले वरिष्ठ नेता हैं और लंबे समय से आदिवासी समाज, बस्तर की संस्कृति और क्षेत्रीय अधिकारों की राजनीति से जुड़े रहे हैं.

कवासी लखमा का जन्म वर्ष 1953 में बस्तर संभाग के सुकमा जिले के गांव नागारास में कवास हड़मा के घर हुआ था. उनकी पत्नी का नाम कवासी बुधरी है. उनके दो बेटे और एक बेटी हैं.

कवासी लखमा साक्षर हैं. भले ही वे अधिक पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन राजनीति की गहरी समझ रखते हैं और जनता की सियासी नब्ज पहचानते हैं. इसकी एक मिसाल उस समय देखने को मिली, जब वे दो बार सर्वश्रेष्ठ सरपंच चुने गए. 

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रायपुर सेंट्रल जेल के बाहर मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ता

बस्तर और आदिवासी मुद्दों पर मजबूत पकड़

सुकमा जिले के एक आदिवासी परिवार से आने वाले कवासी लखमा का जीवन संघर्षों से भरा रहा है. वे बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों, आदिवासी अधिकारों, जल-जंगल-जमीन और स्थानीय रोजगार जैसे मुद्दों पर हमेशा मुखर रहे हैं.

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अपने सीधे-सपाट अंदाज़ और स्थानीय बोली में संवाद करने की वजह से कवासी लखमा आदिवासी समाज में खासा प्रभाव रखते हैं. वे ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और सिंगापुर की विदेश यात्राएं भी कर चुके हैं.

कवासी लखमा का राजनीतिक सफर

  • 1995-96: अध्यक्ष, ब्लॉक युवक कांग्रेस, सुकमा.
  • 1998: कोंटा विधानसभा सीट से पहली बार विधायक निर्वाचित. इसके बाद 2003, 2008, 2013, 2018 और 2023 में लगातार कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की.
  • 2000: सदस्य, याचिका समिति और प्रत्यायोजित विधान समिति, छत्तीसगढ़ विधानसभा. साथ ही संचालक, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम.
  • 2002: अध्यक्ष, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आदिवासी प्रकोष्ठ, जिला दंतेवाड़ा.
  • 2004: अध्यक्ष, जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक, जगदलपुर.
  • सदस्य, सरकारी निगम संबंधी समिति और याचिका समिति, छत्तीसगढ़ विधानसभा.
  • 2008: पीसीसी सदस्य (कोंटा से तीन टर्म) और पीसीसी उपाध्यक्ष, वर्तमान कार्यकाल तक.
  • 2009: सदस्य, गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयकों और संकल्पों से संबंधित समिति, छत्तीसगढ़ विधानसभा.
  • जिला कांग्रेस अध्यक्ष (एक वर्ष), एआईसीसी सदस्य. आदिवासी विकास, पलायन रोकने और सामाजिक-सांस्कृतिक उत्थान के लिए सक्रिय भूमिका.
  • 2014-15: सदस्य, सदस्य सुविधा एवं सम्मान निधि समिति, छत्तीसगढ़ विधानसभा.

Liquor Scam Chhattisgarh: कवासी लखमा की गिरफ्तारी और जमानत

छत्तीसगढ़ कांग्रेस नेता कवासी लखमा शराब घोटाले से जुड़े मामले में फंस गए थे. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था. वे इस मामले में करीब 379 दिन तक रायपुर सेंट्रल जेल में बंद रहे. 4 फरवरी 2026 की शाम करीब पौने सात बजे जमानत पर र‍िहा हो गए.

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3 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने ED और EOW से जुड़े मामलों में कवासी लखमा को अंतरिम जमानत दी. करीब ढाई घंटे तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने यह शर्त रखी कि कवासी लखमा फिलहाल छत्तीसगढ़ से बाहर रहेंगे. हालांकि, अदालत में पेशी के दौरान उन्हें राज्य में आने की अनुमति होगी.

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने कवासी लखमा को अपना पासपोर्ट जमा कराने और वर्तमान पता व मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराने के निर्देश भी दिए हैं.

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