योग प्राचीन भारतीय परंपरा का वह अनमोल हिस्सा है, जो तन और मन को संतुलित करने में सबसे प्रभावी है. इन्हीं में से एक सरल और लाभकारी आसान 'विपरीत करणी' आसन है, जिसके नियमित तौर पर करने से मानसिक तनाव कम होता है. 'विपरीत करणी' संस्कृत के दो शब्दों के मेल से बना है- 'विपरीत' जिसका अर्थ है 'उल्टा' और 'करणी' जिसका अर्थ है 'क्रिया'. जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इस आसन में शरीर की स्थिति उल्टी हो जाती है. इसे 'सर्वांगासन' का ही एक सहज रूप माना जाता है, जिसमें पैरों को ऊपर की ओर उठाना होता है. यह योगासन शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है.
वहीं, आप बोलचाल की भाषा में इसे 'लेग्स अप द वॉल पोज' कहते हैं. आयुर्वेद में इसे झुर्रियों को कम करने वाला कहा गया है. उनके अनुसार, 'विपरीत करणी' आसन एक अत्यंत लाभकारी योगासन है, जिसके करने के दौरान शरीर उल्टा होता है. ऐसी अवस्था में शरीर के निचले अंगों से रक्त संचार हृदय और मस्तिष्क की ओर मुड़ता है. यह न केवल पाचन क्रिया को उत्तेजित करता है बल्कि चेहरे की चमक को भी बढ़ाता है.
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इसके रोजाना करने से तनाव, अनिद्रा एवं सूजन जैसी शारीरिक समस्याओं से निजात मिलने में सहायता होती है.
कैसे करें आसन
अभ्यास की दृष्टि से यह आसन शुरुआती साधकों के लिए काफी सरल है, जिसे सामान्यतः 5 से 15 मिनट तक किया जा सकता है. इसे करने के लिए दीवार के सहारे सटकर बैठें और धीरे-से लेटते हुए अपने पैरों को दीवार पर सीधा ऊपर की ओर टिका लें. यदि आरंभ में पैरों को ऊपर रखने में कठिनाई हो, तो कमर के नीचे कंबल या तकिया लगाकर सहारा लिया जा सकता है, जिससे शरीर को संतुलन बनाने में सुगमता होती है. सिर और कंधों को जमीन पर रखें. अपने हाथों को बगल में फैलाएं या पेट पर रखें, हथेलियां ऊपर की ओर हों. आंखें बंद करें और गहरी, धीमी सांस लें. अब अपनी क्षमता अनुसार ऐसी मुद्रा में कुछ समय तक रहें.
शुरू में करने में दिक्कत हो सकती है, लेकिन नियमित रूप से करने से आसानी से होने लगेगा. हालांकि, गंभीर गर्दन या पीठ की समस्या, उच्च रक्तचाप, ग्लूकोमा या गर्भावस्था के अंतिम चरण में इसे करने से पहले योग प्रशिक्षक या चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए.
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