सोचिए गर आसमान जमी के कदमों पर हो, गहराई में कहीं हरे जंगल की कालीन बिछी हो, पक्षियों की कलकलाहट का संगीत तार-तार कानों में घुल रहा हो और उस पर दिल को बूंद-बूद पिघला देने वाली ठिठुरती ठंडी ओस का श्रृंगार हो... जरा सोचिए जमीं का वो कोना जो आसमां से भी ऊपर हो... हो सकता है कि यह सब आपको किसी कवि की कविता लग रहे हों, लेकिन भारत में ही ऐसी कई जगह हैं, जहां जाकर आप प्रकृति के असली सौंदर्य को महसूस सकते हैं. अगर आपको प्रकृति से प्यार है, तो इस देसी स्कॉटलैंड जरूर जाना चाहिए. इन्हीं में से एक है दक्षिण भारत के खूबसूरत राज्य कर्नाटक में स्थित दिल में बस जाने वाली जगह कुर्ग. अगर अतिश्योक्ति न कहें तो मैं कहूंगी कि कुर्ग की खूबसूरती को बया करते करते आप शायर तक बन सकते हैं... तो जरा संभल कर.
इन हंसीन वादियों, पहाड़ों और जंगलों के बीच किसी खूबसूरत घुमावदार रास्तों, घने जंगलों के बीच जब ठंडी सरसराती हवा आपको छू कर गुजरेगी तो आप चाहे-अनचाहे शायर बन ही बैठेंगे... क्योंकि कुर्ग देश के भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में से भी एक है तो बीच-बीच में गर बादल आकर आपको नया आनंद दे दे, तो हैरान न हों इनका लुत्फ उठाएं. सही कहूं तो लगता है कि कुर्ग में जाकर ही आप प्रकृति के असली लावण्य को देख और महसूस कर सकते हैं. यहां आपकी ओर आते बादल, झूमते लहराते पेड़, जंगल की शांति और बरसात की बूंदें कब आपको आपको सराबोर कर जाए आपको पता भी नहीं चलेगा.
कुर्ग: क्या है खास
कर्नाटक की गोद में कुर्ग एक सुंदर हिल स्टेशन है. कुर्ग अपनी संस्कृति और परंपरा के लिए जाना जाता है. यहां हुट्टारी, केल पोदू, कावेरी, तुला, मेरकारा दसारा त्योहार मनाए जाते हैं. कुर्ग के खानपान की बात करें तो यहां आपको नॉन वेज के खूब जायके मिलेंगे.
जब जी चाहे चले जाएं-
अगर आप यह सोच रहे हैं कि कुर्ग में घूमने के लिए सबसे सही मौसम कौन सा है, तो यह जवाब आपको खुश कर देगा. आप जब जी चाहे, जब छुट्टी या टाइम मिले कुर्ग के लिए बैग पैक कर सकते हैं. अब सोच क्या रहे हैं, बताया तो कुर्ग में आपको प्रकृति का असली रूप दिखेगा. कुर्ग हर मौसम में अपने एक अलग रूप में बाहें फैलाए आपका स्वागत करता है. यहां हर मौसम का का अलग ही नज़ारा मिलता है.
भारत में सबसे ज्यादा कॉफी की खेती कुर्ग में की जाती है, तो जरा सोचिए यहां आपको देखने को मिलेंगे कॉफी और टी-गॉर्डन, हर तरफ फैली हरियाली, हरे-भरे जंगल और पहाड़. कुल मिलकार कुर्ग में आप साल के किसी भी मौसम में जा सकते हैं.
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कहां है कुर्ग
प्रकृति के सुंदर नजारों से भरा कुर्ग कर्नाटक में है. कुर्ग मैसूर से करीब 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और इसे कोडागू भी कहा जाता है. घूमने-फिरने वाले, शांति पसंद करने वाले यहां तक कि एडवेंचर पसंद लोगों के लिए कुर्ग बेस्ट डेस्टिनेशन हो सकता है.
