Mantra Jaap Mala: मंत्र जाप के लिए सही माला कैसे चुनें, जानें प्रकार, महत्व और नियम

Mantra Jaap Ke Liye Konsi Mala Use Kare: माला का चुनाव मंत्र, साधना के मकसद और व्यक्ति की आस्था पर निर्भर करता है. अलग-अलग मालाओं का अलग आध्यात्मिक महत्व बताया गया है.

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सुकून के लिए कर रहे हैं माला का जाप? जानें कितने प्रकार की होती हैं मालाएं और आपके लिए कौन सी माला है सबसे सही?

Mantra Jaap Ke Liye Konsi Mala Use Kare: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक शांति की तलाश लोगों को फिर से ध्यान और मंत्र जाप की ओर खींच रही है. ऐसे में सबसे आम सवाल यही होता है कि मालाएं कितने प्रकार की होती हैं और मंत्र जाप के लिए कौन सी माला सही मानी जाती है. दरअसल, माला का चुनाव मंत्र, साधना के मकसद और व्यक्ति की आस्था पर निर्भर करता है. अलग-अलग मालाओं का अलग आध्यात्मिक महत्व बताया गया है. आइए आपको बताते है कि मालाएं कितनी तरह की होती हैं और किसका क्या काम होता है.

माला की जरूरत क्यों?

सनातन परंपरा में माना जाता है कि माला के मनकों पर उंगलियां फेरते हुए मंत्र जप करने से ध्यान केंद्रित रहता है और जप की गिनती भी सही रहती है. अधिकतर मालाओं में 108 मनके होते हैं. इस संख्या का उल्लेख कई वैदिक और ज्योतिषीय परंपराओं में मिलता है, जिसे पूर्णता का प्रतीक माना गया है.

मंत्र जाप के लिए प्रमुख मालाएं | Main Malas for Chanting Mantras

रुद्राक्ष माला:

 रुद्राक्ष को भगवान शिव से जुड़ा माना जाता है. शिव मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र के जाप के लिए इसे बहुत उपयुक्त माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों जैसे शिव पुराण में रुद्राक्ष के महत्व का उल्लेख मिलता है. यह माला एकाग्रता बढ़ाने में सहायक मानी जाती है. शिव मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र के जाप में रुद्राक्ष माला को विशेष माना जाता है.

तुलसी माला:

तुलसी की माला भगवान विष्णु और कृष्ण भक्तों में सबसे ज्यादा प्रचलित है. विष्णु मंत्र, कृष्ण मंत्र या नाम जप के लिए इसे श्रेष्ठ माना जाता है. पद्म पुराण और वैष्णव परंपरा में तुलसी को अत्यंत पवित्र बताया गया है.

चंदन माला:

चंदन की माला को शांत और सौम्य साधना के लिए अच्छा माना जाता है. देवी-देवताओं के सामान्य मंत्र, ध्यान या गायत्री मंत्र के जाप में इसका उपयोग किया जाता है. इसकी खुशबू मन को शांत करने में सहायक मानी जाती है.

कमलगट्टा माला:

कमल के फूल को माता लक्ष्मी का आसन कहा जाता है. ऐसे में कमल के बीज से बनी यह माला विशेष रूप से माता लक्ष्मी से जुड़ी मानी जाती है. लक्ष्मी मंत्र या धन से जुड़े जाप में इसका उपयोग करने की परंपरा है. मान्यता है कि इससे माता लक्ष्मी की शीघ्र कृपा होती है.

स्फटिक माला:

स्फटिक यानी क्रिस्टल की माला को शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. देवी मंत्र, शुक्र से जुड़े जप और मानसिक शांति के लिए इसका प्रयोग किया जाता है. ज्योतिष और पूजा पद्धति के पारंपरिक ग्रंथों में इसका वर्णन मिलता है.

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इन मालाओं में मनको की संख्या भी अलग-अलग हो सकते हैं. सबसे प्रचलित 108 मनकों वाली माला है, जबकि 54 और 27 मनकों वाली छोटी मालाएं भी जप के लिए इस्तेमाल की जाती हैं.

जप करते समय किन बातों का रखें ध्यान:

जप करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है. परंपरा के अनुसार जप हमेशा साफ और शांत जगह पर करना चाहिए ताकि मन एकाग्र रहे. माला को जमीन पर रखने से बचना चाहिए और जप करते समय मनकों को अंगूठे और मध्यमा से चलाने की परंपरा बताई गई है. साथ ही, अपनी जप माला को दूसरों को पहनने के लिए न देने की सलाह दी जाती है ताकि उसकी पवित्रता और व्यक्तिगत साधना की निरंतरता बनी रहे.

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कुल मिलाकर, सही माला वही है जिससे आपका मन स्थिर हो और जप में एकाग्रता बने. आस्था, मंत्र और साधना के उद्देश्य के अनुसार माला चुनना ही सबसे बेहतर तरीका माना जाता है.

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