इंदौर में फिर होगा भागीरथपुरा जैसा कांड! पानी के 90% नमूने फेल, जीतू पटवारी बोले- ये स्वच्छ नहीं, संक्रमित शहर 

इंदौर में पानी की गुणवत्ता को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. कांग्रेस के मुताबिक शहर के 90% पानी के सैंपल फेल पाए गए हैं. जीतू पटवारी ने इंदौर को “संक्रमित शहर” बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं. भागीरथपुरा जैसी घटना दोहराने की चेतावनी भी दी.

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इंदौर के पानी को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है. देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर पर अब “संक्रमित शहर” होने का गंभीर आरोप लगा है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दावा किया है कि शहर में सप्लाई हो रहे पानी के 90 फीसदी से ज्यादा नमूने फेल पाए गए हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हालात नहीं सुधरे तो भागीरथपुरा जैसी घटना फिर हो सकती है, जहां जहरीले पानी से कई लोगों की जान गई थी.

दरअसल, मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश और इंदौर शहर से जुड़े कई बड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी. इस दौरान पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे भी उनके साथ मौजूद थे. पटवारी ने विशेष रूप से इंदौर में पानी की गुणवत्ता को लेकर सरकार और प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया.

भागीरथपुरा घटना का जिक्र

पटवारी ने कहा कि भागीरथपुरा में गंदे पानी के कारण 36 लोगों की मौत हुई थी. उस समय कांग्रेस ने विपक्ष की भूमिका निभाते हुए पूरे मुद्दे को मजबूती से उठाया. राहुल गांधी ने भी पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और पार्टी ने आर्थिक मदद के साथ अंतिम संस्कार तक में साथ दिया.

कांग्रेस की ‘वॉटर रिपोर्ट'

कांग्रेस ने दावा किया कि इंदौर में कहीं भी लोग वैसा ही दूषित पानी तो नहीं पी रहे, इसकी जांच के लिए एक विस्तृत सर्वे किया गया. दो महीने तक अलग-अलग इलाकों में जाकर पानी के सैंपल लिए गए. इसके लिए लाइव लैब वैन चलाई गई और कुछ नमूनों को दिल्ली की माइक्रोबायोलॉजिकल लैब में भी जांच के लिए भेजा गया.

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90% सैंपल फेल होने का दावा

पार्टी ने जो रिपोर्ट पेश की, उसमें कहा गया कि शहरभर से लिए गए 240 सैंपलों में से लगभग 90 फीसदी नमूने फेल पाए गए. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि पानी में खतरनाक बैक्टीरिया और जहरीले तत्व मौजूद हैं, जो गंभीर बीमारियों और मौत तक का कारण बन सकते हैं.

‘सबसे स्वच्छ नहीं, सबसे संक्रमित शहर'

जीतू पटवारी ने इंदौर की छवि पर सीधा हमला करते हुए कहा कि यह शहर अब “देश का सबसे स्वच्छ” नहीं, बल्कि “सबसे संक्रमित शहर” बनता जा रहा है. उन्होंने बीजेपी सरकार, महापौर और नगर निगम पर निशाना साधते हुए कहा कि इंदौर में “ट्रिपल इंजन सरकार” नहीं, बल्कि “ट्रिपल अराजकता” चल रही है.

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सरकार और प्रशासन पर सवाल

पटवारी ने कहा कि जब मुख्यमंत्री खुद इस जिले के प्रभारी मंत्री हैं और नगरीय प्रशासन मंत्री भी इंदौर से हैं, तो शहर में इस तरह की स्थिति बेहद चिंताजनक है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन ने पानी की गुणवत्ता को लेकर कभी गंभीरता से जांच करवाई? क्या स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट मांगी गई?

हर वर्ग में हुआ सैंपल टेस्टिंग

कांग्रेस का दावा है कि पानी की जांच तीन स्तरों पर की गई बस्तियों में, मध्यम वर्गीय इलाकों में और पॉश क्षेत्रों में. यहां तक कि महापौर के क्षेत्र सुदामा नगर और सरकारी अस्पतालों में भी सैंपल लिए गए. रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग हर जगह पानी की गुणवत्ता खराब मिली.

बिना फिल्टर पानी पीना खतरे से खाली नहीं

पटवारी ने कहा कि इंदौर में बिना वॉटर प्यूरीफायर के पानी पीना लोगों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा है. उन्होंने यह भी कहा कि जब एक व्यक्ति को सालभर पानी उपलब्ध कराने में हजारों रुपए खर्च होते हैं, तब भी अगर दूषित पानी मिले तो यह गंभीर प्रशासनिक विफलता है.

भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर में सिर्फ पानी ही नहीं, भ्रष्टाचार भी फैल चुका है. उनके मुताबिक, यह समस्या अब “कैंसर” की तरह हर घर तक पहुंच रही है. उन्होंने कहा कि स्वच्छता के नाम पर पहचान बनाने वाला शहर अब बुनियादी जरूरतों में ही पीछे रह गया है.

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