कैसे जाएं
अगर आप हवाई जहाज से जाने का प्लान बना रहे हैं तो आपको मंगलौर एयरपोर्ट उतरना होगा. यह कुर्ग से सबसे नजदीक डमेस्टिक एयरपोर्ट है. मंगलौर एयरपोर्ट कुर्ग से तकरीबन 160 किलोमीटर दूर है. इसका सबसे करीबी इंटरनैशनल एयरपोर्ट बेंगलुरु है, जो करीब 265 किलोमीटर दूर है. और अगर आप रेल से जाने की सोच रहे हैं तो मैसूर स्टेशन कुर्ग से करीब 95 किलोमीटर दूरी पर है. आप चाहें तो बाए रोड भी कुर्ग तक पहुंच सकते हैं.
कुर्ग में कहां कहां जाएं-
कुर्ग में आप कॉफी प्लॉन्टेशन, नामड्रोलिंग मोनेस्ट्री, इरुपू फॉल्स, अब्बे फॉल्स, मदिकेरी किला जा सकते हैं. इसके अलावा अगर आपके पास समय और है तो आप निसारगधमा, दुबरे, अबे फॉल्स, भागमंडला, तालकावेरी, इरूपु फॉल्स और नागरहोल नेशनल पार्क जरूर जाएं. कुर्ग के आसपास के इलाकों में ब्रह्मगिरी और पुष्पागिरी बहुत मशहूर हैं.
कॉफी प्लॉन्टेशन : जैसा कि हम आपको बता चुके हैं कि कुर्ग में देश की सबसे ज्यादा कॉफी का उत्पादन होता है, तो कॉफी प्लॉन्टेशन जाना तो बनता है. कॉफी प्लॉन्टेशन जाकर आप कॉफी बनने की पूरी प्रकिया देख सकते हैं.
नामड्रोलिंग मोनेस्ट्री : धर्म में आस्था रखने वालों के लिए यह बहुत ही अच्छी जगह हे. इस मोनेस्ट्री में तकरीबन 5 हजार बौद्ध भिक्षुओं रहते हैं.
राजा सीट : अगर आपको फोटोग्राफी पसंद है तो आपको राजा सीट जाना चाहिए. वादियों के बीच यह जगह सनसेट प्वॉइंट है. इस जगह को कुर्ग में फोटो लेने के लिए सबसे अच्छी जगह माना जाता है. पूरे दिन घूमने के बाद यहां आकर आप रिलेक्स कर सकते हैं.
अब्बे फॉल्स : कुर्ग का अब्बे फॉल्स कॉफी के खूबसूरत बागानों के बीच है. यह प्रकतिक खूबसूरती आपका मन मोह लेगी. यहां आप फोटाग्राफी भी कर सकते हैं और नेचर का लुत्फ भी उठा सकते हैं. यहां तक पहुंचने के रास्ते में आपको मिलेंगे हवा में नमी भरते पहाड़ों से गिरते झरने और आंखों को सुकून देने वाले बादल.
इरुपू फॉल्स : कुर्ग घूमने जाएं तो इरुपू फॉल्स देखने जरूर जाएं. यहां आपको झरने का लुत्फ उठाने के साथ-साथ मन को शांत करने के लिए एक पवित्र मंदिर भी दिखेगा.
मदिकेरी किला : अगर आपको ऐतिहासिक इमारतों में रुची है तो मदिकेरी किला भी जाएं. यह 17वीं शताब्दी में का किला है. इस किले से जुड़ी एक रोचक बात यह है कि इसे 17वीं शताब्दी में कीचड़ से बनाया गया था. 1812 से 1814 के बीच इसे पक्का किया गया.
एडवेंचर भी चाहिए! अजी खूब मिलेगा...
माना की आपने कुर्ग में कई दिन बिता लिए और आप खूब रिलैक्स हो चुके. अब आपका मन है कुछ एडवेंचर करने का. तो इसका भी कुर्ग की धरती पर पूरा इंतजाम है. यहां आपको मिलेंगी खूब सारी एडवेंचर एक्टिविटीज़. इतना सारा सुकून देने वाली यह जगह आपको इतनी ही मात्रा में रोमांच भी दे सकती है. जी हां, असल में कुर्ग को कर्नाटक की एडवेंचर कैपिटल कहा जाता है. यहां आपको हर तरह का एटवेंचर करने को मिल जाएगा. आप चाहें तो माउंटेन क्लाइम्बिंग कर सकते हैं, जंगल ट्रैकिंग कर सकते हैं, यहां तक कि रॉफ्टिंग, फ्लाइंग, एलीफेंट राइड और फिशिंग का अनुभव भी ले सकते हैं.