Chhattisgarh Anti Naxal Operation: दंतेवाड़ा जिले में नक्सल उन्मूलन के साथ-साथ पुनर्वास को नई दिशा देने की पहल तेज होती नजर आ रही है. इसी कड़ी में प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने दंतेवाड़ा स्थित लाईवलीहुड कॉलेज पहुंचकर आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों से मुलाकात (Vijay Sharma met surrendered Maoists) की और उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने के प्रयासों की समीक्षा की. गृहमंत्री ने समर्पित माओवादियों से एक-एक कर बातचीत की, उनका नाम पूछा और उनकी वर्तमान स्थिति, प्रशिक्षण तथा रोजगार से जुड़े अनुभवों के बारे में जानकारी ली. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो भी व्यक्ति हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटता है वो 'भारत माता का सच्चा बेटा' है और सरकार ऐसे लोगों के पुनर्वास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
जेल में बंद नक्सलियों की सूची तैयार करने के दिए निर्देश
इस दौरान गृहमंत्री ने लाईवलीहुड कॉलेज प्रबंधन को निर्देश दिए कि जेल में बंद उन नक्सलियों की सूची तैयार की जाए, जो आत्मसमर्पण कर पुनर्वास की इच्छा रखते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि भटके हुए युवाओं को सही दिशा में लाकर उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करना भी है.
बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय भी लिया गया कि समर्पित माओवादियों का एक प्रतिनिधिमंडल जेल में बंद नक्सली साथियों से मुलाकात करेगा. यह पहल उन्हें आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करने और पुनर्वास योजनाओं की जानकारी देने के उद्देश्य से की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौट सकें.
गृहमंत्री के साथ ये अधिकारी मौजूद
गृहमंत्री ने अधिकारियों को पुनर्वास प्रक्रिया को और अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत प्रशिक्षण, स्वरोजगार, आर्थिक सहायता और सुरक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनका लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचना सुनिश्चित किया जाए. इस अवसर पर कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (SP) और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. अधिकारियों ने जिले में चल रही पुनर्वास योजनाओं की प्रगति की जानकारी देते हुए आश्वस्त किया कि नक्सल प्रभावित युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास लगातार जारी हैं.
बता दें कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के प्रभाव को कम करने के लिए अब सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ पुनर्वास और विकास को भी प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे स्थायी शांति की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं.














