MP के इस अस्पताल में मौत का खेल! फर्जी MBBS डॉक्टर बनकर कर रहे थे इलाज, पुलिस ने तीन डॉक्टरों को किया गिरफ्तार

Damoh Fake Doctor: मध्य प्रदेश के दमोह स्थित शासकीय संजीवनी क्लीनिक में पदस्थ दो डॉक्टरों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. दोनों फर्जी डिग्री पर नौकरी कर रहे थे. इसके अलावा जबलपुर के एक अस्पताल से एक अन्य फर्जी डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया है. ये ढाई साल से इस अस्पताल में पदस्थ था.

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फेक डॉक्टर कुमार सचिन यादव, डॉ. राजपाल गौर और डॉ अजय मौर्य को गिरफ्तार किया गया है.

Damoh Fake Doctor: मध्य प्रदेश के दमोह स्थित शासकीय संजीवनी क्लीनिक में पदस्थ दो डॉक्टरों कुमार सचिन यादव और राजपाल गौर की नियुक्ति फर्जी डिग्री पर किया गया. यह खुलासा एसपी आनंद कलादगी ने किया है. साथ ही दोनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. इसके अलावा जबलपुर से एक अन्य फर्जी डॉक्टर को पुलिस ने धर दबोचा है. इस मामले की जांच की जा रही है कि जिले में अभी और ऐसे कितने डॉक्टर हैं, जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी कर रहे हैं.

दमोह के इस अस्पताल में कार्यरत थे दोनों फर्जी डॉक्टर

दरअसल, दमोह के सीएमएचओ कार्यालय से एक प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें कहा गया कि डॉ. कुमार सचिन यादव ( ग्वालियर के रहने वाले), डॉ. राजपाल गौर (सीहोर के काकूखेडा के मगरधा के रहने वाले) का चयन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित संजीवनी क्लिनिक सुभाष कॉलोनी दमोह में किया गया है. दोनों ने स्वयं को योग्य चिकित्सक प्रदर्शित करने के उद्देश्य से फर्जी और कूट रचित एमबीबीएस डिग्री, मेडिकल काउंसलिंग रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र और अन्य शैक्षणिक व पंजीयन दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे. दोनों फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करीब एक साल से नियुक्त हैं.

दोनों फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी के निर्देशन में दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना कोतवाली में मामला दर्ज किया गया.
साथ ही दोनों आरोपियों को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया.

दोनों आरोपियों से पूछताछ में फर्जी डॉ. अजय मौर्य (मुरैना के अलापुरा जोरा के रहने वाले) की भी जानकारी मिली, जो जबलपुर के संजीवनी अस्पताल में कार्यरत है... पुलिस ने टीम गठित कर डॉ. अजय मौर्य को भी अभिरक्षा में ले लिया है.

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भोपाल की संस्थाओं की भूमिका

एसपी ने बताया कि फर्जी एमबीबीएस डिग्री के आधार पर फर्जी डॉक्टर बनाकर राज्य स्तर की संस्था के माध्यम से नियुक्तियां कराना बहुत ही गंभीर और संवेदनशील विषय है. सभी संजीवनी अस्पताल आम जन के लिए संचालित है. इसमें भोपाल स्तर की संस्थाओं की भूमिका भी संदिग्ध है. आरोपियों से पूछताछ में पैसा देकर बने कई फर्जी डॉक्टर के नाम और पैसा लेकर संजीवनी अस्पताल में डॉक्टरों को नियुक्त कराने के लिए फर्जी एमबीबीएस डिग्री, डॉक्टर रजिस्ट्रेशन और दस्तावेज उपलब्ध कराने वालों और सहयोग करने वाले लोगों के नाम सामने आए हैं, जिन्हें पुलिस तलाश कर रही है. 

तीसरा फर्जी डॉक्टर जबलपुर से गिरफ्तार

एसपी आनंद कलादगी ने बताया इस मामले में कुमार सचिन यादव के बताए जाने पर जबलपुर से तीसरे आरोपी डॉ अजय मौर्य को गिरफ्तार किया गया है . यह जबलपुर के चेरीताल में ढाई वर्ष से पदस्थ था. इस मामले में अन्य बिंदुओं को लेकर जांच की जा रही है. अभी कई फर्जी डॉक्टरों के नाम सामने आने की संभावना है.

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फोन से खुला राज

सीएमएचओ डॉक्टर राजेश अठया ने बताया कि करीब 10 दिन पहले उनके पास एक अज्ञात फोन आया था, जिसने बताया कि दमोह के संजीवनी अस्पताल में दो फर्जी डिग्री वाले डॉक्टर कार्य कर रहे हैं. इसके बाद उन्होंने जांच कमेटी बनाई और दस्तावेजों की जांच की गई.  जिसमें उनकी डिग्रियां फर्जी पाई गई. तब उन्होंने पुलिस को कार्रवाई करने के लिए लिखा. इसके बाद पुलिस ने इन दोनों डॉक्टरों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है.

सीएमएचओ ने बताया कि दोनों डॉक्टरों की नियुक्ति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भोपाल से दमोह के संजीवनी अस्पताल में हुई थी. इसलिए जांच नहीं की गई थी. जब उनके पास गोपनीय फोन आया तब  दस्तावेजों की जांच की गई... सभी दस्तावेज जांच में फर्जी पाए गए.

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