कलेक्ट्रेट की बाबू मधुबाला और चपरासी फेक आर्म्स लाइसेंस गिरोह के सरगना, UP, महाराष्ट्र और जम्मू तक नेटवर्क

Bhind Arms License Scam: पुलिस की अब तक की जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का नेटवर्क मध्यप्रदेश ही नहीं, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर समेत अन्य राज्यों में भी फैला था. इस गिरोह की सरगना भिंड कलेक्ट्रेट की आर्म्स शाखा में पदस्थ क्लर्क मधुबाला मौर्य और चपरासी रामसेवक कोरकू ही थे.

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Bhind Collectorate Staff Madhubala & Peon Run Fake Gun License Gang.

Bhind Collectorate Staff Madhubala & Peon Run Fake Gun License Gang: भिंड जिले में फर्जी हथियार लाइसेंस बनाने वाले गिरोह के तार UP, महाराष्ट्र और जम्मू तक फैले हुए हैं. पुलिस अब तब इस मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. इस पूरे गिरोह की सरगना कलेक्ट्रेट की आर्म्स शाखा में पदस्थ क्लर्क मधुबाला मौर्य और चपरासी रामसेवक कोरकू ही थे. ये दोनों ही इस रैकेट को चला रहे थे. इस रैकेट का नेटवर्क और भी बड़ा हो सकता है, पुलिस लगातार इसकी परतें खंगाल रही है. कलेक्ट्रेट के अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. 

दरअसल, पुलिस अधीक्षक डॉ. असित यादव के निर्देश पर अटेर एसडीओपी रविन्द्र बास्कले के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई थी. टीम ने नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (नेटग्रिड) पोर्टल के माध्यम से संदिग्ध आर्म्स लाइसेंसों की जांच शुरू की, जांच के दौरान कई लाइसेंस संदिग्ध पाए गए, जिनका ऑनलाइन रिकॉर्ड कहीं भी दर्ज नहीं था. यहीं से पूरे रैकेट का खुलासा हुआ. 

पैन, आधार कार्ड और फोटो में छेड़छाड़ कर बनाए जाते थे  

गिरोह बेहद शातिर तरीके से फर्जी लाइसेंस तैयार करता था. आरोपियों द्वारा पैन कार्ड, आधार कार्ड और फोटो में छेड़छाड़ कर ऑनलाइन शस्त्र लाइसेंस बनाए जाते थे. इन लाइसेंसों पर QR कोड और जिला अधिकारी भिंड का नाम भी अंकित किया जाता था, जिससे वे पूरी तरह असली लगते थे. गिरोह 3 लाख रुपये में “ऑल इंडिया वैधता” के नाम पर लाइसेंस और हथियार उपलब्ध करा रहा था.  

ये गिरोह सिर्फ फर्जी लाइसेंस ही नहीं बना रहा था, बल्कि अवैध हथियार भी सप्लाई करता था. पुलिस ने अब 32 बोर की 10 पिस्टल और 315 बोर की रायफल समेत कई हथियार बरामद किए हैं. 

Bhind Collectorate Employees Manipulated Records to Issue Fake Arms Licenses; 13 in Custody

यूपी, महाराष्ट्र और जम्मू तक फैला नेटवर्क 

पुलिस की अब तक की जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का नेटवर्क मध्यप्रदेश ही नहीं, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर समेत अन्य राज्यों में भी फैला था. आरोपी फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए अलग-अलग राज्यों के पते का इस्तेमाल करते थे. अब तक गिरफ्तार किए आरोपियों में सतीश त्रिपाठी, सतीश चंद्र (मऊ), राधाचरण नायक (जालौन), सुमेर यादव (ऊमरी), पुष्पेंद्र राजावत (जैतपुरा), अबरार खान (भिंड), रोहित चांडाले, प्रवीण भामरे, राहुल पाटिल (महाराष्ट्र), सुनील शर्मा और उनके पुत्र प्रांशु शर्मा (लहार), अजीत कुशवाह, आर्म्स शाखा की इंचार्ज मधुवाला, चपरासी रामसेवक कोरकू सहित अन्य शामिल हैं. 

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Collectorate Staff Turn Gang Leaders: How Madhubala Maurya Ran a Multi-State Fake Arms License Racket

आरोपियों ने खुद के लिए भी बनवाए फर्जी लाइसेंस

गिरफ्तार 13 आरोपियों में से 5 ऐसे हैं जिन्होंने खुद और अपने परिजनों के नाम पर भी फर्जी लाइसेंस बनवाए थे. लहार निवासी सुनील शर्मा ने अपने बेटे के नाम से लाइसेंस बनवाया था, जबकि उस पर पहले से 7 आपराधिक मामले दर्ज हैं.  

आर्म्स शाखा को डबल ताले में सील 

इस मामले के खुलासे के बाद कलेक्ट्रेट की आर्म्स शाखा को डबल ताले में सील कर दिया गया था. साथ ही शाखा की इंचार्ज मधुबाला को निलंबित किया गया था. पुलिस ने इस गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों के नामों की सूची तैयार कर ली है. अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने का प्रयास कर रही है. 

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