मोबाइल छीने बिना बच्चों को स्क्रीन से कैसे दूर करें? ये 5 स्मार्ट पेरेंटिंग ट्रिक्स आजमाइए, बच्चा खुद छोड़ेगा फोन देखना

How to Reduce Screen Time In Kids: जब माता-पिता चालाकी और धैर्य से काम लेते हैं, तो बच्चे खुद मोबाइल से दूरी बनाना सीखते हैं. आइए जानते हैं 5 ऐसे स्मार्ट पैरेंटिंग ट्रिक्स.

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How to Reduce Screen Time In Kids: बच्चों के सामने मोबाइल को बुरा साबित करने के बजाय उसे एक सीमित टूल की तरह पेश करें.

Kids Screen Time Tips: आज के समय में बच्चों और मोबाइल का रिश्ता किसी से छुपा नहीं है. ऑनलाइन क्लास, गेम्स, रील्स और वीडियो स्क्रीन बच्चों की रोजमर्रा की दुनिया बन चुकी है. ऐसे में ज्यादातर माता-पिता परेशान रहते हैं और अक्सर हल यही सोचते हैं कि मोबाइल छीन लो. लेकिन, सच यह है कि मोबाइल छीनने से समस्या खत्म नहीं होती, बल्कि झगड़ा, जिद और दूरी जरूर बढ़ जाती है. असल जरूरत है समझदारी से बच्चों को स्क्रीन से दूर ले जाने की, न कि जबरदस्ती. जब माता-पिता चालाकी और धैर्य से काम लेते हैं, तो बच्चे खुद मोबाइल से दूरी बनाना सीखते हैं. आइए जानते हैं 5 ऐसे स्मार्ट पैरेंटिंग ट्रिक्स, जिनसे बिना मोबाइल छीने बच्चों की स्क्रीन टाइम आदत सुधारी जा सकती है.

बच्चों के हाथ से मोबाइल कैसे दूर करें? | How to Keep Mobile Phones Away From Children?

1. मोबाइल को दुश्मन नहीं, टूल बनाइए

बच्चों के सामने मोबाइल को बुरा साबित करने के बजाय उसे एक सीमित टूल की तरह पेश करें. उन्हें समझाएं कि मोबाइल पढ़ाई, जानकारी और एंटरटेनमेंट के लिए है, पूरे दिन के लिए नहीं. जब बच्चा खुद इसका सही इस्तेमाल समझने लगता है, तो जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम अपने आप कम होने लगता है.

2. नियम बच्चों के साथ मिलकर बनाएं

एकतरफा नियम थोपने से बच्चे विरोध करते हैं. बेहतर है कि स्क्रीन टाइम के नियम बच्चों के साथ बैठकर तय करें, जैसे होमवर्क के बाद ही मोबाइल या सिर्फ एक तय समय तक. जब बच्चा खुद नियम बनाने में शामिल होता है, तो वह उन्हें मानने की कोशिश भी करता है.

3. मोबाइल की जगह दिलचस्प विकल्प दीजिए

अगर मोबाइल हटाना है तो उसकी जगह कुछ बेहतर देना भी जरूरी है. ड्रॉइंग, आउटडोर गेम्स, साइकलिंग, बोर्ड गेम्स या कहानी पढ़ना, ये सब मोबाइल का हेल्दी विकल्प बन सकते हैं. बच्चे को बोरियत से बचाना बहुत जरूरी है, वरना वह दोबारा स्क्रीन की तरफ भागेगा.

4. खुद भी स्क्रीन से दूरी बनाइए

यह सबसे अहम पॉइंट है. अगर माता-पिता खुद हर वक्त मोबाइल में व्यस्त रहते हैं, तो बच्चे से उम्मीद करना गलत है. बच्चों के सामने मोबाइल कम इस्तेमाल करें, उनके साथ समय बिताएं, बात करें. पैरेंट्स का व्यवहार ही बच्चों की सबसे बड़ी सीख होता है.

5. मोबाइल को सजा या इनाम मत बनाइए

अक्सर माता-पिता कहते हैं होमवर्क कर लो, मोबाइल मिलेगा या शरारत की तो मोबाइल बंद. इससे मोबाइल की अहमियत और बढ़ जाती है. कोशिश करें कि मोबाइल न तो इनाम बने, न सजा बस एक सामान्य चीज रहे.

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बच्चों को मोबाइल से दूर करना कोई एक-दिन का काम नहीं है. यह धैर्य, समझ और प्यार से जुड़ी प्रक्रिया है. जब माता-पिता डांटने के बजाय साथ चलना सीखते हैं, तो बच्चे भी स्क्रीन की दुनिया से बाहर आकर असली दुनिया को अपनाने लगते हैं.

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