दिल्ली के Dhaula Kuan का नाम कैसे पड़ा? जानिए इस जगह की दिलचस्प कहानी

Dhaula Kuan Name: धौला कुआं दक्षिण-पश्चिम दिल्ली का एक प्रमुख, अत्यधिक व्यस्त चौराहा और रिहायशी इलाका है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस जगह का नाम धौला कुआं क्यों पड़ा. अगर नहीं, तो इस आर्टिकल को जरूर पढ़ें.

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Dhaula Kuan Name: धौला कुआं का नाम धौला कुआं क्यों पड़ा. (AI Generated Image)

Dhaula Kuan White Well Facts: अगर आप दिल्ली में रहते हैं या कभी भी दिल्ली आए हैं, तो 'धौला कुआं' का नाम आपने सौ फीसदी सुना होगा. यह दिल्ली का एक ऐसा मशहूर इलाका और चौराहा है, जहां से रोजाना लाखों गाड़ियां गुजरती हैं. एयरपोर्ट जाना हो, गुड़गांव निकलना हो या फिर धौला कुआं का शानदार मेट्रो स्टेशन देखना हो यह जगह हमेशा लोगों से गुलजार रहती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस हाई-टेक और भीड़भाड़ वाले इलाके का नाम 'धौला कुआं' क्यों पड़ा? आखिर कहां है वो कुआं और क्या है इसके नाम का असली राज? आइए जानते हैं.

दिल्ली के Dhaula Kuan का नाम कैसे पड़ा? जानिए इस जगह के नाम के पीछे की कहानी और इतिहास से जुड़ी दिलचस्प बातें- 

​सबसे पहले इस नाम के सीधे-सादे मतलब को समझते हैं. दरअसल, हमारी आम बोलचाल और पुरानी हिंदी/राजस्थानी भाषा में 'धौला' शब्द का मतलब होता है 'सफेद' (White). यानी सीधे शब्दों में कहें तो 'धौला कुआं' का मतलब हुआ 'सफेद कुआं'. अब सवाल उठता है कि क्या सच में यहां कोई सफेद रंग का कुआं था? जवाब है हां, बिल्कुल था!

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​शाहआलम के जमाने का है किस्सा-

​इतिहासकारों की मानें तो यह कहानी मुगल बादशाह शाहआलम द्वितीय के समय की है, यानी करीब 18वीं सदी के आस-पास की. उस जमाने में आज की तरह पक्की सड़कें और गाड़ियां नहीं हुआ करती थीं. चारों तरफ जंगल और पथरीला रास्ता था. इस रास्ते से गुजरने वाले मुसाफिरों, व्यापारियों और सैनिकों के पीने के पानी के लिए यहां एक कुआं बनवाया गया था.

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क्या आप जानते हैं?

  • यह जगह पहले गांव क्षेत्र हुआ करती थी
  • पास में पुराना कुआं हुआ करता था

Dhaula Kuan का नाम कैसे पड़ा? जानिए दिल्ली की इस जगह का इतिहास 

​सफेद पत्थरों से बनी थी पहचान-

​इस कुएं की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसे बनाने में खास तरह के सफेद पत्थरों (White Sandstone) का इस्तेमाल किया गया था. जब दूर से लोग इस कुएं को देखते थे, तो यह बिल्कुल सफेद चमकता हुआ दिखाई देता था. इस वजह से यहां से गुजरने वाले लोग इसे 'धौला कुआं' कहने लगे. धीरे-धीरे यह जगह मुसाफिरों के आराम करने का एक बड़ा ठिकाना बन गई और इस पूरे इलाके की पहचान इसी नाम से हो गई.

​मीठा पानी था इसकी खासियत-

​पुरानी कहानियों के मुताबिक, दिल्ली के इस पथरीले इलाके में ज्यादातर जगहों पर पानी खारा या कड़वा होता था. लेकिन इस सफेद कुएं का पानी बहुत ही मीठा और साफ था. इसलिए लोग दूर-दूर से यहां पानी पीने और अपनी प्यास बुझाने आते थे.

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