कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो शब्दों की सीमा लंघकर सीधे रूह को छूती हैं. इंसान और कुत्ते का रिश्ता पुराना है. ऐसी ही एक कहानी आज हम आपको बता रहे हैं. ये कहानी है एक ऐसी डॉग ब्रीड की, जिसे अक्सर समाज में 'खूंखार' और 'अक्रमक' कहकर बदनाम किया जाता है. कई शहरों में इन पर इंटरकॉम की मांग उठती है, तो कहीं पर भी डॉर के इंटरैक्टिव से देखा जाता है. लेकिन हिमाचल प्रदेश के भरमौर जिले के एक चित्र में इन संबंधित धारणाओं को बर्फ की तरह बताया गया है. यह कहानी सिर्फ एक पेट जानवर की नहीं, बल्कि उस प्रेम की है जो मरने के बाद भी ख़त्म नहीं हुई.
मौत का सन्नाटा और घनी काली रात...
चम्बा की वादियां जब सफेद बर्फ की मोटी चादर ओढ़ लेती हैं, तो वहां का तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे गिर जाता है. ऐसी कड़ाके की ठंड में, जहां इंसान का घर से निकलना मुहाल हो जाता है, वहां भरमौर के भरमानी मंदिर के पास दो युवक- विक्षित राणा और पीयूष- कुदरत के कहर का शिकार हो गए. भारी बर्फबारी में फंसने के कारण उनकी सांसें थम गईं. दुनिया के लिए वे केवल 'लापता' थे, लेकिन उनके साथ मौजूद उनके वफादार पिटबुल के लिए वे उसकी पूरी दुनिया थे.
चार दिनों तक वह बेजुबान उसी बर्फीले कब्रिस्तान में अपने मालिक के पास रहा. कल्पना कीजिए उस मंजर की जब चारों तरफ सन्नाटा, सर्द हवाएं और भूख-प्यास से बेहाल एक जानवर... वह चाहता तो अपनी जान बचाने के लिए नीचे बस्ती की ओर भाग सकता था, लेकिन उसने भागने के बजाय वफादारी के उस कठिन रास्ते को चुना, जिस पर टिके रहना शायद किसी इंसान के लिए भी बहुत मुश्किल था.
इल्ज़ाम मिटाती एक तस्वीर...
चार दिन बाद जब डिफ़ेंक्शन दल और स्थानीय लोग हेलिकॉप्टर की मदद से वहां पहुंचे, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए. उन्होंने देखा कि वह पिटबुल अपने मालिक के पार्थिव शरीर के पास अडिग खड़ा था. उसने हार नहीं मानी थी, वह अपने मालिक को अकेले निकलने को तैयार नहीं था. उसकी आंखों में न तो वह 'खूंखार' गुस्सा था और न ही कोई हिंसक प्रवृत्ति; वहां सिर्फ एक गहरी उदासी और उसके मालिक को खो देने का गम था.
इस इवेंट में पिटबुल पर लगे 'खतरनाक' के टैग को हमेशा के लिए धो दिया. उन्होंने साबित कर दिया कि किसी भी जानवर का जन्म बुरा नहीं होता; उसकी निष्ठा उसकी निष्ठा और उसके मालिक के प्रति उसकी अचल संपत्ति पर अविश्वास करती है.
निष्ठा की नई परिभाषा
आज जब हम एक-दूसरे से टीवी के अलग-अलग रिश्ते हैं, तब यह बेजुबान हमें सिखाया गया था कि प्यार का मतलब सिर्फ साथ रहना नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में साथ नहीं रहना भी है. उस बर्फीली पहाड़ी पर वह कुत्ता सिर्फ पहरा नहीं दे रहा था, वह उस दावे की रक्षा कर रहा था जो उसके मालिक ने किया था.
जब डिज़र्वेशन दल ने यूनिवर्स का उत्पादन शुरू किया, तब भी वह कुत्ते को वहां से तैयार नहीं कर पाया. उनका जो वीडियो अब वायरल हो रहा है, उसमें वह सिर्फ एक शोकेस का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वह एक 'लवलेटर' हैं, जो एक कुत्ते ने अपने मालिक के लिए अपनी वफादारी से लिखा है.
भरमौर की इन पहाड़ियों में एक ऐसी दास्तां है जो युगों-युगों तक चलेगी. यह उन सभी डॉग लवर्स के लिए एक संदेश है जो अपने पेट्स को परिवार का हिस्सा मानते हैं. यह घटना हमें बताती है कि पिटबुल हो या कोई और नस्ल, दिल तो आखिर बेजुबान का भी होता है, और उस दिल में अपने मालिक के लिए समंदर से भी गहरी वफादारी होती है.
आज पूरा देश उस वफादार दोस्त को सलाम कर रहा है, जिसने कड़कड़ाती ठंड में इंसानियत के सबसे खूबसूरत रूप को जिंदा रखा.