Social Media Effects on Mental Health: सोशल मीडिया आज रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. सुबह उठते ही नोटिफिकेशन चेक करना और रात को सोने से पहले स्क्रॉल करना कई लोगों की आदत बन गई है. इसी बीच धीरे-धीरे दिमाग लगातार इनपुट लेता रहता है, जिसमें तुलना, रिएक्शन और लगातार अपडेट रहने का दबाव शामिल होता है. ऐसे में अगर कोई व्यक्ति 90 दिनों तक सोशल मीडिया से दूरी बना ले, तो यह सिर्फ एक डिजिटल ब्रेक नहीं रहता, बल्कि मानसिक स्तर पर कई बदलावों की शुरुआत करता है. शुरुआत में यह बदलाव थोड़ा असहज लग सकता है, लेकिन समय के साथ इसका असर साफ दिखने लगता है.
90 दिनों तक सोशल मीडिया से दूरी बनाने से क्या होगा? (What will happen if you stay away from social media for 90 days?)
पहले कुछ दिनों में बार-बार फोन देखने का मन हो सकता है. यह एक तरह की आदत और डोपामिन साइकिल से जुड़ा होता है. लेकिन धीरे-धीरे दिमाग इस बदलाव को स्वीकार कर लेता है और यह आसान हो जाता है.
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तनाव और एंग्जायटी में कमीलगातार सोशल मीडिया देखने से दिमाग पर जानकारी और तुलना का दबाव बना रहता है. दूसरों की लाइफस्टाइल, अचीवमेंट्स और अपडेट्स देखने से अनजाने में तनाव बढ़ सकता है. जब यह सिलसिला रुकता है, तो दिमाग को राहत मिलती है और एंग्जायटी धीरे-धीरे कम हो सकती है.
सोशल मीडिया बार-बार ध्यान भटकाने का बड़ा कारण है. नोटिफिकेशन और स्क्रॉलिंग की आदत फोकस को तोड़ती है. 90 दिनों तक इससे दूर रहने पर दिमाग एक समय में एक काम पर ज्यादा देर तक टिक पाता है, जिससे काम की गुणवत्ता और प्रोडक्टिविटी दोनों बेहतर होती हैं.
मूड ज्यादा स्थिर होता हैसोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स, कमेंट्स और रिएक्शन मूड को प्रभावित करते हैं. इनसे दूरी बनाने पर मूड बाहरी प्रतिक्रियाओं पर कम निर्भर रहता है और भावनाएं ज्यादा स्थिर हो सकती हैं.
सोने से पहले सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से दिमाग को रिलैक्स होने का समय नहीं मिलता. जब यह आदत कम होती है, तो सोने से पहले दिमाग शांत होने लगता है. इससे नींद जल्दी आती है और नींद की क्वालिटी बेहतर होती है.
खुद के लिए समय मिलता हैसोशल मीडिया से दूरी बनाने पर दिनभर में काफी समय बचता है. यह समय पढ़ने, एक्सरसाइज करने या परिवार के साथ बिताने में लगाया जा सकता है. इससे मानसिक संतुलन बेहतर होता है.
कुल मिलाकर सोशल मीडिया से दूरी बनाना कई मायनों में मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. इससे तनाव कम होता है, फोकस बढ़ता है और जीवन में संतुलन बेहतर होता है. सही तरीके से लिया गया यह डिजिटल ब्रेक दिमाग को रीसेट करने जैसा काम कर सकता है.
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