दुनिया की सबसे महंगी भांग कौन-सी है? क्यों हिमाचल के इस छोटे से गांव में ही उग सकती है भांग की ये खास किस्म

Malana Cream: कैनाबिस पौधे में THC (Tetrahydrocannabinol) नाम का वह तत्व पाया जाता है जो नशे के असर के लिए जिम्मेदार होता है. भांग में यह मात्रा अपेक्षाकृत कम मानी जाती है क्योंकि यह पत्तियों से बनती है

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होली की भांग से लेकर मलाणा क्रीम तक: एक ही पौधा, लेकिन कहानी बिल्कुल अलग

Malana Cream: होली और भांग का नाता काफी पुराना है. शायद इसीलिए होली का त्योहार आते ही देश के कई हिस्सों में भांग की चर्चा तेज हो जाती है. ठंडाई और पकवानों में इस्तेमाल होने वाली भांग भारतीय परंपरा का हिस्सा रही है. यह कैनाबिस पौधे की पत्तियों और बीजों से तैयार की जाती है और आम तौर पर इसे उसी रूप में हल्का माना जाता है. लेकिन इसी कैनाबिस पौधे की कहानी यहीं खत्म नहीं होती. इसी पौधे के अलग हिस्सों से बनने वाले पदार्थों की ताकत और कानूनी स्थिति दोनों बदल जाती हैं. आइए जानते हैं कि दुनिया की सबसे महंगी भांग कौन सी है.

कैनाबिस पौधे में THC (Tetrahydrocannabinol) नाम का वह तत्व पाया जाता है जो नशे के असर के लिए जिम्मेदार होता है. भांग में यह मात्रा अपेक्षाकृत कम मानी जाती है क्योंकि यह पत्तियों से बनती है. लेकिन जब बात फूलों की रेजिन की आती है, तो इसका असर ज्यादा तेज माना जाता है.

कहां मिलती है दुनिया की सबसे महंगी भांग

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की पार्वती घाटी में स्थित मलाणा गांव इसी वजह से लंबे समय से चर्चा में रहा है. यहां कैनाबिस पौधे के फूलों से हाथ से रगड़कर जो रेजिन निकाली जाती है, उससे चरस तैयार होती है, जिसे मलाणा क्रीम कहा जाता है. कुछ लोग इसे भांग समझ लेते हैं, लेकिन तकनीकी रूप से यह चरस की कैटेगरी में आती है.

इन दोनों में फर्क ये है कि पत्तियों और बीजों से बने तो भांग, जबकि फूलों की रेजिन से बने तो चरस. मलाणा क्रीम इस दूसरी कैटेगरी में आती है और इसे ज्यादा पोटेंट माना जाता है क्योंकि इसमें नशा पैदा करने वाले तत्व का स्तर ऊंचा बताया जाता है. 

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पार्वती घाटी की जलवायु और पारंपरिक हाथ से रगड़ने की तकनीक इस चरस को अलग पहचान देती है. स्थानीय स्तर पर इसकी कीमत क्वालिटी और जगह के हिसाब से अलग-अलग बताई जाती है. भारत में मलाणा क्रीम करीब 1500 से 8000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक बिक सकती है. तस्करी के जरिए जब यह दूर के बाजारों या विदेश पहुंचती है, तो इसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है.

क्या है कानून?

कानूनी स्थिति की बात करें तो भारत में NDPS कानून के तहत चरस यानी कैनाबिस की रेजिन और फूलों से जुड़े पदार्थों पर सख्त रोक है और इसका उत्पादन व बिक्री अवैध है. वहीं भांग की स्थिति कुछ अलग है. कानून में पत्तियों और बीजों को अलग श्रेणी में रखा गया है, इसलिए कई राज्यों में भांग लाइसेंस के तहत बेची जाती है, हालांकि यह हर जगह पूरी तरह खुली छूट वाली चीज नहीं है.

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कुल मिलाकर, होली में चर्चा में रहने वाली भांग और हिमाचल की मलाणा क्रीम एक ही पौधे से जरूर जुड़ी हैं, लेकिन उनकी ताकत, पहचान और कानूनी स्थिति में बड़ा अंतर है. खैर कानून अपनी जगह है लेकिन सेहत की बात करें तो ये दोनों ही चीजें सेहत के लिए खतरनाक है. ऐसे में बेहतर है कि होली बिना किसी नशे के रंग और गुलाल से साथ ही मनाएं.

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