वृंदावन जा रहे हैं तो वहां से ये 3 चीजें ना लाएं, जानिए प्रेमानंद महाराज ने क्यों बताया इसे अशुभ

Premanand Ji Maharaj: वृंदावन की मिट्टी, जल और वायु में दिव्य ऊर्जा का अनुभव होता है. जब भक्त इस पुण्यभूमि के दर्शन करने आते हैं, तो वे अक्सर यहां से कुछ चीजें याद के तौर पर अपने साथ ले जाना चाहते हैं. लेकिन प्रेमानंद जी महाराज ने कुछ जरूरी बातें बताई हैं.

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प्रेमानंद जी महाराज ने बताया क्‍या चीज ना लेकर जाएं.

Vrindavan Spiritual Significance: वृंदावन भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं की पावन भूमि मानी जाती है. ये न केवल श्रद्धालुओं के लिए एक तीर्थस्थल है, बल्कि यह आध्यात्मिक शांति और (Lord Krishna Spiritual Significance) भक्ति से सजा स्थान भी है. यहां की मिट्टी, जल और वायु में दिव्य ऊर्जा का अनुभव होता है. जब भक्त इस पुण्यभूमि के दर्शन करने आते हैं, तो वे अक्सर यहां से कुछ चीजें याद के तौर पर अपने साथ ले जाना चाहते हैं. लेकिन प्रेमानंद जी महाराज (Premanand Ji Maharaj Pravachan) के अनुसार, कुछ वस्तुएं ऐसी हैं जिन्हें वृंदावन से (Things Not To Take From Vrindavan) बाहर ले जाना न केवल अशुभ माना जाता है, बल्कि इसे पाप तुल्य भी कहा गया है. आइए जानें वे कौन-सी चीजें हैं और इन्हें बाहर ले जाने की मनाही क्यों की गई है.

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गिरिराज की मूर्ति बाहर न ले जाएं (Giriraj Idol Vrindavan Rules)

प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, वृंदावन से गिरिराज की मूर्ति को बाहर ले जाना अत्यंत अशुभ माना जाता है. गिरिराज भगवान श्री कृष्ण के अत्यंत प्रिय हैं, उनकी मूर्ति को ब्रज से बाहर ले जाना पाप तुल्य कहा गया है. यह केवल एक धार्मिक मान्यता नहीं, बल्कि ब्रज की पवित्रता और दिव्य ऊर्जा को बनाए रखने का भी एक बड़ा कारण है. गिरिराज की मूर्ति को घर ले जाने से श्रद्धालु अनजाने में अपने जीवन में संकट और अशांति को आमंत्रित कर सकते हैं.

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ब्रज की तुलसी लेकर न जाएं (Tulsi Plant Vrindavan Belief)

ब्रज की पावन भूमि में उगने वाली तुलसी का विशेष आध्यात्मिक महत्व है. प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, वृंदावन से ब्रज की तुलसी को घर ले जाना एक बड़ा अपराध माना जाता है. तुलसी एक पवित्र और दिव्य पौधा है, ब्रज की मिट्टी से गहराई से जुड़ी होती है और उसका सही स्थान यही है. इसे बाहर ले जाने से श्रद्धालु अनजाने में अपने भक्ति मार्ग से भटक सकते हैं, जिससे उनके जीवन में अशुभ होने की आशंका रहती है.

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ब्रज से पशु-पक्षी (Why not take Animals from Vrindavan)

वृंदावन में रहने वाले पशु-पक्षी भी भगवान श्रीकृष्ण के तप और आशीर्वाद से विशेष रूप से जुड़े होते हैं. प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, इन जीवों को वृंदावन से बाहर ले जाना एक गंभीर अपराध माना जाता है. ये पक्षी और जानवर अपने प्राकृतिक आशीर्वाद के कारण ब्रजभूमि में ही निवास करते हैं, और उनका स्थान परिवर्तन उनके धार्मिक व मानसिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है. इन्हें भी लेकर बाहर नहीं जाना चाहिए.

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जानिए, क्या लेकर जा सकते हैं बाहर (Religious Rules of Vrindavan)

प्रेमानंद जी महाराज ने ये भी बताया है कि कुछ वस्तुएं ऐसी हैं जिन्हें श्रद्धालु वृंदावन की पावन निशानी के रूप में अपने घर ले जा सकते हैं. इनमें चंदन, रंग, पंचामृत और कान्हा जी के वस्त्र शामिल हैं. ये सभी चीजें पवित्र मानी जाती हैं और इन्हें घर लाना शुभ होता है. ये न केवल श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक होती हैं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद से भी जुड़ी होती हैं.

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अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.

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