- हर्षा रिछारिया ने अपने जीवन में प्यार को स्वीकार किया और शादी को लेकर समाज की चर्चाओं पर खुलकर बात की है
- उन्होंने बताया कि अध्यात्म में आने का कारण पैसा नहीं बल्कि जीवन में अनुभव और कमाई रही है
- हर्षा ने उज्जैन में संन्यास ग्रहण कर नया नाम हर्षानंद गिरि अपनाया और पिंडदान कर आध्यात्मिक जन्म लिया
Harsha Richhariya: संन्यास लेकर 'हर्षानंद गिरि' बनीं हर्षा रिछारिया ने एक मीडिया पॉडकास्ट में अपनी पुरानी जिंदगी के राज खोले हैं. उन्होंने समाज में अपनी शादी को लेकर होने वाली चर्चाओं और अपनी लव लाइफ पर खुलकर बात की.
हर्षा ने कहा कि "अगर मैं बोलूं कि जीवन में मुझे किसी से प्यार नहीं हुआ तो यह झूठ है. मैंने अपना जीवन बिना प्यार के निकाला है या मेरा कोई पार्टनर नहीं रहा तो यह कहना भी गलत है. हां, मुझे भी प्यार हुआ है." इसके साथ ही उन्होंने यह भी जिक्र किया कि समाज को हमेशा इस बात की चिंता सताती रहती है कि हर्षा रिछारिया आखिर शादी कब करेंगी.
महाकुंभ से मिली पहचान और संन्यास का सफर
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के झांसी (मऊरानीपुर) में 26 मार्च 1994 को जन्मीं का परिवार बाद में भोपाल में बस गया था. ग्लैमर वर्ल्ड को छोड़कर आध्यात्म की राह चुनने वाली हर्षा प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान अचानक चर्चा में आईं. 4 जनवरी 2025 को निरंजनी अखाड़े की पेशवाई में पीले वस्त्र और रुद्राक्ष की माला पहने जब वे रथ पर बैठी नजर आईं, तो उनकी तस्वीरें वायरल हो गईं. हालांकि, इसके बाद उन्हें काफी ट्रोलिंग का सामना भी करना पड़ा था.
इसके बाद, 19 अप्रैल 2026 को उन्होंने पूरी तरह सांसारिक दुनिया को अलविदा कह दिया. मध्य प्रदेश के उज्जैन में मंगलनाथ स्थित गंगाघाट पर मौनी तीर्थ आश्रम में उन्होंने पंचायती निरंजनी अखाड़ा के पीठाधीश्वर सुमनानंद गिरि महाराज से दीक्षा ली.
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स्वयं का पिंडदान और नया नाम
उज्जैन में संन्यास की कठिन परंपराओं को निभाते हुए हर्षा ने शिखा और दंड का त्याग किया. उन्होंने अपने पितरों के तर्पण के साथ-साथ स्वयं का भी पिंडदान किया, जिसे सनातन धर्म में सांसारिक रूप से 'अंतिम संस्कार' और नए आध्यात्मिक जन्म का प्रतीक माना जाता है. दीक्षा के बाद अब उन्हें नया नाम ‘हर्षानंद गिरि' मिला है, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने नए जीवन की शुरुआत बताया.
हर्षा रिछारिया ने युवतियों को बांटी तलवारें
संन्यास लेने के तुरंत बाद साध्वी हर्षानंद गिरी एक नए विवाद में घिर गई हैं. मध्य प्रदेश के उज्जैन से करीब 22 किलोमीटर दूर लक्ष्मीपुरा में 8 मई 2026 से आयोजित 7 दिवसीय देवी प्रवचन और 108 कुंडीय यज्ञ चल रहा था. 14 मई को इस आयोजन के समापन के दिन साध्वी हर्षानंद ने करणी सेना के सहयोग से मंच से 11 युवतियों को तलवारें बांटीं.
इस दौरान उन्होंने युवतियों को 'लव जिहाद' से सावधान रहने और सनातनी बने रहने की शपथ दिलाई. साथ ही उन्होंने लड़कियों से घुड़सवारी और शस्त्र विद्या सीखने की भी अपील की. साध्वी ने हाल ही में भोपाल में हुए एक विवाद को लेकर भी तीखा बयान दिया. उन्होंने दावा किया कि "हिंदू लड़कियों को टारगेट किया जा रहा है." इसके साथ ही उन्होंने वहां एक बजरंग दल कार्यकर्ता की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि "उन्होंने वही किया, जिसके वे हकदार थे."
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सोशल मीडिया पर जबरदस्त फैन फॉलोइंग
संन्यास से पहले हर्षा एक बेहद लोकप्रिय सनातनी प्रचारक और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर रही हैं. खुद को महादेव और मां पार्वती की उपासक बताने वाली हर्षा के इंस्टाग्राम पर करीब 1.7 मिलियन (17 लाख) और फेसबुक पर 160K से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. संन्यास, लव लाइफ पर बेबाक बयान और अब तलवार वितरण के इस नए विवाद के बाद वे एक बार फिर इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बन गई हैं.
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