Jabalpur Bridge Collapse Action: जबलपुर में NH-45 पर रेलवे ओवरब्रिज गिरने की घटना ने पूरे प्रदेश में चिंता बढ़ा दी है. तीन साल पहले तैयार हुआ यह रेलवे ओवरब्रिज अचानक ध्वस्त हो गया, जिसके बाद सरकार से लेकर विभागीय अधिकारी तक सवालों के घेरे में आ गए हैं. मामले पर PWD मंत्री राकेश सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने और एफआईआर दर्ज कराने की बात कही है. घटना भले ही बड़ी दुर्घटना में नहीं बदली, लेकिन इसने निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर शंकाएं खड़ी कर दी हैं.
ओवरब्रिज गिरने पर मंत्री का कड़ा बयान
PWD मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि जबलपुर में जिस ROB का हिस्सा ढहा, उसे MPRDC ने बनाया था. उनका कहना है कि पुल के एक हिस्से पर मरम्मत का काम चल रहा था, इसी दौरान यह हिस्सा गिर गया. मंत्री ने साफ कहा कि यह घटना बिल्कुल नहीं होनी चाहिए थी. इसके लिए जिम्मेदार ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है और उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जाएगी.
निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई शुरू
मंत्री सिंह के मुताबिक, तीन साल पहले बना यह ब्रिज इतनी जल्दी कमजोर नहीं होना चाहिए था. जिस अधिकारी की निगरानी में इसका निर्माण हुआ था, उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि अभी किसी जांच समिति की जरूरत नहीं है क्योंकि दोषी और कमियां स्पष्ट दिखाई दे रही हैं.
कांग्रेस के आंदोलन पर मंत्री का पलटवार
कांग्रेसी आंदोलन की घोषणा पर मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि यह “दिशाहीन नेतृत्व” का परिणाम है. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश लगातार कृषि कर्मण पुरस्कार जीतता रहा है और कांग्रेस की सरकार में भी मिला था, इसलिए किसानों को लेकर प्रदर्शन की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने आंदोलन को राजनीतिक मुद्दा करार दिया.
NH-45 पर रेलवे ओवरब्रिज का 200 मीटर हिस्सा ढहा
दरअसल, रविवार शाम भोपाल–जबलपुर नेशनल हाईवे-45 पर शहपुरा रेलवे ओवरब्रिज का लगभग 200 मीटर हिस्सा गिर गया. राहत की बात यह रही कि मलबा रेलवे ट्रैक पर नहीं गिरा, जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई. यह पुल लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था.
मरम्मत के बावजूद गिरा पुल
एनएचएआई अधिकारियों का कहना है कि पुल में दरारें आने के बाद पिछले छह महीनों से मरम्मत कार्य चल रहा था. इसके बावजूद निर्माण कंपनी ढंग से संरचना को सुरक्षित नहीं कर सकी. घटना के तुरंत बाद इस प्रोजेक्ट को बनाने वाली राजस्थान की बांगड़ कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया. यह प्रोजेक्ट एनएचएआई द्वारा स्वीकृत किया गया था, जबकि क्षेत्रीय स्तर की निगरानी MPRDC द्वारा की जा रही थी.














