आराम (Relaxation) की बात करें तो ये बीते समय और आज में दोनों की परिभाषा बहुत बदल चुकी है. पहले लोग अखबार पढ़कर, किताबें पढ़कर, टहलकर या दोस्तों से बात करके रिलैक्स किया करते थे, लेकिन अब ये आदत सोशल मीडिया पर बिना सोचे-समझे स्क्रॉल करने में बदल गई है. इसमें कोई शक नहीं कि स्क्रॉल करना कुछ समय के लिए सुकून भरा लग सकता है, लेकिन यह अक्सर हमें थका हुआ और मेंटली तौर पर बहुत थका हुआ फील करा देता है, जिससे आराम करने का असली मकसद ही खत्म हो जाता है. आइए जानते हैं कि क्यों स्क्रॉलिंग उस समय तो सुकून देती है, लेकिन बाद में हमारे दिमाग को ओवरलोड कर देती है और मेंटल एनर्जी पर भी असर डालती है.
Mindless Scrolling से क्यों मिलता है सुकून
सोशल मीडिया स्क्रॉल करना आरामदायक लग सकता है, लेकिन यह आपको शुरुआत से ज्यादा थका देता है. शुरू में यह एक ब्रेक जैसा लगता है, लेकिन असल में आपका दिमाग लगातार एक्टिव रहता है. मनोवैज्ञानिक रूप से ऐसा 'variable rewards' की वजह से होता है. हर लाइक, कमेंट या नया पोस्ट डोपामिन का छोटा-सा झटका देता है, जिससे तुरंत खुशी महसूस होती है. यह अनिश्चितता आपको उसी तरह बांधे रखती है जैसे स्लॉट मशीन काम करती है, जिससे रुकना मुश्किल हो जाता है.
लेकिन इसके साथ ही, लगातार स्क्रॉलिंग कॉग्निटिव ओवरलोड (Cognitive Overload) भी पैदा करती है. जिसमें आपका दिमाग लगातार ढेर सारी फोटो, वीडियो और उसमें दिखी चीजों को प्रोसेस करता रहता है, जो मानसिक रूप से थका देता है. भले ही यह आराम जैसा लगे, लेकिन आपका ध्यान कभी पूरी तरह से शांत नहीं होता.
कैसे mindless scrolling आपकी एनर्जी खत्म करती है
- भले ही रील स्क्रॉल करना आपको कंफर्टेबेल और आरामदायक लगे, लेकिन सोशल मीडिया स्क्रॉल करना आपकी मेंटल और इमोशनल एनर्जी पर गहरा असर डाल सकता है.
- लगातार स्क्रॉलिंग आपके दिमाग पर अनावश्यक जानकारी का बोझ डालती है, खासकर तब जब आप आराम करना चाहते हैं. निगेटिव कंटेट आपके दिमाग को अशांत कर सकता है.
- यह सिर्फ आराम का भ्रम पैदा करता है. असल में आपका दिमाग हमेशा अलर्ट मोड में रहता है. निगेटिव खबरें हार्मोन को ट्रिगर करती हैं और शरीर में हल्की फाइट की कंडीशन पैदा करती हैं, जिससे कोर्टिसोल रिलीज होता है.
- लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से शारीरिक थकान भी बढ़ती है. खासकर रात में स्क्रीन देखने से आंखों पर भी दबाव पड़ता है.
- सोशल बैलेंस (social comparison) भी थकान बढ़ाती है. दूसरों की सजी-संवरी जिंदगी देखकर आपको कमी महसूस हो सकती है, FOMO (कुछ छूट जाने का डर) बढ़ता है और धीरे-धीरे आपकी इमोशनल एनर्जी खत्म होती जाती है.
- सोशल मीडिया का इस्तेमाल मजेदार हो सकता है, लेकिन अगर बिना सही जानकारी के इसका इस्तेमाल किया जाए, तो ये आपकी एनर्जी को धीरे-धीरे खत्म कर देता है. सही तरीका है कि आप इसका इस्तेमाल सही तरीके से करें, ताकि आप सभी चीजों से जुड़े रहने के साथ ही थकान भी महसूस न करें.