जब मन थकता है तो शरीर क्यों जवाब देने लगता है? आयुर्वेद से समझिए तनाव का पूरा असर

Stress Impact On Body: आयुर्वेद के अनुसार मन और शरीर अलग-अलग नहीं हैं. दोनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं. जब मन असंतुलित होता है, तो शरीर के तीनों दोष-वात, पित्त और कफ भी बिगड़ने लगते हैं.

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Stress Impact on Body: आयुर्वेद में इलाज की शुरुआत शरीर से नहीं, बल्कि मन को शांत करने से की जाती है.

Mind Body Connection: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शायद ही कोई ऐसा हो जो तनाव से अछूता हो. काम का दबाव, पैसों की चिंता, रिश्तों में बढ़ती खटास, भविष्य को लेकर असमंजस और हर वक्त खुद को बेहतर साबित करने की होड़ ये सब मिलकर हमारे मन को धीरे-धीरे थका देते हैं. शुरुआत में हमें लगता है कि यह सिर्फ दिमागी परेशानी है, थोड़ा आराम कर लेंगे तो ठीक हो जाएगा. लेकिन, जब यही तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर सिर्फ मन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शरीर भी इसका बोझ उठाने लगता है.

लगातार सिरदर्द रहना, नींद न आना या बार-बार टूट जाना, पेट खराब रहना, हर वक्त थकान महसूस होना, छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन और बिना वजह दिल की धड़कन तेज होना ये सभी संकेत हैं कि मन की उलझनें अब शरीर को भी परेशान करने लगी हैं.

मन और शरीर के रिश्ते पर आयुर्वेद क्या कहता है?

आयुर्वेद के अनुसार मन और शरीर अलग-अलग नहीं हैं. दोनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं. जब मन असंतुलित होता है, तो शरीर के तीनों दोष-वात, पित्त और कफ भी बिगड़ने लगते हैं.

  • लगातार चिंता, डर और बेचैनी से वात दोष बढ़ता है, जिससे घबराहट, अनिद्रा, गैस और जोड़ों में दर्द होने लगता है.
  • गुस्सा, तनाव और ईर्ष्या पित्त दोष को बढ़ाते हैं, जिसके कारण एसिडिटी, हाई ब्लड प्रेशर, सिरदर्द और त्वचा की समस्याएं होती हैं.
  • उदासी, सुस्ती और निराशा कफ दोष को बढ़ाती हैं, जिससे वजन बढ़ना, सुस्ती और कमजोर पाचन जैसी दिक्कतें सामने आती हैं.

इसीलिए आयुर्वेद में इलाज की शुरुआत शरीर से नहीं, बल्कि मन को शांत करने से की जाती है.

मन को बैलेंस रखने के आसान आयुर्वेदिक उपाय:

आयुर्वेद सबसे पहले रूटीन सुधारने पर जोर देता है.

  • सुबह जल्दी उठना और सूरज की रोशनी में कुछ देर टहलना मन को सकारात्मक बनाता है.
  • दिन की शुरुआत 5-10 मिनट गहरी सांसों या ध्यान से करने पर तनाव कम महसूस होता है.
  • रोज 10-15 मिनट तिल या नारियल तेल से सिर और पैरों की मालिश करने से नर्वस सिस्टम शांत होता है.

भोजन और जड़ी-बूटियों का असर

भोजन भी मन की स्थिति को प्रभावित करता है. बहुत ज्यादा तीखा, तला-भुना और कैफीन से भरा खाना तनाव बढ़ा सकता है. इसकी जगह हल्का, सादा और गर्म भोजन जैसे दाल, सब्जी, घी और दूध मन को स्थिर रखता है.

आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां भी बेहद मददगार हैं:

  • अश्वगंधा मानसिक दबाव कम करती है.
  • ब्राह्मी और शंखपुष्पी मन को शांत और एकाग्र बनाती हैं.
  • तुलसी और गिलोय की चाय तनाव के साथ इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करती है.

साथ ही योग और प्राणायाम जैसे अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और शवासन मन को गहरी शांति देकर तनाव से बाहर निकालने में मदद करते हैं.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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