Hyperacidity Treatment: मुझे कैसे पता चलेगा कि मुझे हाइपरएसिडिटी है? एक्स्पर्ट्स से जानें कैसे करें बचाव

Hyper Acidity Reason: भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने हाइपर एसिडिटी के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों को जागरूक करने के लिए एक सरल और प्रभावी आयुर्वेदिक गाइड जारी किया.

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How can I stop hyper acidity?

Hyper Acidity Reason: अनियमित दिनचर्या और गड़बड़ खानपान की वजह से आज के समय में हाइपर एसिडिटी की समस्या आम बात बन चुकी है, जिसमें पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड की मात्रा सामान्य से ज्यादा बनने लगती है, इससे छाती या पेट में जलन, खट्टी डकार, मुंह में खट्टा स्वाद, मतली और गैस जैसी परेशानियां होती हैं. इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फार्मेसी एंड फार्मास्युटिकल साइंसेज द्वारा लिखे गए एक जर्नल में हाइपरएसिडिटी के कारण, लक्षण और बचाव के बारे में बताया गया है. 

हाइपर एसिडिटी क्यों होती है?

हाइपर एसिडिटी की मुख्य वजह मसालेदार, तला-भुना भोजन, तनाव, अनियमित जीवनशैली और ज्यादा देर भूखे रहना शामिल है. आयुर्वेद में इसे 'अम्लपित्त' कहते हैं, सही आदतों और घरेलू उपायों से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है. 

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने हाइपर एसिडिटी के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों को जागरूक करने के लिए एक सरल और प्रभावी आयुर्वेदिक गाइड जारी किया. मंत्रालय का कहना है कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर हाइपर एसिडिटी के लक्षणों से लंबे समय तक राहत पाई जा सकती है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाया जा सकता है.

हाइपर एसिडिटी कब होती है?

हाइपर एसिडिटी तब होती है जब पेट में अम्ल (एसिड) की मात्रा सामान्य से अधिक हो जाती है. इससे पेट और छाती में जलन, ऊपरी पेट में भारीपन या तकलीफ, मतली, बेचैनी, मुंह में खट्टा स्वाद आना और कभी-कभी उल्टी जैसी शिकायतें होती हैं, ये लक्षण समय पर पहचानकर और जीवनशैली में सुधार करके आसानी से नियंत्रित किए जा सकते हैं.

हाइपर एसिडिटी कैसे कम करें? एक्सपर्ट से जानें 

इसके लिए एक्सपर्ट कुछ आसान और कारगर सुझाव देते हैं:

  • भारी, बहुत मसालेदार, खट्टे और तीखे-गर्म भोजन से पूरी तरह परहेज, जंक फूड, प्रोसेस्ड और पैकेट वाले खाद्य पदार्थ न खाएं.
  • लंबे समय तक भूखे या प्यासे न रहें, नियमित अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा भोजन करें. 
  • धूम्रपान और शराब का सेवन बिल्कुल न करें.
  • रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, खासकर दिन में 8-10 गिलास.
  • रात को समय पर सोएं और अच्छी नींद लें, अनियमित नींद पाचन को और बिगाड़ सकती है. 
  • तनाव, चिंता और मानसिक दबाव के लिए दिनचर्या में योग, ध्यान, प्राणायाम या हल्की सैर को शामिल करें. 

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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