- इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की वजह से अब तक 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.
- भगवानदास भरणे नामक व्यक्ति की दूषित पानी से जुड़ी बीमारी के कारण अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई.
- कांग्रेस के पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने मौतों की संख्या 23 तक बताई और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए.
Indore Water Contamination: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की मार थम नहीं रही है. 64 साल के भगवानदास पिता तुकाराम भरणे ने सोमवार को अस्पताल में दम तोड़ दिया. वे पिछले 10 दिनों से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे. पहले निजी अस्पताल में भर्ती रहे, हालत बिगड़ने पर बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया, जहां कार्डियक अरेस्ट के बाद सीपीआर देकर बचाने की कोशिश हुई, वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन गैंग्रीन और मल्टी ऑर्गन फेल्योर ने उनकी सांसें छीन लीं. भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब तक 20 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं. कांग्रेस के पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर संख्या 23 बताई है.
मौत का दर्दनाक सिलसिला
भागीरथपुरा में दूषित पानी का संकट लगातार जानें ले रहा है. इलाके में पहले से ही 20 से ज्यादा लोगों की मौत की खबरें हैं. सोमवार को भगवानदास भरणे की मौत ने इस सिलसिले को और लंबा कर दिया. परिजन और स्थानीय लोग इसे प्रशासनिक विफलता मान रहे हैं, क्योंकि बीमारी फैलने और हालात बिगड़ने की सूचना समय पर मिलने के बावजूद पर्याप्त राहत नहीं दिखी.
अस्पतालों की दौड़ और बिगड़ता स्वास्थ्य
भगवानदास को पहले एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. हालत लगातार खराब होती गई तो उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया. अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्हें कार्डियक अरेस्ट आ चुका था. डॉक्टरों ने सीपीआर देकर जान बचाने की कोशिश की, वेंटिलेटर पर रखा, लेकिन गैंग्रीन और मल्टी ऑर्गन फेल्योर ने हालत को बेहद नाजुक बना दिया आखिरकार उनकी मौत हो गई.
राजनीतिक प्रतिक्रिया और सवाल
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि दूषित पानी के कारण मौतों की संख्या 23 तक पहुंच गई है. उन्होंने सवाल उठाया कि न तो कैलाश विजयवर्गीय से इस्तीफा लिया गया और न ही इंदौर के महापौर पर हत्या की एफआईआर दर्ज हुई. उन्होंने तीखा सवाल किया आखिर और कितनी मौतें सीएम मोहन यादव को नींद से जगाएंगी?
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करोड़ों खर्च, फिर भी असुरक्षित पानी
इंदौर में जल आपूर्ति को बेहतर बनाने और 24×7 सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक, अमृत योजना और स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए. इसके बावजूद शहर की पाइपलाइनों में दूषित पानी घुस गया और हजारों घरों तक पहुंच गया. इससे प्रशासन, निगरानी व्यवस्था और संस्थागत ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, आखिर इतने निवेश के बाद भी बुनियादी सुरक्षा कैसे चूक गई?
कानूनी मोर्चे पर लड़ाई
भागीरथपुरा के निवासियों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग के साथ याचिका दायर की है. आरोप है कि लोग पिछले दो वर्षों से दूषित पानी पी रहे थे और चेतावनियों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई. याचिका में संबंधित अधिकारियों पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज करने और जांच पूरी होने तक उन्हें पद से हटाने की मांग की गई है, ताकि निष्पक्ष जांच संभव हो सके.
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