नाबालिग लड़की के गर्भपात का मामला! 16 हजार रुपये लेकर नर्सिंग अफसर ने करवा दिया अबॉर्शन 

छतरपुर जिले के बड़ामलहरा सिविल अस्पताल में नाबालिग और अविवाहित लड़की के गर्भपात का मामला सामने आया है. जांच में आरोप है कि एक नर्सिंग अफसर ने नियमों को नजरअंदाज कर अवैध तरीके से अबॉर्शन कराया और पीड़िता से 16 हजार रुपये भी लिए.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins

MP Minor Abortion Case: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के बड़ामलहरा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां नाबालिग और अविवाहित लड़की का गर्भपात नियमों को ताक पर रखकर कराया गया. आरोप है कि सिविल अस्पताल में पदस्थ एक नर्सिंग अफसर ने न सिर्फ अवैध तरीके से गर्भपात कराया, बल्कि इसके बदले पीड़िता से 16 हजार रुपये भी वसूले. वर्ष 2025 से जुड़े इस मामले का खुलासा जांच के बाद हुआ.

यह पूरा मामला छतरपुर जिले के बड़ामलहरा सिविल अस्पताल का है. जांच में सामने आया कि नाबालिग लड़की का गर्भपात अस्पताल में पदस्थ नर्सिंग अफसर प्रीति दुबे ने करवाया. नियमों के अनुसार, गर्भपात केवल अधिकृत डॉक्टर ही कर सकते हैं, लेकिन यहां बिना अनुमति और तय प्रक्रिया के यह कार्य किया गया.

16 हजार रुपये लेने का आरोप

जांच में यह भी सामने आया कि गर्भपात कराने के बदले नर्सिंग अफसर ने पीड़िता से 16 हजार रुपये लिए. यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है. मामले के उजागर होने के बाद इसे स्वास्थ्य विभाग ने बेहद गंभीर माना है.

2025 में गतिविधि का हुआ खुलासा

यह मामला वर्ष 2025 का है, जिसका खुलासा तकनीकी निगरानी और जांच (टेकमांड) के जरिए हुआ. जानकारी सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग ने इसकी जांच शुरू कर दी. शुरुआती जांच में स्पष्ट हुआ कि पूरे मामले में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.

एमटीपी एक्ट का उल्लंघन

जांच रिपोर्ट में यह बात साफ सामने आई कि गर्भपात एमटीपी एक्ट (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट) के नियमों के खिलाफ किया गया. न तो अधिकृत डॉक्टर की अनुमति ली गई और न ही आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की गई. संबंधित डॉक्टर की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है.

भोपाल स्तर से हुई समीक्षा

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भोपाल स्तर पर भी इसकी समीक्षा कराई. पहले भी नर्सिंग अफसर के खिलाफ ड्यूटी में लापरवाही और अन्य शिकायतें सामने आ चुकी थीं. गर्भपात की शिकायत के बाद संचालक स्वास्थ्य सेवा, भोपाल द्वारा मामले की जांच के निर्देश दिए गए.

Advertisement

जांच टीम ने खोले कई राज

भोपाल के निर्देश पर जांच अधिकारी ज्योति सागर ने सीएमएचओ को जांच के आदेश दिए. इसके बाद डॉक्टर एस. प्रजापति, डॉक्टर सुरेखा खरे और कपिल डबरा की टीम ने पूरे मामले की जांच की. जांच में यह पाया गया कि नर्सिंग अफसर प्रीति दुबे ने पहले गलत बयान दिया और इलाज से इनकार किया.

जांच में सामने आया कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर राकेश शुक्ला को गर्भपात की किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं दी गई. इतना ही नहीं, रेफरल स्लिप पर डॉक्टर हरगोविंद राजपूत का नाम बिना जानकारी के लिख दिया गया, जो पूरी तरह नियमों के खिलाफ है.

Advertisement

गवाहों के बयान से पुष्ट हुआ आरोप

जिला अस्पताल की साक्षी गंगेले ने जांच में बताया कि पीड़िता के साथ आए लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा कि स्टाफ नर्स प्रीति दुबे ने बच्चेदानी की सफाई किए जाने की बात कही थी. इससे नर्सिंग अफसर की भूमिका और अधिक संदिग्ध हो गई. जांच रिपोर्ट के आधार पर नर्सिंग अफसर को दोषी माना गया है और उसके खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है. साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि अस्पताल प्रबंधन और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका कितनी लापरवाह रही.

Featured Video Of The Day
Burqa Mayor Controversy: कौन हैं Malegaon की 'बुर्के वाली मेयर' शेख नसरीन? | Asaduddin Owaisi